फोटो 21ए। भागवत कथा कहते आचार्य

मुरैना। जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति होती है। यदि कमी रहती है तो मात्र संकल्प की। संकल्प दृढ़ एवं कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूरा करते हैं। यह बात अर्रोदा गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा में पातीराम महाराज ने कही।मंगलवार को कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़़ रही।

पातीराम महाराज ने श्रद्धालुओं को रुक्मिणी विवाह का प्रसंग बताया। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी के भाई रुक्मि ने रुक्मिणी जी का विवाह शिशुपाल के साथ निश्चित किया था। लेकिन रुक्मिणी ने संकल्प लिया था कि शिशुपाल को नहीं गोपाल को पति के रूप में वरण करेंगी। शिशुपाल असत्य मार्गी है और द्वारिकाधीश भगवान श्रीकृष्ण सत्यमार्गी। इसलिए असत्य को नहीं सत्य को अपनाऊंगी। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी के सत्य संकल्प को पूरा किया और उन्हें अपनी पत्नि के रूप में वरण करके प्रधान पटरानी का स्थान दिया। पातीराम महाराज ने कथा के दौरान बताया कि भागवत कथा ऐसा शास्त्र है जिसके प्रत्येक पद में रस की वर्षा होती है।

श्री शतचंडी महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ,मे जन कल्याण की भावना के साथ प्रतिदिन होता हैं महायज्ञ 14 फरवरी को नगर की समस्त कन्याओं का होगा कथा स्थल पर पूजन। घर घर जाकर दे रहे आमंत्रण।

अंबे मां आश्रम अंबाह में चल रहा सतचंडी यज्ञ व भागवत कथाः कोल्ड वाली श्री अंबे मां आश्रम पर इन दिनों पांच कुंडी शतचंडी महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। यज्ञ को बनारस के मनीष शास्त्री करा रहे है। पंडित मनीष शास्त्री ने कहा कि यज्ञ में सर्वव्यापी परमात्मा का वास होता है। तथा सब देवताओं की आत्मा यज्ञ में निवास करती है। अत? जीव की सब बाधाओं को दूर करने हेतु भगवान का आव्हान यज्ञ द्वारा किया जाता है। प्रार्थना और विश्वास में इतनी ताकत होती है कि नामुमकिन को आसान बना देती है। भागवत कथा में व्यास नंदकिशोर स्वामी ने कहा कि जीव को अच्छे और बुरे कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है। अत? भगवान की कथा सुनने से जीव के दुख व पाप नष्ट हो जाते हैं। अतः भागवत कथा कलयुग में सभी जीवो का उद्धार करने में सक्षम है।