Road Safety Campaign: मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। मुरैना जिले में हाइवे व अन्य व्यस्त सड़कों पर सफर करना लगातार खतरनाक होता जा रहा है। कारण यह है कि हाइवे व अन्य सड़कों पर सड़क सुरक्षा के मानकों पर ही काम नहीं होता। जिन जगहों पर लगातार हादसे हो रहे हैं, वह ब्लैक पाइंट तक में नहीं हैं। लोगों ने अपनी सहूलियत के लिए कहीं से भी डिवाइडर काट दिए हैं, जिनसे निकलने के दौरान हाइवे पर आ रहे तेज रफ्तार वाहनों के कारण कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं।

नईदुनिया संवाददाता ने मुरैना जिले में पांच दिन तक 300 किलोमीटर का सफर कर हाइवे अन्य मुख्य सड़कों की हालत देखी और लगातार हो रहे हादसों के कारण समझने का प्रयास किया। यातायात पुलिस के रिकार्ड में जिलेभर की सड़कों पर 12 ब्लैक पाइंट हैं। इनमें सात ब्लैक पाइंट नेशनल हाइवे 44 पर है। नेशनल हाइवे 44 का करीब 60 किलोमीटर (चंबल नदी राजघाट से बानमोर निरावली तक) का हिस्सा मुरैना जिले में है, जिस पर 7 जगहों को ब्लैक पाइंट चिन्हित किया गया है। इसमें खामी यह है कि नूराबाद में 1-2 नवंबर की रात हाइवे पर जिस जगह डंपर व बोलेरो की टक्कर में एक ही गांव के पांच लोगों की जान गई, वह जगह ब्लैक पाइंट में शामिल नहीं, जबकि यहां पहले भी हादसे होते रहे है। ऐसे ही मुरैना शहर में हाइवे का अंबाह बायपास तिराहा है, जहां हर रोज हादसे होना आम बात है। कई बाइक सवार यहां हाइवे पर आने वाले वाहनों के नीचे आकर जान गवां चुके हैं, पर यह जगह भी ब्लैक पाइंट में नहीं। उधर जिले से गुजरे नेशनल हाइवे 552 की हालत भी ऐसी है, जिस पर यातायात पुलिस के रिकार्ड अनुसार पांच ब्लैक पाइंट नहीं है, लेकिन सबसे ज्यादा हादसे एमएस रोड पर सोलंकी पेट्रोल पंप से लेकर मुरैना गांव के बीच होते हैं। डेढ़ साल में यहां पांच लोगों की जान चली गई और तीन बार जाम लग चुका है, पर यह जगह भी ब्लैक पाइंट में नहीं। यह तो उदाहरण हैं, इसी तरह खाण्डोली तिराहा, आरटीओ चेकपोस्ट, एसपी आफिस के सामने ऐसे स्थान हैं जहां आए दिन हादसे होते हैं, पर ब्लैक पाइंट नहीं। इतना ही नहीं यहां न तो कोई संकेतक हैं, नहीं पैदल रास्ता पार करने के लिए जेब्रा लाइन जैसी सुविधा। हाइवे किनारे व बीच में डली रहने वाली सफेद पट्टी भी धुंधली हो चुकी है।

इन कमियों के कारण भी हो रहे हादसेः

- मुरैना शहर में ही जलभराव के कारण जौरा रोड, बैरियर से धौलपुर की ओर जाने वाली रोड पर गड्ढे हो गए हैं। इन सड़कों पर 12 महीने पानी भरा रहता है, इस कारण कई हादसे हो चुके हैं। आमजन से लेकर कांग्रेस व बसपा के नेता नालों के पानी से भरे गड्ढों में बैठकर आंदोलन कर चुके, पर स्थिति में सुधार नहीं आया।

- नेशनल हाइवे 552 पर नगर निगम सीमा में जौरा रोड पर बैरियर से लेकर मुरैना गांव तक करीब 8 जगह बोटलनेक बन गया है। यहां हाइवे किनारे के फुटपाथों पर कहीं निर्माण हो गए हैं, कहीं दुकानें, पत्थर के फड़ व निर्माण सामग्री के ढेर हैं। मुरैना गांव से जौरा के बीच हाइवे किनारों पर बाजरा की करब के ढेर लगे हैं, जिनके कारण दोनों ओर के किनारे अतिक्रमण की चपेट में हैं।

- नेशनल हाइवे 552 टू-लेन हाइवे है, लेकिन सबलगढ़ से टेंटरा, श्योपुर जिले के श्यामपुर तक 40 किमी से ज्यादा लंबी यह हाइवे कहीं 12 तो कही 14 फीट चौड़ी सिंगल रोड है। इसके किनारे भी ऊंचे-नीचे हैं। पूरे अंचल में यह सिंगल रोड हाइवे है।

- हाइवे के डिवाइडरों को पैदल राहगीरों ने पिपरई गांव से लेकर बानमोर तक 60 से ज्यादा जगह तोड़ दिया है, इस कारण लोग कभी भी कहीं से निकलने के फेर में जानलेवा हादसे का शिकार हो चुके हैं। एसपी आफिस के पास लगे डिवाइडर को बीते दिनों जिला प्रशासन ने ही नेताओं के वाहनों की निकासी के लिए हटा दिया है, इससे यहां हादसों का डर बढ़ गया है।

- नेशनल हाइवे 44 पर चलने वाले वाहनों को टोल टैक्स चुकाना पड़ता है, फिर भी यह हाइवे कई जगह जर्जर हाल है। बैरियर के पास जलभराव के कारण एक से डेढ़ फीट के गड्ढे हैं, जिनमें नालों का पानी भरा रहता है। नेशनल हाइवे 552, बैरियर से लेकर मुरैना गांव तक जलभराव के कारण उखड़कर गड्ढों में तब्दील है। यहां सड़क से एक फीट ऊंचे नाले हैं, जो चोक है। नाले व घरों का पानी हाइवे पर जमा होता है, जिससे सड़क उधड़ चुकी है।

- नेशनल हाइवे 552 पर मुरैना से अंबाह के बीच दिमनी-बड़ेगावं के बीच क्वारी नदी पर बन रहा पुल अधूरा पड़ा है, यहां तीन हिस्सों में हाइवे भी करीब 350 मीटर तक अध्ूरा पड़ा है। हाइवे का निर्माण अधूरा है फिर भी जीगनी, मुड़ियाखेड़ा, पोरसा क्षेत्र में कई जगह अभी से गड्ढे हो गए हैं।

वर्जन

- जहां ज्यादा हादसे होते हैं वहां ब्लैक पाइंट चिन्हित है। इसके अलावा जहां हादसे बढ़ने लगे हैं उन जगहों को भी चिन्हित किया जाएगा। हाईवे पर कुछ जगहों पर संकेतक व ओरेंज लाइट नहीं थीं, जिनके बारे में एनएचआइ को पत्र लिखा था, कुछ जगहों पर संकेतक व लाइटें लग गई हैं। टूटे डिवाइडरों की रैलिंग की मरम्मत के लिए भी एनएचआइ को पत्र लिखेंगे।

अखिल नागर

यातायात प्रभारी, मुरैना

Posted By: Nai Dunia News Network

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