Road safety Campaign: मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। सड़कों पर जिस तरह वाहन, खासकर कारों की संख्या बढ़ती जा रही है, उसी के साथ ड्राइविंग सीखने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। इसलिए यह ड्राइविंग सिखाना एक व्यवसाय बन गया है, जिसके लिए परिवहन विभाग से लाइसेंस लेना होता है। मुरैना जिले में केवल दो लोगों ने ड्राइविंग सिखाने का पंजीयन करवाया है, लेकिन पांच लोग ऐसा काम कर रहे हैं। व्यस्त सड़कों पर ड्राइविंग सिखाने वाले यह वाहन कई बार हादसों का कारण भी बन चुके हैं।

ड्राइविंग सिखाने के लिए कहीं कोई खुला मैदान होना चाहिए या फिर ऐसी सड़क जिस पर यातायात बेहद कम हो। लेकिन मुरैना में ड्राइविंग सिखाने वाले लोग पुरानी कारों से शहर की सबसे व्यस्त एमएस रोड के अलावा वीआइपी बायपास व अंबाह बायपास रोड पर महिला-युवतियों को वाहन चलाना सिखा रहे हैं। अक्टूबर महीने के अंत में वीआइपी बायपास रोड, संजय कालोनी चौराहा पर ड्राइविंग सिखाने वाली एक वेगनआर कार ई-रिक्शा से भिड़ गई, जिसमें ई-रिक्शा चालक व एक महिला सवारी घायल हुई थी। इसी तरह दो महीने पहले अंबाह रोड पर ड्राइविंग सिखाने वाले वाहन को पहली बार चला रही एक 12वीं की छात्रा ने सड़क किनारे खड़े मवेशियों के झुंड में कार घुसा दी, जिससे दो गायों के पैर फ्रेक्चर हो गए। ड्राइविंग सिखाने वाले यह वाहन सात से 10 दिन में वाहन चलाना सिखा रहे हैं। हर दिन एक घंटे तक वाहन चलवाकर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। यानी सात से 10 घंटे में ही यह वाहन ड्राइवर तैयार कर देते हैं। इसके बदले में ढाई से तीन हजार रुपये की राशि वसूल रहे हैं। लेकिन ड्राइविंग सीखने या किस प्रकार के वाहन का प्रशिक्षण लिया है, इसका कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता। ड्राइविंग सिखाने वाली इन गाड़ियों की सीटों से उतरे नए-नवेले ड्राइवर यातायात नियमों को भी पूरी तरह नहीं जानते। केवल कार की क्लच, ब्रेक, एक्सीलेटर को आपरेट करने का ज्ञान दिया जाता है।

ट्रैफिक सिग्नल गायब, शहर में कहीं नहीं जेब्रा क्रासिंगः

यातायात पुलिस व नगर निगम ने करीब पांच साल पहले शहर में चार स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल लगवाए थे। इनमें बैरियर चौराहा, राधिका पैलेस चौराहा, ओवरब्रिज चौराहा, केएस मिल तिराहा शामिल हैं। यह ट्रैफिक सिग्नल आठ से 10 महीने तक तो काम करते रहे। इसके बाद बिजली कनेक्शन के अभाव में चार साल तक बंद रहे। लगभग सात महीने पहले नगर निगम ने इन ट्रैफिक सिग्नलों को मरम्मत के नाम पर खोला, उसके बाद यह सिग्नल वापस खंभों पर नहीं लगाए गए। तिराहा-चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल के पीले रंग के खंभे ही खड़े रह गए हैं। मुरैना शहर में बैरियर, न्यू हाउसिंग बोर्ड चौराहा, कोर्ट रोड चौराहा, पुलिस पेट्रोल पंप चौराहा, जिला अस्पताल के सामने आदि ऐसी एक दर्जन जगह हैं, जहां भारी संख्या में वाहन व पैदल राहगीर भी गुजरते हैं, लेकिन एक भी जगह जेब्रा क्रासिंग नजर नहीं आती।

वर्जन

- हमारे विभाग से दो लोगों ने ड्राइविंग सिखाने का पंजीयन करवाया है। इनके संचालन की पूरी गाइडलाइन होती है। जो अवैध चल रहे हैं उन पर हम जल्द कार्रवाई करेंगे।

अर्चना परिहार

आरटीओ, मुरैना

- शहर में ड्राइविंग सिखाने वाले कितने वाहन हैं, इस संबंध में कभी जानकारी नहीं ली, क्योंकि इनका पंजीयन परिवहन विभाग से होता है। हम ऐसे वाहनों की जांच करेंगे और इनके संचालक के जो भी नियम होंगे उनका पालन करवाया जाएगा। ऐसे अवैध वाहन चल रहे हैं, तो उन पर कार्रवाई भी करेंगे।

अखिल नागर

यातायात प्रभारी, मुरैना

Posted By: Nai Dunia News Network

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