मुरैना (ब्यूरो)। अंबाह में मां कैलादेवी डेयरी के गोदामों में रखे सिंथेटिक दूध बनाने की सामग्री की काउंटिंग करने में ही करीब पांच घंटे लग गए। गोदामों में माल इस कदर भरा हुआ था कि टीम के सदस्यों को सामग्री को गिनने में खासा समय लगाना पड़ा।

आमतौर पर किसी भी डेयरी पर सैंपलिंग की कार्रवाई करने में टीम को आधा से पौन घंटा लगता है, लेकिन कैलादेवी डेयरी पर कार्रवाई में टीम को तकरीबन 5 घंटे का समय लगा। डेयरी के साथ चिलर सेंटर भी चलाया जाता था। कार्रवाई के दौरान डेयरी और चिलर संचालक साधू राठौर व राजकुमार राठौर सहित अन्य स्टाफ गायब हो गया। इसलिए टीम को डेयरी के गोदामों के ताले तुड़वाने पड़े।

उल्लेखनीय है कि एसटीएफ व खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार को वनखंडेश्वर डेयरी पर कार्रवाई की थी, लेकिन सिंथेटिक दूध बनाने का इतना जखीरा नहीं मिला था। वहीं बुधवार को जब प्रशासन व खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कैलादेवी डेयरी व चिलर सेंटर पर कार्रवाई की तो सिंथेटिक दूध बनाने का बड़ा जखीरा मिला। यह कार्रवाई एफएसओ अवनीश गुप्ता व अनिल परिहार व राजस्व अमले की टीम ने की।

टीम को देखते ही गायब हो गए सभी लोग, गोदामों का तोड़ना पड़ा ताला

जैसे ही राजस्व व खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मां कैलादेवी डेयरी व चिलर सेंटर पर पहुंची तो संचालक साधू राठौर व राजकुमार राठौर सहित अधिकतर जिम्मेदार लोग गायब हो गए। बस एक से दो कर्मचारी ही बचे। इसके बाद टीम ने पहले डेयरी से दूध के सैंपल लिए, लेकिन सूचना बड़े जखीरे की थी। इसलिए पास के डेयरी के गोदामों को खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन डेयरी संचालकों के गायब होने से चाभी नहीं मिली। इसलिए टीम को डेयरी के दोनों गोदामों का ताला तुड़वाना पड़ा।

20 हजार लीटर दूध रोजाना बनने का अनुमान

मां कैलादेवी डेयरी व चिलर सेंटर के दोनों गोदामों में 14 सौ टिन वनस्पति तेल, 17 बोरी कास्टिक सोडा, 27 केन हाइड्रोजन पराक्साइड, 7 इलेक्ट्रिक रई, एसएमपी व माल्टोस पाउडर की 550 बोरी, अज्ञात केमिकल 8 ड्रम, आरएम केमिकल 10 ड्रम, घरेलू सिलेंडर 13, हाइपो 16 बोरी, ग्लूकोज 600 बोरी मिला। इतनी सामग्री को देखने के बाद एफएसओ अवनीश गुप्ता ने बताया कि इस डेयरी पर रोजाना तकरीबन 20 हजार लीटर सिंथेटिक दूध का निर्माण होता होगा और सप्लाई किया जाता होगा।

सामग्री सप्लाई करने की भी आशंका

टीम का मानना है कि डेयरी पर जखीरे से सिंथेटिक व मिलावटी दूध तो तैयार किया जाता होगा। चूंकि डेयरी के साथ-साथ दूध का चिलर सेंटर भी है, इसलिए यहां पर ग्रामीण क्षेत्र से दूध बेचने वाले दूध बेचने आते होंगे। वे भी डेयरी से सिंथेटिक दूध बनाने के केमिकल व सामग्री यहां से खरीदकर ले जाते होंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्र से भी सिंथेटिक दूध बनकर चिलर सेंटर पर आता होगा।

2009 के बाद सबसे बड़ी कार्रवाई

2009 में रामसहाय शर्मा के यहां पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से इतनी बड़ी मात्रा में सिंथेटिक दूध बनाने की सामग्री प्रशासन ने पकड़ी थी। इसके बाद संभवत यह पहली कार्रवाई है जब सिंथेटिक दूध बनाने का इतना बड़ा जखीरा मिला है। हालांकि अभी तीन महीने पहले बड़े गांव से भी डेयरी से सिंथेटिक दूध व उसे बनाने की सामग्री जब्त की गई थी।

पोरसा में 3 चिलर सेंटर्स को किया सील

प्रशासन व खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पोरसा में भी कार्रवाई की। पोरसा में टीम ने सुबह 11 बजे से कार्रवाई शुरू की और तीन चिलर सेंटरों को सील कर दिया। हालांकि कार्रवाई के डर से पिछले पांच दिन से क्षेत्र के चिलर सेंटर व डेयरी बंद थे। टीम पोरसा नायब तहसीलदार राजकुमार नागोरिया, पोरसा पटवारी ने इन चिलर पर छापामार कार्रवाई की। टीम चिलर सेंटरों पर पहुंची तो उन्होंने दो दिन से कोई काम न होना बताया। इसलिए चिलर सेंटर्स से कोई सैंपल नहीं लिया। वहीं किसी भी चिलर संचालक के पास नगर पालिका द्वारा जारी लाइसेंस या फूड विभाग द्वारा लाइसेंस नहीं मिले। इसलिए टीम ने तीनों सेंटर्स को सील कर दिया।

मुरैना के तेल कारोबारियों में भी हड़कंप

टीम ने दूध के साथ सरसों के तेल में मिलावट के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है। बुधवार को शहर की तेल मिलों से सैंपल तीन टीमों ने लिए। ऐसे में तेल मिल संचालकों में भी हड़कंप है। क्योंकि उन्हें यह उम्मीद नहीं थी, क्योंकि कार्रवाई सिंथेटिक दूध बनाने वालों पर हो रही थी। वहीं प्रशासन ने तेल मिलों पर भी कार्रवाई शुरू करा दी।

जांच जारी है

अंबाह में कैलादेवी डेयरी व चिलर सेंटर पर कार्रवाई में सिंथेटिक दूध बनाने का सामान व केमिकल दो गोदामों में भरा हुआ था। सामान इस तरह से ठूंस-ठूंस के भरा गया था कि उसकी काउंटिंग करने में खासी परेशानी आई और चार-पांच घंटे का समय लगा। डेयरी साधू सिंह राठौर व राजकुमार राठौर की है। अभी गोदामों को सील कर दिया गया है। अभी इनकी और जांच की जाएगी - अवनीश गुप्ता, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, मुरैना