MP News: मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्रेमनगर कालोनी निवासी दयाराम मौर्य के घर का बिजली मीटर बीते एक साल से खराब है। हर महीने मीटर रीडिंग लेने वाला कर्मचारी आता है जो कभी घर के दरवाजे तो कभी खिड़की का फोटो खींचता है और उसके बाद कंप्यूटरीकृत मशीन से मौके पर ही (स्पाट बिलिंग) बिजली बिल जारी कर देता है। जब मीटर चालू था, तब दयाराम के घर का बिजली बिल सर्दियों में 400 से 450 रुपये आता था। लेकिन अब अनुमानित खपत की स्पाट बिलिंग में सर्दी के दिनों में भी 1100 रुपये से ज्यादा का बिल आ रहा है। यह समस्या केवल दयाराम की नहीं है, बल्कि जिलेभर के 70 हजार से ज्यादा उपभोक्ता हर महीने इस समस्या से जूझ रहे हैं।

मुरैना जिले में 2 लाख 83 हजार से ज्यादा बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 70 हजार उपभोक्ताओं के बिजली मीटर महीनों व सालों से बंद पड़े हैं। किसी का बिजली मीटर फाल्ट होकर बंद है तो किसी मीटर में आग लग गई है। नियमानुसार बिजली कंपनी को खराब बिजली मीटरों को बदलना चाहिए, लेकिन स्थिति यह है कि लगातार शिकायतों के बाद भी मीटर नहीं बदले जाते। सीएम हेल्पलाइन पर मनमाने बिजली बिल, मीटर बदलने और मीटर सही होने के बाद भी आकलित खपत के बिल देने जैसी 840 से ज्यादा शिकायतें हैं। राजस्व विभाग और पीडीएस राशन के बाद सीएम हेल्पलाइन पर सबसे ज्यादा शिकायतें बिजली बिलों से जुड़ी हैं। हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में भी कलेक्टर के पास बिजली बिलों की 10 से 15 शिकायतें पहुंच रही हैं। शिकायतें भी ऐसी हैं, कि सिंधी कालोनी निवासी प्रमोद अग्रवाल के घर का बिजली मीटर, घर के बाहर बिजली खंभे पर लगा है। लेकिन स्पाट बिलिंग वाला कर्मचारी घर के दरवाजे का फोटो खींचकर बिल जारी कर देता है, जो मीटर रीडिंग से लगभग दोगुनी खपत का होता है। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्पाट बिलिंग में पहले से ही उपभोक्ता का कनेक्शन नंबर व अनुमानित खपत लिख देते हैं, जिससे घर की दीवार या दरवाजे का फोटो खींचने पर भी बिल जारी हो जाता है।

मीटर चालू फिर भी आकलित खपत के बिल

पीपल वाली माता मंदिर के पास रहने वाले अशोक शर्मा के घर का बिजली मीटर बाहर दरवाजे के पास लगा है, जो चालू हालत में हैं, फिर भी उन्हें हर महीने 300 से 350 यूनिट आकलित खपत का बिल दिया जा रहा है, जबकि मीटर रीडिंग कभी 140 तो कभी 180 यूनिट की आ रही है। जीवाजीगंज निवासी रामबावू अग्रवाल, सिंधी कालोनी निवासी आर्यन अग्रवाल और पंसारी बाजार निवासी नूतन अग्रवाल ने बताया कि उन्हें पहले आकलित खपत के बिल दिए गए। जबरन इन बिलों की वसूली की गई, बिल जमा नहीं करने पर घर के बिजली कनेक्शन काटने के लिए नसेनी (सीढ़ी) लेकर कर्मचारी भेज दिए और बिल की राशि जमा करा ली। इसके बाद अगले महीने दो महीने तक मीटिर रीडिंग से सही बिल आए, लेकिन अब दिसंबर महीने का बिल फिर अनुमानित खपत का दे दिया है, जो मीटर रीडिंग की तुलना में 140 से 150 यूनिट तक ज्यादा का है।

मीटर रीडरों को रिश्वत नहीं दी तो अनाप-शनाप राशि के बिल

उपभोक्ताओं के घर व दुकानों पर लगे बिजली मीटरों की रीडिंग लेने वाले मीटर रीडरों को लेकर कई शिकायतें होती रहती हैं। बीते एक साल में बिजली कंपनी 16 मीटर रीडरों को नौकरी से निकाल चुका है, इसके बाद भी मीटर रीडरों की मनमानी की शिकायतें बंद नहीं हो रहीं। नाला नंबर दो पर चित्रकूट मिष्ठान भंडार के संचालक विष्णु अग्रवाल की शिकायत है, कि उनकी दुकान का मीटर, दुकान के बाहर लगा है। मीटर रीडिंग लेने आए कर्मचारी को 500 रुपये नहीं दिए तो रीडिंग से ज्यादा खपत का बिलबुक में दर्ज करदी, जिससे तीन हजार का बिल साढ़े छह हजार रुपये का आया है। दत्तपुरा कंषाना गली निवासी अनिल मित्तल ने शिकायत की है, कि मीटर रीडिंग को रिश्वत नहीं दी तो मीटर चालू होने पर भी आकलित खपत के बिल जारी किए जा रहे हैं।

कोई मीटर रीडर यदि बिल कम करवाने या मीटर रीडिंग का बिल देने के नाम पर पैसा मांगता है तो उसकी शिकायत उपभोक्ता हमसे करे, हम तत्काल कार्रवाई करेंगे। स्पाट बिलिंग में ऐसी कोई खामी है कि दीवार, दरवाजे का फोटो खींचकर भी बिल जारी हो जाता है, तो इसकी समीक्षा करके इसमें सुधार करवाएंगे। रही बात आकलित खपत की तो शिकायत आने पर हम बिल की राशि में सुधार भी करवाते हैं, जो मीटर खराब हैं उन्हें बदलने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। - पीके शर्मा, महाप्रबंधक, बिजली कंपनी मुरैना

इस गड़बड़ी की सही कड़ी मीटर रीडर है। एक मीटर रीडर पर तीन से चार हजार मीटरों की रीडिंग का लोड है, उन्हे रीडिंग के लिए तीन से चार दिन का समय दिया जाता है, इसलिए मीटर रीडर जल्दबाजी में अनुमानित खपत के बिल दे रहे हैं। जिन लोगों से मीटर रीडर पैसे ले रहे हैं, उनकी रीडिंग कम कर दी जाती है, जो हर महीने बिल जमा करते हैं उन पर चोरी हुई बिजली का भार डाला जाता है। हाईकोर्ट का आदेश है कि उपभोक्ताओं को अनुमानित खपत के बिल तो दे ही नहीं सकते, फिर भी हजारों उपभोक्ताओं को ऐसे ही बिल दिए जा रहे हैं।- आशीष मित्तल, प्रभारी, लीगल एड क्लीनिक

Posted By: Nai Dunia News Network

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