मुरैना। स्वास्थ्य विभाग में गलत तरीके से भर्ती की गईं 70 से अधिक आशा कार्यकर्ताओं को हटाने की तैयारी चल रही है। इससे पहले करीब दो दर्जन आशा कार्यकर्ताओं को पहले ही बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। हालांकि जिन अधिकारियों की देखरेख में ये भर्तियां हुई है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न होने के कारण विभाग पर भेदभाव के आरोप भी लग रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में कुल 2000 आशा कार्यकर्ता हैं। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति स्वास्थ्य विभाग के एनएचएम विभाग ने की थी। पिछले चार सालों में विभाग के अफसरों व कर्मचारियों ने साठगांठ कर ये नियुक्ति गलत तरीके से कर दी।

इसमें नियमों का पालन भी नहीं किया गया। मामला खुलने के बाद पहले चरण में दो दर्जन के करीब आशा कार्यकर्ताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके बाद फिर से करीब 70 आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति में गड़बड़ी होने की बात सामने आई। इन्हें बाहर करने की प्रक्रिया कलेक्टर के यहां से लंबित है।

इन नियमों का नहीं किया गया था पालन

- एक गांव में एक ही आशा कार्यकर्ता काम कर सकती है, लेकिन विभाग के अफसरों ने गांव व शहरी क्षेत्र में एक ही जगह पर दो आशा कार्यकर्ताओं की निुयक्ति कर दी।

-नियुक्ति के लिए संबंधित ग्राम पंचायत या नगरीय क्षेत्र के निकाय प्रस्ताव पारित कर संबंधित का नाम स्वास्थ्य विभाग को भेजते हैं, इस नियम का भी पालन नहीं किया गया।

अफसरों व कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं

नियुक्ति प्रक्रिया में एनएचएम विभाग के डीपीएम, नियुक्ति की प्रक्रिया करने वाला लिपिक व नियुक्ति को मंजूरी देने वाले सीएमएचओ शामिल हैं। नियमों को दरकिनार कर गलत नियुक्ति पर ये भी कार्रवाई की दायरे में आते हैं पर अफसरों को इस बार भी छोड़ने के प्रयास चल रहे हैंं।

यह काम होता है आशा का

आशा कार्यकर्ताओं का मुख्य रूप से काम ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में प्रसूता महिलाओं की देखरेख करना और उनका संस्थागत प्रसव कराना होता है। इसके लिए उन्हें मानदेय दिया जाता है। इसके अलावा उनके क्षेत्र में फैलने वाली बीमारियों व शासन के चल रहे कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की रिपोर्टिंग करना होता है।

- जिन आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति में गड़बड़ी पाई गई, उसकी जांच की गई है। जांच के बाद रिपोर्ट कलेक्टर के यहां है। कलेक्टर के निर्देश के बाद कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विनोद गुप्ता, सीएमएचओ, मुरैना