पोरसा(नईदुनिया न्यूज)। जिले भर में इस समय डीएपी खाद का संकट गहराया हुआ है। किसान बोवनी के लिए हर कीमत पर इस डीएपी खाद को पाना चाह रहा है, जिसका फायदा अब नकली खाद बनाने वाले भी उठाने लगे हैं। गुरुवार की सुबह पोरसा तहसीलदार व एसएडीओ ने पुलिस के साथ गोकुलपुरा इलाके में संचालित ऐसे ही एक नकली खाद बनाने वाले गोदाम पर छापा मार कार्रवाई की। जहां से 140 नकली डीएपी खाद के बोरे जब्त किए गए हैं। इसके साथ ही पैकिंग करने की मशीन सहित इफको कंपनी के नाम से छपे हुए खाली बोरे भी जब्त किए गए हैं। कार्रवाई के दौरान इस अवैध गोदाम को चलाने वाले लोग भाग निकले। पुलिस अब आरोपित पर एफआइआर दर्ज कर रही है।

तहसीलदार विवेक सोनी और कृषि विभाग के एसएडीओ वीरेश शर्मा को नकली खाद बनाने वाले गोदाम के बारे में गुरुवार को पता चला। जिस पर पोरसा थाना प्रभारी रामपाल सिंह जादौन को साथ लेकर उन्होंने गोकुलपुरा गांव के एक मकान पर छापामार कार्रवाई की। जहां देखा गया तो यहां आठ मजदूर इफको डीएपी खाद के बोरों को पैक करने में जुटे हुए थे। एसएडीओ ने देखा कि जिस खाद को डीएपी के बोरों में पैक किया जा रहा है, वह ग्रो प्लस खाद है। जिसकी बाजार में कीमत महज 500 रुपये है, जबकि डीएपी खाद की कीमत 1200 रुपये है। मुनाफा कमाने के लिए यहां इस ग्रो-प्लस खाद को पैकिंग कर डीएपी बनाया जा रहा था। इस दौरान इस गोदाम से टीम ने 140 पैक बोरे तथा 70 से 80 खाली बोरे तथा एक पैकिंग की मशीन बरामद की। पुलिस ने जब इस गोदाम के मालिक की जानकारी चाही तो पता चला कि यह गोदाम चंदोखर गांव के राजा सिंह तोमर का है। जो मौके से भाग निकला। पुलिस अब राजा सिंह तोमर के खिलाफ मामला दर्ज कर रही है।

ग्रो प्लस खाद में होता है सिर्फ फास्फोरसः

यहां जिस ग्रो प्लस खाद को डीएपी के बोरों में भरा जा रहा था, उसमें सिर्फ फास्फोरस होता है। जबकि डीएपी में नाइट्रोजन और फास्फोरस दोनों ही होते है। यही वजह है कि इन दोनों की कीमतों में दोगुने का भी अंतर होता है। मुनाफा कमाने के लिए इस खाद को डीएपी के रूप में बेचने की तैयारी की जा रही थी। यह ग्रो प्लस खाद बाजार में आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है। जिसे भरकर यहां लाया गया और पैकिंग शुरू कर दी। इस समय किसान डीएपी खाद के लिए दर-दर भटक रहा है। ऐसे में यह नकली खाद भी तुरंत ही बिक जाता। अधिकारियों के मुताबिक गोदाम को कुछ दिन पहले ही किराए पर लिया गया था। जिसके चलते यह बाजार तक पहुंच नहीं पाया।

दीपावली पर चूना रखने के नाम पर किराए पर लिया गोदामः

गोकुलपुरा में यह गोदाम जिस मकान में मिला है, उसके मालिक धर्मेंद्र सिंह तोमर है। जिन्होंने बताया कि पांच दिन पहले ही इस गोदाम को दीपावली त्योहार के चलते चूना रखने के लिए किराए पर लिया गया था। जिस पर गुरुवार की अलसुबह ही यहां यह माल पहुंचाया गया था। जिसके बाद लेबर ने यहां आकर काम शुरू कर दिया। जिसमें कमरे में इन बोरों को पैक किया गया।

इफको कंपनी के खाली बोरों की भी होगी जांचः

यहां जिन बोरों में इस ग्रो प्लस खाद को भरा जा रहा था, वह इफको कंपनी के डीएपी खाद के बोरे थे। अब अधिकारी इस मामले की भी जांच करेंगे कि यह इफको कंपनी के खाली बोरे कहीं से आए या फिर इन आरोपित ने कहीं से इन्हें प्रिंट कराया है। इसके साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि जो ग्रो प्लस खाद इसमें भरा जा रहा था कहीं वह भी एक्सपायरी डेट का तो नहीं था। जिसके सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगें। अगर यह एक्सपायरी हुआ तो इसमें फास्फोरस भी नहीं होगा। ग्रो-प्लस खाद को भरने की एक वजह यह भी है कि यह डीएपी जैसा ही कुछ-कुछ दिखाई देता है। जिससे किसान इसे पहचान नहीं सके।

कथन

-खाद के गोदाम को पकड़ा गया है, जिसमें डीएपी खाद की नकली पैकिंग की जा रही है। इस पूरे माल को जब्त किया गया है। जिसमें हर स्तर पर जांच होगी। वहीं आरोपितों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

विवेक सोनी, तहसीलदार पोरसा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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