मुरैना से अनिल तोमर। मुरैना जिले में लोग बेदर्दी से पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाते रहे हैं। इसी वजह से पूरे जिले में पेड़ व पौधों की संख्या कम हो गई है लेकिन यहां ईश्वरा महादेव की तलहटी ऐसी है जहां खड़े पेड़ों पर धार्मिक मान्यता के चलते कुल्हाड़ी चलाना अपराध समझा जाता है। इसे ईश्वर के प्रकोप का डर कहना ही उचित होगा क्योंकि ईश्वरा महादेव के आसपास के जंगल में लकड़ी माफिया ने लगभग सारे पेड़ काट डाले हैं, ठूंठ ही बचे हैं लेकिन करीब दो किमी क्षेत्र में फैली ईश्वरा महादेव की तलहटी में बड़े- बड़े पेड़ खड़े हैं। जिला मुख्यालय से 80 किमी दूर पहाड़गढ़ के जंगलों में प्राचीन ईश्वरा महादेव का मंदिर है। मंदिर एक गुफा में है। मंदिर के नीचे तलहटी है।

रहती है अनिष्ट की आशंका : ईश्वरा महादेव की तलहटी को लेकर लोगों में मान्यता है कि यदि उन्होंने यहां के पेड़ काटे या कुल्हाड़ी ही पेड़ों से लगाई तो उनके पशु मर जाएंगे या फिर घर में अनिष्ट हो जाएगा। यह मान्यता पिछले कई सालों से है। इसलिए इस पेड़ों को काटने ग्रामीण व लकड़ी माफिया इस तलहटी में नहीं जाते। ईश्वरा महादेव के पास खिरकाई में रहने वाले रामखिलाड़ी का कहना है कि उनके पूर्वजों ने बताया था कि तलहटी में पेड़ काटने से घर में अनिष्ट हो जाता है।

सात से लेकर 11 पत्तियों वाले बेलपत्र के पेड़ भी हैं : तलहटी में धौ, नीम, खैर सहित कई प्रजातियों के पेड़ हैं। यहां पर सात से लेकर 11 पत्तियों वाले बेलपत्र के पेड़ हैं। जबकि आमतौर पर बेलपत्र में तीन पत्तियों का गुच्छा ही पाया जाता है।

Posted By: Prashant Pandey

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