मुरैना, नईदुनिया प्रतिनिधि। 67 करोड़ रुपये में बिक चुके मुरैना शहर के पुराने बस स्टैण्ड की जमीन पर बनी दुकानों की तोड़फोड़ शुरू हो गई है। शुक्रवार की देर शाम 4 दुकानों को तोड़ा गया और शनिवार की सुबह मुरैना शहर के नामचीन शुक्ला होटल (भोजनालय) को ढहा दिया गया। मप्र सड़क परिवहन निगम, पुलिस, राजस्व की टीम नगर निगम की तीन जेसीबी लेकर पहुंचीं। इस दौरान होटल के मालिक ने बिना नोटिस के हुई इस कार्रवाई का जमकर विरोध किया, पर काम नहीं आया। दो घंटे तक चली कार्रवाई में होटल की दो मंजिला बिल्डिंग को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया।

गौरतलब है, कि मुरैना शहर के बीचोंबीच स्थित पुराने बस स्टैंड की जमीन मप्र राज्य परिवहन निगम की संपत्ति है, जिसमें से 90 हजार क्वायर फीट जमीन को 67 करोड़ रुपये में दिसंबर महीने में बेच दिया गया है। इस राशि से परिवहन निगम के रिटायर कर्मचारियों को बकाया वेतन, पेंशन व अन्य मदों का भुगतान किया जाएगा। पुराने बस स्टैण्ड की जमीन को जिन लोगों ने खरीदा हैं, उन्हें जमीन खाली करके देनी है। इसीलिए शुक्रवार की देर शाम 4 दुकानें तोड़ी गईं। शनिवार की सुबह से शुक्ला होटल पर कार्रवाई के लिए जेसीबी लेकर अफसर व पुलिस बल पहुंच गया। होटल मालिक आधे से ज्यादा सामान नहीं निकाल पाया, इससे पहले ही तोड़फोड़ शुरू हो गई और कई सामग्री मलबे में दब गईं। तोड़फोड़ की कार्रवाई इतने आनन-फानन में हुई कि होटल के अंदर लगीं देवी-देवताओं की तस्वीरों को भी इस तरह खींचकर निकाला कि कई तस्वीर टूट गईं। इस पर होटल के मालिक ने विरोध भी किया और कोर्ट जाने की चेतावनी दी। बिना नोटिस के तोड़फोड़ पर होटल मालिक के वकील ने सीएसपी अतुल सिंह, तहसीलदार अजय शर्मा व परिवहन निगम के अफसरों को कोर्ट में पार्टी बनाने की चेतावनी दी, यह सुनकर सीएसपी अतुल सिंह यह कहते हुए चले गए कि बिना नोटिस के इतनी बड़ी कार्रवाई की है तो परिवहन निगम के अफसरों की गलती है, वह भुगतेंगे। सीएसपी के जाने के बाद कार्रवाई और तेज हो गई और कुछ ही देर में होटल मलबे को ढेर बन गया। गौरतलब है कि मुरैना से पहले पोरसा कस्बे का बस स्टैण्ड भी 16 करोड़ रुपये में बेच दिया गया है।

13 दुकानदार ले आए स्टे, शुक्ला होटल के पट्टे की मियाद बीतीः बस स्टैण्ड की जो जमीन बिक चुकी है, उस पर 25 दुकानें बनी हैं। इनमें से कुछ दुकानदारों को जैसे ही जमीन के बिकने की जानकारी लगी तो हाईकोर्ट में गुहार लगा दी, कोर्ट ने 13 दुकानदारों को स्टे दे दिया है। हाईकोर्ट के स्टे के कारण इन 13 दुकानों को फिलहाल नहीं तोड़ा जाएगा। जिस शुक्ला होटल के भवन को जमींदोज किया गया है वह 26 साल पहले परिवहन निगम ने किराया पट्टे पर दी थी। यह पट्टा अप्रैल 2020 में खत्म हो चुका है। होटल के मालिक ने पट्टे की अवधि बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है, जिस पर सोमवार को सुनवाई होनी थी। यह जानकारी जैसे ही परिवहन निगम के अफसरों को लगी तो उन्हें 13 दुकानदारों की तहत शुक्ला होटल के संचालक को भी कोर्ट से स्टे मिलने का अंदेशा हुआ, इसी कारण आनन-फानन में होटल को ढहा दिया गया है।

वर्जन-

सड़क परिवहन निगम से यह जमीन लीज पर ली है, इसे लेकर हाईकोर्ट में हमारा प्रकरण विचाराधीन है। कोर्ट में सोमवार की तारीख लगी है, जिस पर फैसला होना है। इस तरह भवन को तोड़ने का क्या मतलब है। हमें कोई नोटिस नहीं दिया गया, सामान खाली करने तक का समय नहीं दिया। यह मनमानी है, इसके खिलाफ मैं कोर्ट में जाऊंगा।

राजकुमार दुबे, संचालक, शुक्ला होटल

वर्जन-

शुक्ला होटल की लीज अप्रैल 2020 में खत्म हो चुकी है। उसके बाद विभाग ने इनकी लीज नहीं बढ़ाई। वह गलत कह रहे हैं, कि हमने कोई नोटिस या सूचना नहीं दी। विभाग के रिटायर कर्मचारियों के फण्ड भुगतान के लिए यह जमीन बिक चुकी है। शुक्ला होटल के मालिक को इसकी जानकारी है, उन्हें विधिवत नोटिस दिया है और हमारी टीम ने शुक्रवार की शाम जब 4 दुकानें तोड़ी थीं, तब ही इन्हें भवन खाली करने को कह दिया था।

अशोक सिंह तोमर, संभागीय प्रबंधक, सड़क परिवहन निगम

Posted By: Nai Dunia News Network

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