मुरैना। नईदुनिया प्रतिनिधि। चंबल में रेत माफिया पर नकेल कसने वालीं वन विभाग की एसडीओ श्रद्धा पांढरे के तबादले ने प्रशासनकि तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तबादले के पीछे जिले के अधिकांश नेताओं से लेकर अफसरों का हाथ माना जा रहा है। खुद एसडीओ पांढरे का कहना है कि कार्रवाई के दौरान पुलिस तो क्या उनके खुद के विभाग ने उनका साथ नहीं दिया। उनकी नाराजगी के गवाह आंकड़े भी हैं। 3 माह के कार्यकाल में उन्होंने 45 दिन के भीतर ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए रेत व पत्थर माफिया की बाइक से लेकर जेसीबी तक 85 से ज्यादा वाहन पकड़े। 65 से ज्यादा माफिया पर मुकदमे दर्ज किए। इस दौरान उन पर 12 बार जानलेवा हमले हुए। कार्रवाई के लिए वे थाने में भी बैठी रहीं पर मुकदमे की खानापूर्ति कर एक भी आरोपित को नहीं पकड़ा और उनका तबादला करवा दिया गया।

पुलिस, फोरेस्ट और एसएएफ पर भारी अकेली महिला अफसर की कार्रवाई

चंबल नदी के अवैध रेत के उत्खन को रोकने वन विभाग के अलावा एसएएफ की एक पूरी कंपनी सरकार ने तैनात की है। पुलिस व माइनिंग विभाग को कार्रवाई के अधिकार हैं। वन विभाग का रिकार्ड बताता है कि एसएएफ के 90 जवानों की पूरी कंपनी, वन विभाग और पुलिस के 24 थाने सालभर में अवैध रेत के 60 से 65 ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ते हैं। इनमें से 90 फीसद रेत के वाहन पुलिस पकड़ती है, लेकिन तीन माह के कार्यकाल में एसडीओ पांढरे ने अवैध रेत, पत्थर के ट्रैक्टर-ट्रॉली, ट्रक, रेत उत्खनन करती जेसीबी, माफिया की बाइक व स्कॉर्पियो सहित कुल 90 वाहन पकड़े हैं।

'शेरनी को टाइगर रिजर्व भेजा'

तबादले से रेत माफिया से लेकर पुलिस के कई अफसर व नेताओं के चेहरों की खुशी छिपाए नहीं छिप रही थी। तो दूसरी तरफ इंटरनेट मीडिया पर लोगों का आक्रोश सरकार के खिलाफ जमकर फूटा। लोगों ने अपनी भड़ास निकालते हुए जिले के अफसरों से लेकर सरकार तक को खूब कोसा और एसडीओ पांढरे के साथ खड़े दिखे। मुरैना के डॉ. रामकुमार सिकरवार ने फेसबुक कटाक्ष करते हुए लिखा है 'शेरनी को टाइगर रिजर्व भेजा'।

इनका कहना है

मैं तो राजघाट पर बहुत बड़ी कार्रवाई की योजना बना रही थी, उससे पहले तबादला हो गया। 11 साल की नौकरी में 4 बार तबादले हुए। हर बार कड़ी कार्रवाई के कारण ही तबादला हुआ। सरकार की गाइडलाइन तीन साल की है, लेकिन तीन महीने में ही तबादला कर दिया गया। इसे रुकवाने के लिए हाईकोर्ट जाना है या नहीं, इस पर विचार कर रही हूं। यहां मुझे अपने ही विभाग और पुलिस से उतना सहयोग नहीं मिला। हम पर हमले होते रहे पुलिस ने सही धाराएं नहीं लगाई, केवल 4 हमलों की ही एफआइआर हुई, उसमें से एक भी आरोपित आज तक नहीं पकड़ा।

श्रद्धा पांढरे, एसडीओ, वन विभाग

एसडीओ श्रद्धा पंद्रे का तबादला किसी दंडात्मक कार्रवाई के तहत नहीं किया गया है। उनकी कोई शिकायत भी नहीं थी। तबादला रुटीन प्रक्रिया के तहत हुआ है। उनके स्थान पर जिसे भेजा गया है, वह भी अपने कार्य के प्रति जवाबदेह अधिकारी हैं।

विजय शाह, मंत्री, वन

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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