शिवप्रताप सिंह जादौन, मुरैना। चंबल नदी की पहचान माने जाने वाले घड़ियालों की संख्या अब देश की अन्य साफ पानी की नदियों में बढ़ाने की तैयारी है। कई नदियों का पारिस्थितिकी तंत्र घड़ियालों के अनुकूल है। इनमें घड़ियालों का कुनबा विकसित करने के लिए केंद्र सरकार की मध्यस्थता में चंबल अभयारण्य के पास लगातार घड़ियालों की मांग आ रही है।

हालांकि केंद्र सरकार के निर्देश पर देश की कई नदियों में कुछ घड़ियालों को भेजा भी गया है लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ाने और अन्य नदियों में इन्हें भेजने की तैयारी है। यही वजह है कि चंबल अभयारण्य प्रबंधन ने ईको सेंटर पर हर साल लाए जाने वाले घड़ियालों के अंडों की संख्या में इजाफा किया है ताकि इनसे निकलने वाले घड़ियालों को देश की विभिन्ना नदियों में बसाया जा सके।

चंबल नदी के किनारों से हर साल घड़ियालों के 200 अंडे देवरी स्थित घड़ियाल ईको सेंटर पर हैचिंग के लिए लाए जाते रहे हैं। यहां अंडों को प्राकृतिक वातावरण में रखा जाता है ताकि अधिकतम अंडों में घड़ियाल विकसित हों। इस साल मई में वन विभाग ने 260 अंडे ईको सेंटर पर लाने की अनुमति दी थी। इनमें से 254 घड़ियाल विकसित होकर बाहर भी निकल चुके हैं। ये घड़ियाल यहां तीन साल तक पाले जाएंगे और फिर नदियों में छोड़े जाने के लिए तैयार हो जाएंगे। गौरतलब है कि घड़ियाल की मौजूदगी नदी के पानी के साफ होने का प्रमाण होती है।

केन और सोन नदी में 10 साल पहले भेजे गए थे घड़ियाल

छतरपुर जिले की केन नदी और सीधी जिले की सोन नदी में 10 साल पहले चंबल के घड़ियाल ले जाए गए थे। इसके बाद एक बार फिर जनवरी 2019 में सोन नदी में चंबल नदी से 27 घड़ियाल ले जाए गए। इन दोनों नदियों में जो घड़ियाल हैं वे चंबल नदी की ही देन हैं। वन विभाग पूरी कोशिश कर रहा है कि यहां घड़ियाल वंशवृद्धि करें।

पंजाब से 50 घड़ियालों की मांग

सोन और केन नदी के अलावा पंजाब की साफ पानी की नदियों में घड़ियाल बसाने का प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की निगरानी में शुरू किया गया है। इसके तहत यहां की व्यास और सतलुज नदियों के लिए वन विभाग से 50 घड़ियाल मांगे गए हैं। इसके लिए चीफ कंजरवेटर ऑफ फारेस्ट (सीसीएफ) ग्वालियर ने हाल ही में अनुमति भी जारी की है।

यहां बसाए जा चुके हैं घड़ियाल

-10 वर्ष पहले केन नदी में दो चरणों में 25-25 घड़ियाल भेजे गए थे

-नवंबर 2017 में पंजाब की ब्यास नदी में 25 घड़ियाल भेजे गए थे

-मार्च 2018 में पंजाब की सतलज नदी में 25 घड़ियाल भेजे गए थे

-जनवरी 2019 में 27 घड़ियाल मध्य प्रदेश की सोन नदी में भेजे गए थे

-वन विहार भोपाल, इंदौर, चंडीगढ़ और ग्वालियर के चिड़ियाघर में घड़ियाल भेजे जाते रहे हैं।

इनका कहना है

चंबल के अलावा साफ पानी की दूसरी कई नदियों में घड़ियालों के जीवित रहने लायक परिस्थितियां मिली हैं। केंद्र सरकार के निर्देशन में हमारे यहां से इन नदियों में घड़ियाल भेजे जा रहे हैं। पंजाब से फिर 50 घड़ियालों की मांग आई है, इसे माना जा चुका है। यही वजह है कि हमें इस साल घड़ियालों की अंडों की संख्या 200 से बढ़ाकर 260 करना पड़ी।

एचएस मोहंता, मुख्य वन संरक्षक ग्वालियर