Morena News: मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। चंबल के बीहड़ों में कभी बागियों की बंदूकों की आवाज गूंजा करतीं थी। पुलिस के लिए चुनौती बने बागियों (डकैतों) का सफाया हुआ तो अब यहां अवैध शराब और मिलावट के कारोबार ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। माफिया ने इसके लिए बागियों का ही तरीका अपनाया है। बीहड़ दुर्गम क्षेत्रों में अपने कारोबार का ठिकाना बनाया है। जहां इस अवैध कारोबार की भनक आसानी से पुलिस तक पहुंचती नहीं और अगर पहुंचती भी है तो पुलिस को सटीक सूचना के बाद भी मौके तक पहुंचने में दो से तीन घंटे का समय लगता है। बीहड़ में बसे गांवों में जहरीली शराब बनाकर बड़े पैमाने पर बाइकों से चंबल के अलावा राजस्थान और यूपी से सटे इलाकों में सप्लाई की जाती है।

स्थिति यह है कि यहां ज्यादातर गांव अवैध शराब के कारोबार में लिप्त हो चुके हैं। खास बात यह है कि इसके लिए बीहड़ों की दुर्गम जगहों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां पुलिस का पहुंचना आसान नहीं है। इसमें सहायक बनती है चंबल नदी की सीमा। यहां से सामान भी आसानी से राजस्थान और उत्तरप्रदेश से लाया जा सकता है और यहां से उसी रास्ते से पहुंचाया भी जा सकता है।

यही वजह है कि चंबल में यह अवैध शराब कारोबारी व मिलावट खोर अपने पैर पसारते चले गए। यहां राजस्थान से अंग्रेजी शराब की तस्करी की जा रही है, वहीं अवैध शराब की भट्टियां भी बढ़ गईं हैं। जिन्हें बीहड़ों में ही लगाया जाता है। नूराबाद पुलिस ने कुछ दिन पहले नाऊपुरा गांव में एक अवैध शराब बनाने की भट्टी को पकड़ा, जिसमें पुलिस को कार्रवाई के लिए पहुंचने के लिए दो घंटे तक इन बीहड़ इलाकों में पैदल चलना पड़ा। दुर्गम स्थानों तक पहुंचने में पुलिस को समय लगता है, इसी समय में कोई न कोई इन अवैध शराब कारोबारियों तक सूचना पहुंचा देता है। जिससे इनका पकड़ना भी मुश्किल हो जाता है।

इस वजह से फैल रहा अवैध काराबोर

पुलिस व प्रशासन की निष्क्रियता के साथ-साथ लाइसेंसी ठेकेदारों की मनमानी ने भी अवैध व नकली शराब के कारोबार को फैलने में मदद की है। मुरैना में लाइसेंसी दुकानों पर प्रिंट रेट से 15 से 20 फीसद महंगी शराब मिल रही है। इसी कारण लोग सस्ती होने कारण नकली व अवैध शराब के जाल में फंस जाते हैं। 15 लोगों को लीलने वाली शराब का क्वार्टर महज 50 रुपये में मिल गया था। अवैध और नकली शराब के कारोबार करने वाले इतने बेखौफ हैं कि बीहड़ से सटे गांवों में किराना, पानी-बीड़ी की दुकानों पर इसको बिकवा रहे हैं। छैरा मानपुर गांव में जिस शराब से मौतें हुई उसे छोटी-छोटी किराने की दुकानों से बेची गई थी।

नकली और राजस्थान-दिल्ली की शराब आधी सस्ती

मप्र में शराब इतनी महंगी है कि जो अंग्रेजी शराब की जो बोतल मुरैना में 2400 रुपये की है वह राजस्थान के धौलपुर में 1200 से 1300 रुपये में मिल जाती है। बस यही कारण है कि मुरैना के शराब तस्कर, राजस्थान के शराब माफियाओं के साथ मिलकर अंचल में हर रोज 40 से 45 लाख रुपये की राजस्थान व हरियाणा की खराब अवैध तरीके से खपा रहे हैं। नकली शराब के कारोबार के फैसले का मुख्य कारण देसी शराब की महंगाई और लाइसेंसी ठेकों पर प्रिंट रेट से ज्यादा पर बिक्री होना है। देसी शराब का जो पौआ 120 रुपये में बिक रहा है वही पौआ नकली शराब का मात्र 50 रुपये में मिल रहा है।

बीहड़ में नकली शराब बनाने की फैक्ट्री तक

टेंटरा, सबलगढ़, चिन्नाौनी, देवगढ़, बागचीनी, जौरा थाना पुलिस ने कईयों बार राजस्थान से आई शराब पकड़ी, जिसमें से अधिकांश शराब बीहड़ों के रास्ते से शराब आ रही है। चंबल के बीहड़ों में नकली शराब बनाने की फैक्ट्रियां तक चल रही हैं। नूराबाद पुलिस ने 12 दिसंबर को नाऊपुरा गांव के बीहड़ों में सांक नदी किनारे जहरीले केमिकल व गुड़ से बनाई जा रही नकली शराब की फैक्ट्री पकड़ी। नूराबाद थाना प्रभारी शैलेन्द्र गोविल बताते हैं बीहड़ों में शराब फैक्ट्री को पकड़ने के लिए दो घंटे पैदल चलना पड़ा। यहां 6 ड्रमों में 1000 लीटर से ज्यादा कच्ची शराब जब्त की। नूराबाद ही नहीं बागचीनी और सिकरौदा में क्वारी नदी किनारे बीहड़ों में नकली शराब की फैक्ट्री पकड़ी जा चुकी है। पुलिस के अफसर ही मानते हैं कि ऐसी कई और अवैध शराब फैक्ट्री बीहड़ों में चल रही हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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