हरिओम गौड़, मुरैना, Morena News। सरकारी गोदामों में अनाज की भरपूर उपलब्धता होने के बावजूद वृद्धाश्रमों को राशन नहीं मिल पा रहा है। कहीं तीन तो कहीं चार माह से गेहूं-चावल का स्टॉक नहीं मिलने से आश्रम संचालकों को या तो उधार राशन खरीदना पड़ रहा है या फिर समाजसेवियों से मदद मांगनी पड़ रही है। मुरैना के वृद्धाश्रम में इन दिनों 12 बुजुर्ग रह रहे हैं। इनके लिए हर माह डेढ़ क्विंटल गेहूं व 50 किलो चावल का स्टॉक सरकारी राशन दुकान से आता था, लेकिन चार माह से दुकान संचालक यह कहकर राशन नहीं दे रहा है कि सूची से वृद्धाश्रम का नाम काट दिया गया है। राशन के अलावा प्रति बुजुर्ग के हिसाब से आश्रम प्रबंधन को 1000 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण के लिए भी मिलते हैं लेकिन यह राशि भी अगस्त माह से नहीं मिली। कर्मचारियों का वेतन भी नहीं आ रहा है। इसी तरह वृद्धाश्रम की तरह निशक्त छात्रावास, महिला सुधार गृह व बालगृहों का भी राशन सरकार ने महीनों पहले से बंद कर दिया है।

जहां वृद्धाश्रम वहां यही हाल

श्योपुर के वृद्धाश्रम में 25 बुजुर्ग हैं, जिन्हें आपूर्ति विभाग द्वारा हर महीने 3.24 क्विंटल गेहूं और 81 किलो चावल दिए जाते थे। आश्रम के मैनेजर मनोज वैष्णव के मुताबिक चार माह से यह राशन बंद है। अब तक चार बार अधिकारियों से मिलकर आवेदन दे चुके हैं पर कोई सुनवाई नहीं कर रहा। ऐसे में समाजसेवी संगठनों की मदद से आश्रम की रसोई संचालित कर रहे हैं। शिवपुरी के वृद्धाश्रम में करीब 20 बुजुर्ग रहते हैं, इनके लिए भी चार माह से राशन नहीं मिला है।

पांच माह से भरण पोषण राशि, चार माह से राशन व कर्मचारियों का वेतन नहीं मिल रहा। दुकानों से उधार ला रहे हैं या किसी समाजसेवी से 25 तो कभी 50 किलो गेहूं मंगवा लेते हैं। अधिकारी तो भोपाल से ही राशन रुकने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। -शिवकुमार शर्मा, प्रबंधक, वृद्धाश्रम मुरैना

वृद्धाश्रम, महिला आश्रम, सुधार गृह जैसे सभी आश्रय स्थलों का राशन का स्टाक पीडीएस दुकानों को भी नहीं मिल रहा इसलिए वितरित नहीं हो रहा है। ऑनलाइन सिस्टम में स्टाक ही नहीं आ रहा है। मुरैना के अलावा अन्य जिलों में भी यही समस्या आ रही है। हम भोपाल स्तर पर यह बात पहुंचा चुके हैं, जल्द ही इस समस्या का समाधान करवाने के प्रयास कर रहे हैं। -बीएस तोमर, जिला आपूर्ति नियंत्रक अधिकारी, मुरैना

Posted By: Nai Dunia News Network

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