Road Safety Campaign: मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। मुरैना शहर को हाइवे व अन्य प्रमुख सड़कों से जोड़ने वाली राहे सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हालत में हैं। हाइवे से शहर में एंट्री देने वाली सड़कों पर कहीं भी कोई सिग्नल, बोर्ड या संकेतक नजर नहीं आते। सूरज ढलते ही यह अंधेरे में समा जाते हैं, सड़कें ऊबड़-खाबड़ हैं, नजीता आए दिन होने वाले हादसों के तौर पर सामने आते हैं।

आगरा-मुंबई नेशनल हाइवे 44 मुरैना शहर से होकर गुजरा है। जबकि नेशनल हाइवे 552 तो बीच शहर से होकर गुजरता है। इन दोनों हाइवे से शहर को जोड़ने वाली जो सड़कें हैं, उनके तिराहा-चौराहा हादसों के लिहाज से चिंताजनक हालत में हैं। मुरैना का बैरियर क्षेत्र, यह चौराहा नेशनल हाइवे 44 व नेशनल हाइवे 552 को क्रास करने के कारण बना है। यहां की हालत यह है, कि कहीं भी कोई ट्रैफिक सिग्नल नहीं, जबकि हर घंटे में यहां से हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। दिन में कई बार जाम लगता है। नेशनल हाइवे 552, एसपी आफिस के पास से होकर जीवाजीगंज चौराहा को जोड़ने वाले वीआइपी रोड बायपास की हालत यह है, कि यहां हाइवे के तिराहे पर सड़क खुदी पड़ी है। न तो उजाले के लिए हाईमास्ट है, न ही किसी तरह का सिग्नल, संकेतक या बोर्ड। हाइवे से अचानक वाहन मुड़ने और शहर की ओर से तेज रफ्तार में वाहन जाने से यहां कईं बार हादसे हो चुके हैं। ठीक ऐसी ही हालत नंदेपुरा-शिकारपुर बायपास, अंबाह रोड बायपास, नाला नंबर दो पर बनी बायपास की है। इन बायपास के तिराहा-चौराहा पर कहीं भी ट्रैफिक सिग्नल नहीं दिखेगा, न ही कोई संकेतक। पिछले सप्ताह नंदेपुरा चौराहा पर रेत से भरे एक ट्रैक्टर-ट्राली ने नंदेपुरा चौराहा पर एक राहगीर को कुचल दिया, जिसमें उसकी जान चली गई। ऐसे हादसे पहले भी कई बार अंबाह बायपास, वीआइपी रोड तिराहा पर हो चुके हैं।

हाइवे पर टोल की सिर्फ एक एंबुलेंस, थानों से हटा दी गईं:

नेशनल हाइवे 44 और 552 पर आए दिन हादसे होते हैं। इन हादसों में घायलों को अस्तताल तक पहुंचाने के लिए हाइवे पर टोल प्लाजा चलाने वाली कंपनी पाथवे की एक एंबुलेंस है, जो नूराबाद से मुरैना शहर के आसपास तक ही ज्यादा सेवाएं देती हैं। हाइवे किनारे चार थाने बानमोर, नूराबाद, सिविल लाइन व सरायछौला हैं। पहले इन थानों में एक-एक एंबुलेंस व डायल 100 वाहन थे जो घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने का काम करते थे, लेकिन अब थानों में एंबुलेंस व डायल 100 नजर नहीं आते, इस कारण घायल कई बार समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे। बात करें यात्री व वाहन सवारों की सुविधा की तो, हाइवे पर करीब 18 पेट्रोल पंप हैं, लेकिन इन पेट्रोल पंपों पर कहीं भी हवा का इंतजाम नहीं हैं, पेट्रोल पंपों पर पीने का पानी जरूर मिल जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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