- परिवहन विभाग सहित कई विभाग मासिक रिपोर्ट भी नहीं बनाते, जो रिपोर्ट यातायात पुलिस बनाती है उसी पर हत्ताक्षर कर भेज दी जाती है शासन को।

Road Safety Campaign: मुरैना। नईदुनिया प्रतिनिधि सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसों पर चिंता जताते हुए हर साल हो रहे हादसों में 10 फीसद की कमी लाने के आदेश मप्र सहित देशभर की सरकारों को दिए थे। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिला व संभाग स्तर पर सड़क सुरक्षा समितियों का गठन हुआ। इनकी बैठकें कब-कब होनी हैं? इसके दिशा निर्देश भी पुलिस हेडक्वार्टर से स्पष्ट जारी हैं। इसके बाद भी मुरैना जिले में सड़क सुरक्षा समिति की कोई भी बैठक समय पर नहीं हो रही। यह बैठकें खानापूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं, क्योंकि कलेक्टर से लेकर अन्य विभाग सड़क हादसों को लेकर न तो चिंतित नजर आते हैं, नहीं इन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना बनाई जाती है।

सुप्रीम कोर्ट के आन रोड सेफ्टी कमीशन ने 'दुर्घटना विहीन सफर के लिए' नारे के साथ सड़क सुरक्षा समितियों को राहगीरों की जान-माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है। मुरैना जिले में इसकी हकीकत यह है, कि हर तीन महीने में होने वाली जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक जिसके अध्यक्ष सांसद व केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर है, वह बैठक बीते एक साल में सिर्फ एक बार 25 सितंबर को हुई है। इससे भी बदहाल हालत कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला सड़क सुरक्षा समिति की हैं, जिसे महीने में दो बैठकें करनी हैं। एक बैठक वर्चुअल व दूसरी सभी विभागों के अफसरों को आमने-सामने बैठाकर होनी है। पूर्व कलेक्टर बी कार्तिकेयन ने अपने 22 महीने के कार्यकाल में दो से ढाई महीने में एक बार वर्चुअली बैठक करते थे। चार से छह महीने में एक बार सभी अफसरों के साथ बैठक करते थे।

यह काम है सड़क सुरक्षा समितियों का

सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों का मुख्य काम सड़क हादसों को रोकने का है, लेकिन यह समितियां यातायात व्यवस्था को लेकर सीमिति नजर आती हैं। नियमानुसार, इन समितियों को हर महीने कहां गंभीर हादसे हुए हैं? ऐसे कितने स्थान हैं? जहां बार-बार हादसे हो रहे हैं? अधिकांश हादसे किस कारण हो रहे हैं? इन सबकी रिपोर्ट बनानी होती है, फिर अगले महीने ऐसे स्थानों पर कितने हादसे कम हुए? इसकी समीक्षा होती है। सड़कों की हालत, दिशा-निर्देश बताने वाले बोर्ड, संकेतक, स्पीडब्रेकर आदि का फैसला इन्हीं बैठकों में लिया जाता है, लेकिन मुरैना का आलम यह है कि आठ महीने पहले शहर की ट्रैफिक लाइटों को मरम्मत के लिए खुलवा तो दिया, लेकिन यह सिग्नल खुलने के बाद कहां चले गए? इसकी समीक्षा पलटकर नहीं की। बैठकों में सड़क हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। स्थिति ऐसी है, कि यातायात पुलिस जो मिनट्स (रिपोर्ट) तैयार करती है, उसे ही कलेक्टर से लेकर परिवहन विभाग के अफसर मंगवा लेते हैं और हस्ताक्षर कर अपने-अपने विभाग की तरफ से पीएचक्यू, सड़क परिवहन मंत्रालय को भेज दिया जाता है। मीटिंगों की पूरी रिपोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी कमेटी व सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड करनी होती है, लेकिन कलेक्टर-एसपी कार्यालय के पोर्टल तक पर सड़क सुरक्षा समिति की बैठक का लेखा-जोखा आज तक किसी ने नहीं देखा।

- सड़क सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय है, इसे लेकर प्रशासन गंभीर है। सड़क सुरक्षा समितियों की बैठक समय पर होंगी और उनमें चिन्हित विषयों पर बिंदुवार काम हो, सतत मानीटरिंग हो ऐसी व्यवस्था की जाएगी। मैं जल्द ही समिति की बैठक बुलाऊंगा।

अंकित अस्थाना

कलेक्टर, मुरैना

Posted By: Nai Dunia News Network

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