पोरसा। नगर में आधा दर्जन से अधिक पेथौलॉजी लैब का संचालन किया जाता है, लेकिन इन लैब के पास न तो कोई लाइसेंस है और ना ही कोई डॉक्टर। इसके बावजूद इनका नगर में धडल्ले से संचालन किया जा रहा है। खास बात यह है कि इन लैबों पर जांच के नाम पर मरीजों से मनमाने तरीके से पैसे वसूले जाते है। जिनकी कोई रसीद तक मरीज को नहीं दी जाती। इस संबंध में कुछ मरीजों ने लैब पर हो रही इस अनियमितता शिकायत बीएमओ से भी लिखित में की है, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है। उल्लेखनीय है कि नगर में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के ओर पास ही लगभग आधा दर्जन पेथौलॉजी लैब का संचालन किया जा रहा है। दरअसल यह लैब पूरी तरह से अवैध तरीके से संचालित की जा रहीं है। क्योंकि न तो इन पर किसी तरह का लाइसेंस ही मौजूद है और जांच के लिए डॉक्टर भी नहीं है।

यह लैब कलेक्शन पाइंट की तरह काम करतीं है जहां जांच तो की जाती है लेकिन डॉक्टरों के साइन बाहर से कराए जाते है। खास बात यह है कि इन लैब पर जांचों के लिए पैसा भी मनमाने तरीके से वसूल किया जाता है। यह पैसा दोगुने से भी ज्यादा होता है। जिसकी कोई रसीद तक मरीज को नहीं दी जाती। मरीज अगर रसीद की मांग भी करता है तो उससे कह दिया जाता है कि जांच करानी है तो कराओ, लेकिन रसीद नहीं दी जाएगी। यह सब लैब अस्पताल के ओर पास ही संचालित की जातीं है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इनकी जांच तक नहीं की जाती। जिसके चलते यह अनियमिता का खेल सालों से यहां चल रहा है।

मलेरिया जांच के लिए 400 रुपए

नगर की बुखार से पीडि़त मरीज ज्योति गुप्ता एक प्राइवेट लैब पर मलेरिया जांच कराने के लिए पहुंची, जिसके एवज में उनसे 400 रुपए लिए गए। जब उन्होंने कहा कि मुरैना लैब में महज 160 रुपए लिए थे। जब इन 400 रुपए की ज्योति ने रसीद मांगी तो उन्हें रसीद देने से भी इंकार कर दिया गया। जिसके बाद ज्योति ने इस संबंध में लिखित में बीएमओ से शिकायत की और इन लैब की जांच कराने की मांग की।

बाहर नहीं की जाती इनकी रिपोर्ट मान्य

एक तरफ नगर में संचालित लैब मनमाने तरीके से पैसे वसूलते हैं वहीं इनकी रिपोर्ट को अगर बाहर किसी डॉक्टर को दिखाया जाता तो उसे मान्य नहीं किया जाता। जिससे मरीजों को फिर से पैसे खर्च कर वहीं जांच करानी पड़ती है। कई बार देखने में आया है कि इनकी रिपोर्ट गलत तक साबित हो जाती है। ऐसे मामले भी सामने आते रहें है। इसकी वजह यह है कि किसी भी लैब पर प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं है। जबकि लैब पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति होनी चाहिए। यहां अनप्रशिक्षित कर्मचारी ही मरीजों की जांच करते हैं। जिससे यह अनियमितता ज्यादा होती है।

-पेथौलॉजी लैबों की जांच के लिए हमने कागज मंगाए है इसके लिए हमने पत्र जारी कर दिया है।-डॉ. पीपी शर्मा, बीएमओ पोरसा।

Posted By: Nai Dunia News Network