मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। चंबल नदी के सेवरघाट से होते हुए कैलारस क्षेत्र का सड़क संपर्क राजस्थान से जुड़ने का रास्ता साफ हो गया है। राजस्थान सरकार चंबल नदी के इस घाट पर 84 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल का निर्माण कराएगी। गौरतलब है कि सेवरघाट पर 29 साल पहले भी पुल का निर्माण हुआ था, जो अधूरा रह गया था। इसी अधूरे पुल के समानांतर नए पुल का निर्माण होना है।

गौरलतब है कि कैलारस क्षेत्र में चंबल नदी के सेवरघाट पुल पर राजस्थान सरकार ने 1988 में 11 करोड़ रुपये के बजट से पुल का निर्माण शुरू करवाया था। 682 मीटर लंबे इस पुल का 251 मीटर लंबा हिस्सा राजस्थान की सीमा में तो बन गया था, लेकिन मप्र में घड़ियाल सेंक्चुरी की परमिशन नहीं मिलने से 1992 में इसका काम बंद हो गया। बाद में इस पुल की ऊंचाई को लेकर भी विवाद हुआ और फिर निर्माण दोबारा शुरू नहीं हो सका। इसी अधूरे पुल के समानांतर चंबल नदी के जल तल से 25 मीटर ऊंचा, 12 मीटर चौड़ा और 300 मीटर लंबा नया पुल बनाया जाएगा। इसके लिए राजस्थान सरकार ने 84 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर मेरेडियन कंस्ट्रक्शन कंपनी को निर्माण का ठेका दिया है। राजस्थान सरकार ने इस पुल निर्माण के लिए घड़ियाल सेंक्चुरी से भी अनुमति मांगी है। संभावना जताई जा रही है, कि जनवरी 2022 से पुल का निर्माण शुरू हो जाएगा। पुल निर्माण के लिए ठेका कंपनी को 24 महीने का समय दिया गया है, यानी फरवरी 2024 में पुल का निर्माण पूरा होना है।

210 किमी का सफर 100 किमी का रह जाएगाः

यह पुल बनने से कैलारस व जौरा के लोगों का करौली पहुंचने के लिए 100 किमी का फेर बचेगा। पुल बनने से मध्यप्रदेश-राजस्थान के बीच पत्थर, किराना व कपड़े के व्यापार पर सकारात्मक असर पड़ेगा। वर्तमान में कैलारस से करौली जाने के लिए मुरैना, धौलपुर, बाड़ी, सरमथुरा होते हुए 210 किमी की दूरी तय करना होती है। सेवरघाट पुल के बनने से कैलारस से चलने वाले लोग 100 किमी का सफर तय कर करौली पहुंच जाएंगे। इससे किराया व समय की बचत होगी। सेवर-पाली घाट का पुल बनने के बाद परिवहन भाड़ा व समय दोनों ही बचेंगे। इस पुल के बनने से जौरा विधानसभा के सिकरवारी इलाके से लेकर कैलारस क्षेत्र के लोगों को इसका सीधा फायदा होगा। क्योंकि राजस्थान क्षेत्र के ताल सही, सोने की गुर्जा, बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा क्षेत्र में यहां के लोगों की रिश्तेदारियां हैं। लोग अभी सेवर घाट से राजस्थान में पहुंचने के लिए चंबल पार करने के लिए नाव का सहारा लेते हैं। लगभग 10 साल पहले इस क्षेत्र में एक नाव पलट गई थी जिसमें 13 व्यक्तियों की मौत हो गई थी।

जमीन विवाद सुलझा, अटार घाट पुल पूरा होने की ओरः

चंबल नदी के अटार-मण्डरायल घाट पर भी राजस्थान सरकार 121 करोड़ रुपये में पुल का निर्माण करवा रही है। साल 2018 में पुल का निर्माण शुरू हुआ। 1150 मीटर लंबे इस पुल में कुल 24 पिलर बनने हैं, लेकिन मप्र की सीमा में एक पिलर और 560 मीटर लंबी एप्रोज रोड जिस हिस्से में बननी है उसमें तीन किसानों के खेत की 2.007 हेक्टेयर जमीन आ रही, इस जमीन का अधिग्रहण नहीं होने से पिलर का काम छह महीने अटका रहा। अब यह जमीन अधिग्रहित हो चुकी है और सभी पिलर बन चुके हैं। अब पिलरों पर स्लैब डालने का काम चल रहा है। मार्च 2022 में इस पुल के उद्घाटन के आसार हैं। अटार घाट का यह पुल इतना जरूरी है कि यहां से राजस्थान के शहरों में जाने के लिए रोज हजारों लोग स्टीमर से निकलते हैं। गर्मी के दिनों में यहां पांटून पुल बनता है। वर्तमान में दो स्टीमर चल रहे हैं, जिनमें बैठने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। इस पुल के बनने से सबलगढ़ से जयपुर का फासला मात्र 225 किलोमीटर रह जाएगा, जो अभी करीब 370 किमी दूर पड़ता है। राजस्थान के करौली की दूरी सिर्फ 60 किलोमीटर रह जाएगी, जो वर्तमान में मुरैना-बाड़ी-बसेड़ी होकर 210 किलोमीटर से ज्यादा है।

वर्जन

- सेवरघाट पर नए पुल निर्माण के लिए ठेका दे दिया गया है, जनवरी 2022 में इसका काम शुरू हो जाएगा। पुराने पुल के समानांतर ही उससे ऊंचा नया पुल बनेगा। ठेका कंपनी को दो साल में पुल बनाकर देना है। पुल के लिए घड़ियाल सेंक्चुरी व अन्य विभागों की अनुमतियां लेने का काम जारी है।

विजय सिंह प्रोजेक्ट इंचार्ज,

ब्रिज कॉर्पोरेशन राजस्थान

सेवरघाट पर नवीन पुल के लिए राजस्थान सरकार ने अनुमति के लिए पत्र लिखा है। घड़ियाल सेंक्चुरी में निर्माण के लिए शुल्क जमा होनी है, वह जमा करवाने के बाद अनुमति दे दी जाएगी।

अमित निकम डीएफओ,

घड़ियाल सेंक्चुरी

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local