हाइवे पर घायलों को नहीं मिलतीं एंबुलेंस, ट्रामा सेंटर कागजों में चालू

Road Safety Campain: मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। सड़कों पर वाहनों की संख्या जितनी बढ़ रही है, उतने ही सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। सड़क हादसों में घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पा रहीं। इतना ही नहीं, अस्पतालों में भी गंभीर घायलों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। क्योंकि घायलों के इलाज के लिए बने विशेष अस्पताल (ट्रामा सेंटर) कागजों में चल रहे हैं।

मुरैना जिले से दो नेशनल हाइवे गुजरे हैं। नेशनल हाइवे 44 चंबल नदी राजघाट से लेकर निरावली चौराहा तक करीब 60 किलोमीटर लंबा है। वहीं नेशनल हाइवे 552 सबलगढ़ तहसील के टेंटरा से लेकर पोरसा क्षेत्र तक लगभग 135 किलोमीटर लंबा है। इन दोनों हाइवे पर 12 ब्लैक पाइंट हैं, जहां सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। इन हादसों के आसपास कहीं भी एंबलुेंस की सुविधा नहीं होती। 135 किलोमीटर लंबे नेशनल हाइवे 552 पर कहीं एबुलेंस नहीं। जबकि नेशनल हाइवे 44 पर संचालति छौंदा टोल प्लाजा पर दो एंबुलेंस हैं, जिनमें से एक खराब है। बाकी की एक एंबुलेंस कभी कभार ही घटना स्थलों पर नजर आती है। अधिकांश हादसों के बाद पुलिस जब पहुंचती है, जब निजी वाहन या फिर पुलिस के वाहन से घायलों को अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में कई घायल समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते और घटनास्थल या रास्ते में दम तोड़ देते हैं। नेशनल हाईवे 552 व 44 पर कुल 9 थाने हैं, जिनमें से अधिकांश में पहले एंबुलेंस व डायल 100 के अलग-अलग वाहन थे। तब घायलों को समय पर मदद भी मिलती थीं, लेकिन करीब तीन साल से एंबुलेंस व डेढ़ साल से डायल 100 के वाहन भी कबाड़ होने के कारण बंद पड़े हैं।

ट्रामा सेंटर में पहले मेटरनिटी अब सामान्य वार्ड चल रहाः

जिला अस्पताल में 10 साल पहले ट्रामा सेंटर की अलग बिल्डिंग बनाई है। यह बिल्डिंग जिला अस्पताल के मुख्य गेट बाद सबसे पहले नंबर पर है, क्योंकि घायल को आसानी से इलाज के लिए ट्रामा सेंटर में लाया जा सके। ट्रामा सेंटर में गंभीर घायलों को उचित इलाज की आधुनिक सुविधाएं होती हैं, लेकिन मुरैना ट्रामा सेंटर में ऐसा कुछ नहीं है। यह सिर्फ सरकार व स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में ही ट्रामा सेंटर है। हकीकत में स्थिति यह है कि ट्रामा सेंटर के भवन के करीब 10 साल से मेटरनिटी वार्ड चलता रहा। चार महीने पहले मेटरनिटी वार्ड को अस्पताल के नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया, इसके बाद से ट्रामा सेंटर के भवन में मेडिकल व सर्जिकल वार्ड बना दिया गया है, जिसमें सामान्य बीमारियों के मरीज व घायलों को भर्ती किया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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