मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। बारिश के दिनों में चंबल नदी में हर साल ऐसी बाढ़ आती है कि किनारे के कई गांवों में पलायन जैसे हालात बन जाते हैं। बारिश में बाढ़ से जूझने वाले कई गांवों में सालभर पीने के पानी का संकट रहता है। सात गांव ऐसे हैं, जहां के कुएं, हैंडपंपों से इतना खारा पानी निकलता है, कि उसे पीना तो दूर कपड़े तक धोना मुश्किल है। इन गांवों में पेयजल सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च हो चुके, लेकिन 10 हजार की आबादी को पीने लायक पानी मुहैया नहीं हो सका। ऐसे में यह गांव डेढ़ से दो किलोमीटर दूर चंबल नदी से पीने का पानी लाते हैं।

खारे पानी के संकट से जूझ रहे यह सातों गांव अंबाह ब्लाक में आते हैं, जिनमें चुस्लई, इंद्रजीत का पुरा, सुखध्यान का पुरा, भोलापुरा, बिचपई, नोहरा और रामगढ़ गांव है। इन सातों गांव की आबादी 12 हजार से ज्यादा है। कहने को इन गांवों में पानी के लिए कुएं, बोर, हैंडपंप सब हैं, लेकिन इनमें से खारा पानी निकलता है। कुछ बोर ही पीने लायक पानी देते हैं। खारे पानी के संकट से जूझ रहे इन गांवों में मीठा पानी मुहैया कराने के लिए पीएचई विभाग ने साल 2008-09 में 40 लाख रुपये खर्च करके सात बोर करवाए और चार पानी की टंकियां भी बनवाईं, लेकिन बोरों को चलाने के लिए बिजली कनेक्शन की सुविधा नहीं हुई। टंकिया बनवाने के बाद आज तक गांवों में पेयजल सप्लाई के लिए पाइप लाइन नहीं बिछाई गई। करीब साढ़े पांच साल पहले बिचपई गांव में साढ़े 12 लाख रुपये की लागत से सौरऊर्जा संयत्र लगवाया, जिससे बोर चल सके। कुछ दिन यह प्रयोग सफल रहा लेकिन देखरेख के अभाव में सौर ऊर्जा संयत्र की प्लेटें ही चोरी हो गईं। पहले इन गांवों में बिजली नेटवर्क नहीं था, लेकिन अब सभी सातों गांव बिजली से रोशन हैं, फिर भी इन गांवों में नलजल योजनाओं का काम पूरा नहीं हो पा रहा है।

पहाड़गढ़, कैलारस और रामपुर क्षेत्र के कई गांवों में जल संकटः

मुरैना जिले के पहाड़गढ़, रामपुर व कैलारस क्षेत्र में गर्मी के दिनों में कई गांव भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। इनमें मानपुर, बहराई, बगेबर, धौधा, कालाखेत, धोविनी, जडेरू, रकेरा, आरेठी। कैलारस के चमरगवां, डमेजर। सबलगढ़ के कोल्हूडांडा, नंदपुरा, जौरा के छैरा, अंबाह के पूठा नवीन, बड़फरा, खिरेंटा, बगियापुरा, रामपुर, जोंसिल, गोबरा, बेरखेड़ा, देवरा, सालई, ऐंचवाड़ा, केलरी, गणेशपुरा, नंदापुरा आदि गांवों में हर साल गर्मी के दिनों में पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाता है। रामपुर के जोंसिल गांव में दो किलोमीटर दूर खेतों में लगे बोरों से पानी लाने के लिए ग्रामीण बैलगाड़ी में ड्रम व खाली बर्तन लेकर रोज सुबह पानी के लिए जद्दोजहद करते नजर आते हैं। रामपुर कस्बे में ही पानी का संकट ऐसा है, कि कई लोगों ने पानी के लिए हाथठेले बनवा लिए हैं। इन हाथठेलों से सिर्फ पानी ढोने का काम होता है। रामपुर कस्बे में पेयजल संकट इतना बड़ा है, कि हर गर्मी के सीजन में पानी के लिए लोग आंदोलन करते हैं। पर पेयजल के हालात नहीं सुधरते।

वर्जन

- अंबाह के इन गांवों में खारे पानी की शिकायत हैं, इसके लिए नलजल योजनाओं का जो काम अधूरा पड़ा है, उसे पूरा करने के लिए दोबारा टेंडर निकाले जा रहे हैं। जल्द ही इन गांवों की नलजल योजनाओं का काम पूरा करवाकर मीठे पानी की सप्लाई की जाएगी। जिन गांवों में पेयजल संकट है वहां टैंकरों के माध्यम से पानी परिवहन किया जा रहा है।

एसएल बाथम,ईई, पीएचई मुरैना

Posted By: Nai Dunia News Network

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