हरिओम गौड़, मुरैना नईदुनिया, MP By Elections। मध्य प्रदेश की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के अलावा कोई तीसरा दल ऐसा नहीं जो सत्ता में दखल रख पाया हो या चुनावों को प्रभावित कर पाया हो। मुरैना जिला ऐसा है जहां, हर चुनाव में भाजपा-कांग्रेस की तरह बसपा भी दमदार उपस्थिति दर्ज कराती रही है। बसपा का कद यहां ऐसा है कि हाथी के महावत बनकर कई नेता कांग्रेस-भाजपा की राजनीति के महारथी बन गए। यहां हाथी ने कई राजनीतिक पंडितों की भविष्यवाणियों को फेल कर भाजपा-कांग्रेस को रौंदा है।

बसपा के हाथी ने मुरैना से भोपाल तक जिन नेताओं को पहुंचाया उनमें सबसे पहला नाम कैबिनेट मंत्री ऐंदल सिंह कंषाना का है।

ऐंदल सिंह ने पहला चुनाव 1993 में बसपा से लड़ा था। 1998 में भी बसपा से विधायक रहे। इसके बाद कांग्रेस में चले गए और सरकार में राज्य मंत्री बन गए। कांग्रेस के टिकट पर 2008 और फिर 2018 में विधायक रहे हैं। अब उपचुनाव में भाजपा से ताल ठोक रहे हैं। केवल सुमावली ही नहीं, जिले की अन्य पांच विधानसभा सीटों मुरैना, दिमनी, अंबाह, सबलगढ़ और जौरा से भी बसपा प्रत्याशी चुनाव जीत चुके हैं।

कहां से कौन जीतकर किस पार्टी में पहुंचा

जौरा विस सीट : पूरे जिले की ऐसी विस सीट जहां भाजपा से ज्यादा बसपा का दबदबा रहा है। यहां अब तक तीन बार बसपा चुनाव जीत चुकी है। 1993 और 1998 में बसपा के टिकट पर सोनेराम कुशवाह फिर 2008 में मनीराम धाकड़ विधायक बने। अब फिर सोनेराम कुशवाह उपचुनाव में बसपा से प्रत्याशी हैं।

मुरैना विस सीट : परशुराम मुदगल 2008 में बसपा के टिकट पर मुरैना विधानसभा सीट से जीते। 2013 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी बनाती उससे पहले ही श्री मुदगल हाथी से उतर भाजपा में शामिल हो गए।

अंबाह विस सीट : सत्यप्रकाश सखवार बसपा के टिकट पर 2013 में अंबाह से विधायक बने। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। 2018 का चुनाव हार गए। अब उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी हैं।

दिमनी विस सीट : यहां से 2013 के विस चुनाव में बसपा के टिकट पर बलवीर सिंह डण्डोतिया विधायक बने। 2018 में बलवीर मुरैना से बसपा प्रत्याशी बने और हार गए।

सबलगढ़ विस सीट : यहां स्व. बूंदीलाल रावत 1998 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीते। इसके बाद वह 2003 में कांग्रेस से लड़े और हार गए।

उपचुनाव में मुरैना, जौरा में चिंघाढ़ रहा हाथी

उपचुनाव में बसपा ने जिले की सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। मुरैना व जौरा में बसपा का हाथी जोरों से चिंघाढ़ रहा है। मुरैना में भाजपा-कांग्रेस ने गुर्जर समाज से प्रत्याशी चुने हैं, ऐसे में बसपा प्रत्याशी रामप्रकाश राजौरिया दूसरी जातियों के वोटों में सेंधमारी के प्रयास में जुटे हैं। जौरा में दो बार के विधायक रहे सोनेराम कुशवाह भी मैदान में हैं। सुमावली व दिमनी में बसपा मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है।

Posted By: Prashant Pandey

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