मुरैना। कोटा बैराज से छोड़े गए पानी से चंबल पुराने राजघाट पुल पर खतरे के निशान को गई। शुक्रवार रात को पुल के पास खड़े कंटेनर में आठ मजदूर सो रहे थे। रात में चंबल का पानी बढ़ा और कंटेनर नदी में बह गया। करीब 40 किमी बहने के बाद कंटेनर में फंसे 8 मजदूरों को उत्तरप्रदेश के पिनाहट के पास सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि कंटेनर नदी में बह गया।

कोटा बैराज से चंबल नदी में शुक्रवार को 4 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। साथ ही शनिवार को भी 5.95 लाख क्सूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इस वजह से चंबल उफान पर आ गई। चंबल नदी तट पर सिविल वर्क चल रहा था। इस काम में लगे मजूदर रात को नदी के किनारे खड़े कंटेनर में ही सो गए। रात में अचानक चंबल का पानी बढ़ा और कंटेनर नदी में बह गया। इस बात की सूचना लोगों ने उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश की पुलिस व प्रशासन को दी। करीब 40 किमी बहने के बाद कंटेनर दिन में करीब एक बजे पिनाहट के पास पहुंचा। जहां पर बचाव दल ने कंटेनर में फंसे मजदूरों को रेस्क्यू कर निकाल लिया।

इधर 89 गांवों के लिए खड़ा हुआ संकट

चंबल नदी में लगातार जलस्तर बढ़ने से जिले के करीब 89 गांवों के लिए संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदी से दूरी बनाए रखें।