नरसिंहपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हमारे संतों-ऋषियों ने तीन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म मार्ग बताए। लेकिन तीनों मार्ग के संगम थे परम पूज्य ब्रह्मलीन जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज। बचपन से ही उद्भट विद्धान, वैराग्य की वृत्ति, नौ वर्ष की आयु में ही घर छोड़ दिया। लेकिन महान देशभक्त भी थे, ज्ञान पिपासा तो शांत की ही, लेकिन आजादी की लड़ाई में भी भाग लिया। 19 माह जेल में रहे और क्रांतिकारी साधु कहलाए।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि उन्होंने धर्म की जय हो, अधर्म का नाश और प्राणियों में सद्भावना हो और विश्व का कल्याण हो, विश्व कल्यााण के लिए और वह भारतीय, सनातन संस्कृति के माध्यम से ही हो सकता है उसके लिए पूरा जीवन समर्पित किया। वह दीन, दुखियों, दलितों और शोषितों के लिए वह पूरे जीवनभर कार्य करते रहे। चाहे वह झारखंड विश्व कल्याण आश्रम हो या अलग-अलग राज्यों में जनजातियों के कल्याण के कार्य हो वह जीवन भर कार्य करते रहे। चिकित्सालय, विद्यालय, संस्कृत पाठशाला और अनेक सेवा के कार्यो का उन्होंने सदैव संचालन किया। समान नागरिक संहिता, अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण, गोरक्षा जैसे विषयो पर उन्होंने सदैव देश को जगाने का कार्य। अध्यात्म जगत का सूर्य अस्त हुआ है, उनके चेहरे का तेज, वाणी का ओज उनके ब्रह्मलीन होने के बाद भी सदैव दिखाई देता है, मैं उनके चरणो में प्रणाम करता हूं। मुख्यमंत्री श्री चौहान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ परमहंसी में ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के समाराधना कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे।

वहीं प्रदेश के गृह मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल सहित कई नेताओं ने समाधि स्थल पर पूजन किया। मुख्यमंत्री समेत सभी नेताओं ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरांनद सरस्वती, द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती, निज सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद सरस्वती का आशीर्वाद लिया। परमहंसी में देश के विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु, अतिविशिष्ट लोगों, जनप्रतिनिधियों का आना हो रहा है। शुक्रवार को परमहंसी में श्रद्धाजंलि सभा एवं भंडारे का कार्यक्रम हो रहा है। लोगों की अधिक आवाजाही से गोटेगांव से परमहंसी तक सड़कों पर हर तरफ वाहनों की भीड़ दिख रही है। बड़ी संख्या में लोगों की पैदल आवाजाही हो रही है। शंकराचार्य नेत्रालय के पीछे तरफ मंच बनाया गया है। वहीं वाहनों और पैदल आवाजाही के लिए दो अलग-अलग रूट बनाए गए हैं। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रो के अधिकारियों के साथ ही यहां करीब 500 जवानों का बल सुरक्षा में तैनात किया गया है।

ब्रह्मलीन शंकराचार्य जी के इच्छा पत्र का वाचन

श्रद्धाजंलि सभा मंच पर निज सचिव सुबुद्धानंद ने ब्रह्मलीन शंकराचार्य के इच्छा पत्र का वाचन किया। दोनों पीठों के उत्तराधिकारी शंकराचार्र्यों समेत देशभर में बने शंकराचार्य के मठोें, मंदिरोें की जिम्मेदारी जिन्हें दी गई है, उनके नाम पढ़कर सुनाए गए। आश्रम प्रबंधन ने इच्छापत्र को अधिकृत तौर पर जल्द सार्वजनिक करने की बात कही है। पट्टाभिषेक के मुहूर्त की तिथि भी समय आने पर तय करने की बात कही गई।

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आज परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर पहुँच कर श्री द्वारका शारदा पीठ एवं ज्योर्तिमठ बद्रीनाथ जी के ब्रम्हलीन शंकराचार्य परमपूज्य स्वामी श्रीस्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के श्रीचरणों में श्रद्धांजलि अर्पित की। आपके दिखाए पथ पर चलकर हम सदा इस धरा एवं सनातन धर्म की सेवा करते रहेंगे।

- Shivraj Singh Chouhan (@chouhanshivraj) 23 Sep 2022

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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