Morena News: मुरैना। नईदुनिया प्रतिनिधि । दिमनी क्षेत्र से गुजरी क्वारी नदी मछलियों का श्मशान बन गई है। किसी जहरीले केम‍िकल के कारण नदी के पानी में झाग निकल रहे हैं और इन झागों के बीच हजारों मरी मछलियां पानी में तैर रही हैं। पानी से इतनी बुरी गंद आती है कि लोग आसपास ठहर नहीं सकते। दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन इस समस्या के निदान में कोई रुचि नहीं ले रहा।

दिमनी में अंबाह रोड पर क्वारी नदी पर स्टॉप डैम बना है। इसी के पास में पुल का निर्माण हो रहा है। स्टॉप डैम से नदी का जो पानी निकल रहा है उसमें ऐसे झाग निकल रहे हैं, मानों किसी ने नदी में डिटर्जेंट पाउडर घोल दिया हो। यह झाग पानी में घुसे किसी केम‍िकल के कारण हो रहे हैं। इसका दुष्प्रभाव मछलियों पर ऐसा दिख रहा है कि पानी में जिंदा मछलियां कम और मरी हुई मछलियां ज्यादा उतरा रही हैं।

मछलियां इतना तड़प-तड़कर मर रही हैं कि, सैकड़ाें मछली पानी से बाहर किनारे पर आकर दम तोड़ चुकी हैं। स्टाॅप डैम के पास क्वारी नदी पर पुल निर्माण का काम चल रहा है। नदी के पानी और मरी हुई मछलियों के बारे में पुल निर्माण पर गार्ड की नौकरी करने वाले वीरसिंह का कहना है कि पानी से ऐसी बदबू आती है कि नदी किनारे एक मिनट नहीं रुका जाता। इस समस्या से अंबाह एसडीएम राजीव समाधिया से लेकर वन विभाग तक पल्ला झाड़ते हुए इसकी जिम्मेदारी मुरैना के अफसरों की बता रहे हैं। दूसरी तरफ वन विभाग क्वारी नदी को अपने कार्यक्षेत्र में नहीं मान रहा।

फैट्री और नालों का पानी बना रहा नदी का जहरीला

क्वारी नदी मुरैना के पास से घिरोना, देवरी, बिंडवा, बसई होते हुए दिमनी तक पहुंची है। मुरैना में ही नदी इतनी दूषित हो जाती है कि पानी में रहने वाली मछलियों का की जान का दुश्मन ये पानी बन गया है। घिरोना के पास चल रही एक सॉल्वेंट फैक्ट्री का केम‍िकल क्वारी नदी में मिल रहा है। इसके अलावा मुरैना शहर के दोनों बड़े नालों का गंदा पानी भी क्वारी नदी में मिल रहा है। नालों में भी इंडस्ट्री एरिया की कई फैक्ट्री का गंदा व केम‍िकल वाला पानी छोड़ा जाता है। बस इसी कारण क्वारी नदी का पानी इतना विषैला होता जा रहा है कि दिमनी क्षेत्र में स्टॉप डैम से पानी निकलते ही पानी में झाग बन जाते हैं।

मवेशी को नदी किनारे ले जाने से डर रहे किसान

नदी के पानी से मछलियों की हालत और पानी में उमड़ते झाग देखकर आसपास के किसान डरे हुए हैं। इस कारण किसान अपनी मवेशियों को पानी पीने के लिए नदी के आसपास भी नहीं ले जा रहे। भागना, दिमनी, रपट का पुरा, बरेथा, लहर, पतारा, नावली गांव में नदी का दूषित पानी चर्चा और दहशह का मुद्दा बन गया है। दिमनी के पूर्व सरपंच सतेन्द्र तोमर बताते हैं कि पानी में उतरा रहीं मरी हुई मछलियों से उठ रही बदबू और पानी में झाग देखकर लगता है कि किसी मवेशी ने गलती से ये पानी पी लिया तो मवेशी भी मर जाएगी। इसलिए नदी के आसपास मवेशी तक नहीं जाने देते हैं लोग।

इनका कहना है

- केम‍िकल के कारण जल के भौतिक व रासायनिक गुणाें में बदलाव हो जाता है। किसी फैक्ट्री या सिंथेटिक दूध बनाने वालों ने नदी में कैमिकल छोड़ा है। इससे पानी की पीएच वेल्यू बदल जाती है। कैमिकल अभिक्रमण का काम करने लग जाते हैं, जिससे पानी में घुलित ऑक्सीजन की भारी कमी हो जाती है और पानी जहरीला हो जाता है। इसी से झाग बनते हैं और जलीय जीवों की मौत हो जाती है। इससे बचने के लिए नदी में में केम‍िकल को मिलने से रोकना ही एक मात्र उपाय है, नहीं हो स्थिति बिगड़ती जाएगी।

डॉ. विनायक सिंह तोमर जीव वैज्ञानिक, मुरैना

- मौके पर मत्स्य विभाग की टीम को भेज रहे हैं, वह मछलियों की मौत का कारण पता करेंगे और पीएचई की टीम पानी की क्वालिटी चेक करेगी, कि पानी में आखिर गड़बड़ी क्या है। अगर फैक्ट्री और नालों का पानी नदी में मिल रहा है तो यह गलत है। इसे रुकवाने के इंतजाम नगर निगम से करवाएंगे।

आरएस बाकना एसडीएम, मुरैना

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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