पहाड़गढ़(नईदुनिया न्यूज)। जिले में चारा संकट खड़ा न हो, इसके लिए कलेक्टर ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी कर इसके परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब जिले से बाहर चारा ले जाने के लिए परमिशीन लेनी होगी। बिना परमिशन के चारा का परिवहन करते हुए पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। यहां बता दें कि नईदुनिया ने अपने 19 नवंबर के अंक में जिले से बाहर हो रहे चारा परिवहन व उसके ईंट भट्टों में उपयोग किए जाने की खबर का प्रमुखता से प्रकाशन किया था। जिसके बाद कलेक्टर ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए पशु पालन विभाग से चारा संकट की स्थित जानी। जिसके बाद इसके परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया।

उल्लेखनीय है कि जिले में चारे का बेजां तरीके से परिवहन किया जा रहा था। जिसमें सबसे ज्यादा परिवहन बाजरा की करब का किया जा रहा था। दरअसल यहां इस बाजरा की करब का उपयोग उत्तरप्रदेश व राजस्थान के ईंट भट्टों में ईंधन के रूप में उपयोग हो रहा था। बाहर से आने वाले लोग किसानों से महंगें दामों में इस पशु चारे को खरीद रहे थे। इसके बाद इसका उपयोग ईंधन के रूप में हो रहा था। जिसकी वजह से यहां पशु चारे के दाम आसमान पर पहुंच गए थे और आने वाले समय में पशु चारे का संकट खड़ा होने वाला था। आम तौर पर सर्दियों में पशु चारे का संकट आ जाता है। इसकी वजह है कि गेहूं का भूसा लगभग इस समय तक समाप्त होना शुरू हो जाता है। इस इस संकट को बाजरा की करब कम देती है। लोग इसको अपने पशुओं को खिलाते हैं। लेकिन यहां इस करब का परिवहन कर ईंधन के रूप में इस्तेमाल हो रहा था। जिसकी वजह से यह दाम आसमान पर पहुंच गए। इस संकट को देखते हुए नईदुनिया ने अपने 19 नवंबर के अंक में चारे संकट व इसके परिवहन पर प्रतिबंध लगने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद कलेक्टर ने पशु पालन विभाग से चारे के संबंध में पूरी स्थिति की रिपोर्ट मांगी। जिसके बाद पशु पालन विभाग ने भी चारा संकट होने व दाम बढ़ने की रिपोर्ट पेश की। जिसके बाद गुरूवार को कलेक्टर ने इस संबंध मे आदेश जारी कर जिले से बाहर पशु चारे के परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया।

कलेक्टर ने यह लिखा अपने आदेश में:

कलेक्टर ने पशु चारे के जिले से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लगाया है। आदेश में कलेक्टर ने पशु पालन विभाग की सर्वे रिपोर्ट को देखते हुए पशु चारे की उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। एवं जिले से बाहर चारा विक्रय या निर्यात होने से चारे की कीमतों में वृद्धि की संभावना को देखते हुए इसके परिवहन पर जिले से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस पशु चारे में पशु घास, भूसा, कडवी, बाजरा, ज्वार डंठल को जिले की सीमा से बाहर नहीं ले जा सकेंगें। यह प्रतिबंध 31 मार्च 2022 तक लगाया गया है। आदेश के मुताबिक अब किसान, व्यापारी, या निर्यातक किसी भी प्रकार का पशु चारा किसी भी वाहन से जिले की सीमा से बाहर नहीं ले जा सकेंगें। इसके लिए कलेक्टर की अनुज्ञा की आवश्यकता होगी।

पशु चारे के भाव पहुंचे आसमान परः

यहां लगातार पशु चारे की किल्लत होने से इसके दाम भी बढ़ रहे थे। आलम यह है कि यहां गेहूं का भूसा 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जबकि इसकी कीमत आमतौर पर 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहती है। इसके अलावा सबसे ज्यादा दाम बाजरा की करब पर बढ़े है। यहां एक ट्रॉली की कीमत 1500 तक पहुंच चुकी है। जबकि आमतौर पर एक ट्रॉली की कीमत 3000 से 4000 रुपये के बीच रहती है। दाम बढ़ने के पीछे की बड़ी वजह यहां चारे का जिले से बाहर निर्यात कियाा जाना था।

Posted By: Nai Dunia News Network

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