फोटो, 45ए-प्रवचन में सुनने पहुंचे पंजाबी समाज के लोग

जौरा। शबरी वर्षों तक रामजी का इंतजार करती रही क्योंकि उनके गुरु मतंग ऋषि ने उन्हें बताया था कि उनके गृह में राम स्वयं आएंगे। गुरु के वचनों को शबरी ने शिरोधार्य किया और राम जी के दर्शन प्राप्त हुए। इसलिए हमें जीवन में प्रेम करने के लिए शबरी व केवट से सीखना चाहिए। यह प्रवचन शनिवार की देर रात सत जिंदा कल्याणा आश्रम के संत खुशहाल दास ने पंजाबी परिषद के सदस्यों को अग्रसेन मंदिर के हाल में दिए।

पंजाबी परिषद द्वारा शनिवार की देर रात बनिया पाड़ा स्थित महाराजा अग्रसेन मंदिर में समाज का प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सत जिंदा कल्याणा आश्रम हरियाणा कलानौर के संत खुशहाल दास को आमंत्रित किया गया था। प्रवचन कार्यक्रम में संत खुशहाल दास ने प्रवचन के माध्यम से भक्ति का मार्ग दिखाते हुए अनुयायियों से कहा कि जो नूर मुझ में है वही और में है हम सबके शरीर पांच तत्वों से बने हैं प्रकृति भी पंच तत्व से बनी है फिर हम किस से लड़े जब कि सब एक नूर से उपजा है। हर जीव में एक ही नूर है फिर हम भेदभाव क्यों करते हैं। उन्होंने कहा कि केवट का प्रेम भी अनंत था। केवट ने कहा कि राम जी आप पत्थर की शिला को नारी बना देते हैं कही मेरी नाव भी नारी बन गई तो पहले एक परिवार संभालना मुश्किल है में दूसरी नारी को कैसे संभाल लूंगा। लेकिन इतनी छोटी जाति का होते हुए भी केवट का राम जी के चरणों में बहुत प्रेम था। इसी प्रेम के बल पर उन्होंने भगवान को पा लिया। संत खुशहाल दास द्वारा प्रवचन कार्यक्रम में भजनों के माध्यम से भक्ति करने का मार्ग अनुयायियों को दिखाया गया। इस दौरान मौजूद पंजाबी परिषद के सदस्यों ने संत खुशहाल दास जी का पुष्पों के स्वागत कर परिवार की मंगल कामना के लिए आशीर्वाद किया। इसके साथ ही पुनः आगमन का अनुरोध किया गया। इस अवसर पर पंजाबी परिषद के अध्यक्ष मदन मिड्डा, जगमोहन मिड्डा, अमरलाल मदान, खेमचंद्र बत्रा, सुरेन्द्र खुराना, रमेश सेतिया, दर्शन ठकराल, हरीश मदान, संजय खुराना, डम्पा छावडा सहित बड़ी संख्या में पंजाबी समाज के महिला पुरुष बच्चे मौजूद रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network