गोटेगांव(नईदुनिया न्यूज)। शुक्रवार को बगासपुर स्थित सत्यसरोवर आसनजी स्थित सरोवर के बीचों- बीच बने समाधिस्थल कुंड में निर्विकार पथ के प्रणेता श्रीबाबाश्री की पार्थिव देह का जल समाधि संस्कार किया गया। जिसमें गृहस्थ जीवन में श्रीबाबाश्री के पुत्र विनोद चौरसिया सहित अन्य पथिकों ने अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया और अपने गुरु को अंतिम प्रणाम करते हुए विदा किया। श्रीबाबाश्री का अंतिम दर्शन करने के लिए दिनभर विभिन्न स्थानों से निर्विकार पथ से जुड़े लोगों का आना जारी रहा। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार प्रहलाद पटेल, जबलपुर सांसद राकेश सिंह, नरसिंहपुर विधायक जालम सिंह, पूर्व विधायक डॉ. कैलाश जाटव, हरेंद्रजीत सिंह बब्बू सहित अनेक जनप्रतिनिधि इस मौके पर मौजूद रहे। श्रीबाबाश्री का बीते गुरुवार की रात इलाज के दौरान जबलपुर में निधन हो गया था।

श्रीबाबाश्री के निधन की खबर लगते ही गुरुवार की रात से ही क्षेत्र का माहौल शोकाकुल हो गया। शुक्रवार की सुबह से शाम तक नगर का बाजार बंद रहा। जबलपुर से श्रीबाबाश्री की पार्थिव देह बगासपुर स्थित आसनजी पहुंचने के बाद से ही लोगों का अंतिम दर्शन के लिए आना शुरू हो गया था। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी श्रीबाबाश्री के निधन पर ट्वीट कर श्रद्घासुमन अर्पित किए हैं। उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि श्रद्घेय श्रीबाबाश्री ने अपना जीवन समाज को दिशा दिखाने में व्यतीत किया। उनकी शिक्षा आने वाली पीढ़ियों के लोगों के जीवन का उद्घार करेगी। श्रीबाबाश्री केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, जबलपुर सांसद राकेश सिंह, नरसिंहपुर विधायक जालम सिंह पटेल सहित कई जनप्रतिनिधियों के गुरु थे।

ढाई दशक से कर रहे थे नर्मदा की परिक्रमाः जानकारी अनुसार श्रीबाबाश्री का जन्म 27 दिसंबर1942 को नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव तहसील में हुआ था। उनके गृहस्थ जीवन का नाम बालमुकुुंद चौरसिया था और गोटेगांव में रपटा मोहल्ला में उनका निवास था। वर्ष 1981 में उन्होंने गृहस्थ आश्रम छोड़ दिया था। गृहस्थ जीवन में उनकी पत्नी, दो बेटिया व एक पुत्र है। वे सात बार नर्मदाजी की परिक्रमा कर चुके थे। 27 अप्रैल 1984 को गंगा सप्तमी से नर्मदा परिक्रमा शुरू करने के बाद उनकी दाढ़ी बढ़ना शुरू हो गई थी,। बाबाश्री 25 वर्षों से मां नर्मदा की अनवरत परिक्रमा कर रहे थे, निराहार रहकर मात्र नर्मदाजल पीकर वर्तमान में गाडरवारा से 20 किमी दूर सोकलपुर में तप, साधना में थे। उनका कहना था कि सिर्फ साधना के बल पर उनकी दाढ़ी की लंबाई बढ़ती जा रही है। बाबाश्री ने कहा था कि साधु- संतों का दाढ़ी-बाल बढ़ाना वैराग्य की निशानी है, लेकिन सभी साधु-संत एक से नहीं होते। प्राचीन युग में राजा का प्रजा के साथ पुत्रवत व्यवहार रहता था, लेकिन आज सत्तासीन नेता भाई-भतीजावाद परंपरा को बढ़ावा देकर मित्रवत व्यवहार कर रहे हैं। साधु-साध्वी राजनीति में जाएं, तो उन्हें धर्मनीति का साथ देना चाहिए। युवाओं को चाहिए कि भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए वह निर्विकार पथ अपनाएं। इस पथ पर चलने के लिए लहसुन, प्याज, मांस खाने और नशा करने की आदत छोड़ना जरूरी है। उन्होंने वर्ष 1981 में निर्विकार पथ की स्थापना की थी।

बनाया था वर्ल्ड रिकॉर्डः वर्ष 2008 में उनकी दाढ़ी 1.84 मीटर यानी करीब 6 फुट थी। तब उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्‌स में शामिल हो गया। 8 साल बाद उनकी दाढ़ी की लंबाई 11 फुट 4 इंच यानी 3 मीटर 45 सेमी हो गई। इससे उनका ही पूर्व रिकॉर्ड टूट गया है। ऐसे बहुत से वर्ल्ड रिकॉर्ड उन्होंने बनाएं हैं।

भक्तों में शोक की लहरः श्री निर्विकार पथ के प्रगटकर्ता श्रीबाबाश्री ने गुरुवार 21 जनवरी को रात्रि में देह त्याग दिया। यह खबर लगते ही उनके भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई। श्रीबाबाश्री ने पिछले कुछ समय से जल का भी त्याग कर दिया था जिससे उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही थी और पिछले 45 दिनों से मुंबई में इलाजरत थे।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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