मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। मुरैना जिले को राजस्थान व उत्तर प्रदेश से जोड़ने के लिए चंबल नदी पर दो पुलों का निर्माण चल रहा है, अब एक और नया पुल राजस्थान सरकार ने स्वीकृत किया है। सबलगढ़ के अटार घाट पुल पर बनने वाले पुल में आ रही सभी अड़चने खत्म हो गईं। पुल के सभी 24 पिलर (स्पान) बनकर तैयार हो गए हैं, अब इन पर स्लैब बिछाकर सड़क निर्माण का काम होना है। उधर अंबाह क्षेत्र में उसैद घाट पुल का निर्माण भी रफ्तार पकड़ रहा है।

गौरतलब है, कि चंबल नदी के अटार-मण्डरायल घाट पर पुल निर्माण की स्वीकृति साल 2018 में राजस्थान सरकार ने दी थी। 121 करोड़ 97 लाख रुपये की लागत वाले 1150 मीटर लंबे इस पुल में कुल 24 पिलर बनने हैं। राजस्थान ने अपनी सीमा में बनने वाले 12 पिलर छह पिलर और 615 मीटर लंबी एप्रोच रोड छह महीने पहले ही लगभग पूरी कर ली है, लेकिन मप्र में घड़ियाल सेंक्चुरी की एनओसी नहीं मिली, इसलिए काम लगभग सवा साल बाद शुरू हुआ। घड़ियाल सेंक्चुरी की एनओसी मिल गई तो उन किसानों की जमीन का अधिग्रहण मुरैना जिला प्रशासन नहीं कर पाया, जिनकी जमीन में पुल के दो पिलर बनने थे, इसीलिए महीनों तक काम बंद रहा। यह मामला नईदुनिया ने उठाया, उसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने दोनों किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया, जिसमें दो पिलरों का निर्माण पूरा हो गया है। अब पुल के सभी 24 पिलर बनकर तैयार हो चुके हैं। राजस्थान ब्रिज कॉर्पोरेशन के अफसरों के अनुसार अगले साल यानी 2022 तक पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा। इस पुल के बनने से सबलगढ़ से जयपुर का फासला मात्र 225 किलोमीटर रह जाएगा, जो अभी करीब 370 किमी दूर पड़ता है। राजस्थान के करौली की दूरी सिर्फ 60 किलोमीटर रह जाएगी, जो वर्तमान में मुरैना-बाड़ी-बसेड़ी होकर 210 किलोमीटर से ज्यादा है।

सेवरघाट पर बनेगा नया पुल

कैलारस क्षेत्र में चंबल नदी के सेवरघाट पर भी नया पुल का निर्माण होगा। गौरतलब है कि सेवरघाट पर 29 साल पहले राजस्थान सरकार ने पुल बनाना शुरू किया था, जो पूरा नहीं हो पाया। अधूरे पड़े पुराने पुल के पास ही 84 करोड़ रुपये में नया पुल बनेगा। इसके लिए राजस्थान सरकार ने बजट स्वीकृत कर दिया है। गौरलतब है कि कैलारस क्षेत्र में चंबल नदी के सेवरघाट पुल पर राजस्थान सरकार ने 1988 में 11 करोड़ रुपये के बजट से पुल का निर्माण शुरू करवाया था। 682 मीटर लंबे इस पुल का 251 मीटर लंबा हिस्सा राजस्थान की सीमा में तो बन गया था, लेकिन मप्र में घड़ियाल सेंक्चुरी की परमिशन नहीं मिलने से 1992 में इसका काम बंद हो गया। बाद में इस पुल की ऊंचाई को लेकर भी विवाद हुआ और फिर निर्माण दोबारा शुरू नहीं हो सका। इसी अधूरे पुल के समानांतर चंबल नदी के जल तल से 25 मीटर ऊंचा, 12 मीटर चौड़ा और 300 मीटर लंबा बनाया जाएगा। इसके लिए राजस्थान सरकार ने 84 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर मेरेडियन कंस्ट्रक्शन कंपनी को निर्माण को ठेका दिया है। राजस्थान सरकार ने इस पुल निर्माण के लिए घड़ियाल सेंक्चुरी, मुरैन से भी अनुमति मांगी है। जनवरी 2022 से पुल का निर्माण शुरू होने की उम्मीद है और फरवरी 2024 में पुल का निर्माण पूरा करने का लक्ष्‌य रखा है। यह पुल बनते ही मुरैना व कैलारस क्षेत्र का राजस्थान से जुड़ने का नया रास्ता बनेगा।

उसैद घाट पुल, रफ्तार पकड़ रहा 90 करोड़ का पुल

अंबाह क्षेत्र में चंबल नदी के उसैद-पिनाहट घाट पर भी पुल का निर्माण हो रहा है, जिसका भूमिपूजन 28 फरवरी को केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने किया है। इस पुल के निर्माण की घोषणा 32 साल पहले अंबाह क्षेत्र में आए तात्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने की, लेकिन पीएम की घोषणा के बाद भी इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका। इस पुल के लिए 90 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ है। पुल की लंबाई 700 मीटर वाले इस पुल में 14 पिलर बनने हैं, जिनका काम चल रहा है। 11 मीटर चौड़ा यह पुल टू-वे होगा। इसके बनने के बाद मुरैना, अंबाह का सीधा सड़क संपर्क उत्तर प्रदेश के आगरा, कानपुर आदि शहरों से हो जाएगा। आगरा जाने के लिए अंबाह क्षेत्र के लोगों को 39 किमी दूरी कम तय करनी पड़ेगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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