Morena News: मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। मंदिर की सम्पत्ति पर अवैध कब्जा और फर्जी रसीदें बनाकर मंदिर की जमीन व दुकानों का किराया वसूलने के मामले में फरार चल रहे तीन आरोपितों में से दो को पुलिस ने पकड़ा। फर्जीवाड़े के इन आरोपितों को पुलिस जेल भेजने की तैयारी में थी, लेकिन यह दोनों आरोपित भाजपा नेता निकले। इसका असर यह हुआ कि रातोंरात थाने से जमानत देकर छोड़ दिया गया।

अब पुलिस की हालत कुछ ऐसी है, कि थाना प्रभारी इसे आला अफसरों को निर्णय बता रहे हैं, तो आला अफसर इसके लिए थाना प्रभारी को जिम्मेदार बता रहे हैं। तपसी गुफा मंदिर की करोड़ों रुपये की जमीन जौरा खुर्द में है। इस जमीन दुकानें बनी हुई हैं, इस जमीन व दुकानों का फर्जी किराया वसूलने के मामले में सिविल लाइन थाने में 9 नवंबर 2022 को एक एफआइआर दर्ज हुई थी।

यह एफआइआर पुजारी शिवशरण की शिकायत पर हुई, जिसमें आरोपित दानबिहारी शरण, रामशरण के अलावा पूर्व सरपंच सुरेंद्र यादव और भाजपा नेता अशोक यादव पर धारा धारा 420, 448, 294 और 506 में केस दर्ज हुआ था। पुलिस दानबिहारी को पकड़ लिया, जो अभी तक जेल में हैं।

इसी फर्जीवाड़े में फरार चल रहे भाजपा नेता अशोक यादव व पूर्व सरपंच सुरेंद्र यादव को सिविल लाइन पुलिस ने शनिवार की शाम गिरफ्तार कर लिया। उस समय सिविल लाइन टीआइ प्रवीण चौहान ने बताया कि दोनों पर गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज है, थाने के रिकार्ड में इनकी गिरफ्तारी दर्ज कर दी है, अब इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।

भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में ऐसा हड़कंप मचा, कि आधी रात को सीएसपी अतुल सिंह सिविल लाइन थाने पहुंचे। इसके बाद रात 12 बजे के बाद दोनों आरोपितों को थाने से जमानत देकर छोड़ दिया गया। जबकि इसी मामले में पहले गिरफ्तार हो चुके दानबिहारी को कोर्ट ने अब तक जमानत नहीं दी है।

बताया गया है कि पूर्व सरपंच सुरेंद्र यादव और भाजपा नेता अशोक यादव की जमानत कोर्ट खारिज कर चुका है, ऐसे में थाने से 420 जैसी गंभीर धाराओं में जमानत देना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया उठा रहा है।

इनका कहना है

हां तपसी गुफा मंदिर केस में गिरफ्तारी किए गए सुरेंद्र यादव और अशोक यादव को थाने से जमानत देकर छोड़ा गया है। यह बड़े अफसरों का निर्णय है, आप उनसे पूछ लीजिए।

प्रवीण चौहानटीआइ, सिविल लाइन

अशोक यादव और सुरेंद्र यादव पर गंभीर धाराएं नहीं थीं, इसलिए हमने उन्हें छोड़ा है।कोर्ट से जमानत खारिज होने का मामला मुझे नहीं पता जमानत देने का निर्णय थाना प्रभारी का था, पूरी बात वही बता सकते हैं।

अतुल सिंहसीएसपी, मुरैना

Posted By: Nai Dunia News Network

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