- पड़ावली की घटना, वन अफसर बोले 50 से 60 फायर किए, कोई दिख नहीं रहा था बस ताबड़तोड़ गोलियां बरस रहीं थीं।

Morenastone mafia fire on forest team: मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। अवैध पत्थर उत्खनन पर कार्रवाई करने पहुंची वन विभाग की टीम पर पत्थर माफिया ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। माफिया द्वारा रात के अंधेरे में चारों ओर से बरसाई गोलियों की आवाज सुनकर वनकर्मी पहले जमीन पर लेट गए, उसके बाद वहां से जान बचाकर उल्टे पांव भागे। गुरुवार की देर रात यह घटना रिठौरा थाना क्षेत्र के पड़ावली गांव में हुई है। वन विभाग की टीम रात में एफआइआर कराने थाने पहुंची, पुलिस ने मौका मुआयना की कहा, उसके बाद वनटीम लौटकर थाने नहीं गई।

दरअसल गुरुवार की देर रात डिप्टी रेंजर जितेन्द्र सिंह सोलंकी व वनपाल केशव शर्मा अपनी-अपनी टीम के साथ संयुक्त गश्त पर निकले थे। इस गश्ती टीम में 14 वनकर्मी थे। इसी दौरान सूचना मिली कि, पड़ावली गांव स्थित पुरातत्व विभाग के रेस्ट हाउस के सामने सरकारी जमीन से पत्थरों का अवैध उत्खनन होने की सूचना मिली। रात को सवा 10 बजे के करीब वन विभाग की टीम यहां पहुंची तो पुरातत्व विभाग के रेस्ट हाउस के सामने स्थित जमीन से पत्थरों का उत्खनन करने में दो जेसीबी लगी हुई थीं। डिप्टी रेंजर जितेन्द्र सोलंकी ने बताया कि जैसे ही वन विभाग की टीम ने पत्थरों का अवैध उत्खनन रुकवाकर, जेसीबी को कब्जे में लेने का प्रयास किया तो अंधेरे से पत्थर फेंकना शुरू हुआ, फिर फायरिंग शुरू हो गई। 25 मिनट में पत्थर माफिया ने 50 से 60 गोलियां चलाईं। इस दौरान वनकर्मी पत्थरों की खदान के गड्ढों व पत्थरों के पीछे लेट गए। जब फायरिंग बंद हुई तो वनकर्मी जान बचाकर वहां से भागे। जब गोलियां चल रही थीं तब डिप्टी रेंजर ने रिठौरा पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही वनकर्मी और पत्थर माफिया वहां से जा चुके थे। रिठौरा पुलिस का कहना है, कि वह शिकायत पर कार्रवाई करने तैयार हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई थाने ही नहीं आया।

डिप्टी रेंजर सोलंकी सस्पेंड हुए, तब कार्रवाई को निकले थे

पड़ावली गांव में हुई इस घटना से पहले ही डीएफओ अमित निकम ने डिप्टी रेंजर जितेन्द्र सिंह सोलंकी को गुरुवार की दोपहर ही सस्पेंड कर दिया था। क्योंकि उनके कार्यक्षेत्र पड़ावली में भारी मात्रा में पत्थरों का अवैध उत्खनन हो रहा है। सस्पेंड होने के बाद डिप्टी रेंजर सोलंकी कार्रवाई करने को निकले थे। इसमें भी वन विभाग की टीम की खामी सामने आई है। देर रात को इस तरह कार्रवाई करने से पहले डिप्टी रेंजर ने न तो एसडीओ, न डीएफओ और नहीं पुलिस थाने को सूचना थी। डिप्टी रेेंजर सोलंकी को सस्पेंड करने के बाद उनका प्रभार वनपाल केशव शर्मा को दिया था। बताया गया है, कि ग्वालियर की लोकायुक्त टीम केशव शर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ चुकी है, फिर भी उसे डिप्टी रेेंजर का प्रभार मिलना, विभाग में चर्चा का विषय बन गया है।

वर्जन

- अंधेरे में चारों ओर से गोलियां बरस रही थीं। सभी हवाई फायर हो रहे थे। हम जमीन पर लेट गए और फायरिंग बंद हुई तब वहां से आ गए। इस दौरान 50 से 60 गोलियां से चली होंगी। हम थाने गए तो रात में ही थाना प्रभारी ने मौका मुआइना कराने को कहा। डर की वजह से वहां गए नहीं। अब वरिष्ठ अफसर जैसा निर्देश देंगे, वैसा करेंगे।

जितेन्द्र सिंह सोलंकी,डिप्टी रेंजर

- पड़ावली क्षेत्र में हुई घटना की जानकारी मैं रात में ही एसपी साहब को दे चुका हूं। थाने में सूचना दी पर जब तक पुलिस पहुंची तब तक यह लोग निकल आए थे। कार्रवाई करने से पहले टीम को पुलिस थाने को सूचना देनी थी, उन्होंने वरिष्ठ अफसरों को भी पहले कुछ नहीं बताया।

अमित निकम,डीएफओ, मुरैना

- हमें वन विभाग के कर्मचारियाें का फोन आया तो रात में ही मौके पर पहुंच गए, लेकिन वहां कोई नहीं था। मैंने वापस फोन किया तो बताया कि वहां से निकल आए दोबारा आ रहे हैं। दो से ढाई घंटे वहां इंतजार किया पर वनटीम नहीं आई। बाद में बोला अब नहीं आ रहे, सुबह शिकायत करेंगे। ग्रामीणों से पूछा तो किसी ने फायरिंग जैसी कोई बात नहीं बताई।

संजय किरार, थाना प्रभारी, रिठौरा

Posted By: anil.tomar

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