नरसिंहपुर। अवैध पैथोलॉजी के खिलाफ जब-तब मुहिम छेड़ने वाला औषधी विभाग इन दिनों जिला अस्पताल में बिना लाइसेंस के संचालित ब्लड बैंक को लेकर बैकफुट पर है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जहां इस ब्लड बैंक को वरिष्ठों के आदेश पर संचालित करने की बात कह रहे हैं तो वहीं जानकारों के अनुसार लाइसेंस जारी न होने के कारण जिला अस्पताल का ब्लड बैंक भी अवैध ही माना जाएगा।

जिले में बढ़ते कोरोना संक्रमित मरीजों और अति गंभीर मरीजों को प्लाज्मा की जरूरत के मद्देनजर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में मशीन तो उपलब्ध है लेकिन इसे शुरू करने की अनुमति नहीं है। नतीजतन जरूरतमंदों को जबलपुर के मेडिकल कॉलेज या निजी पैथोलॉजी लैब की ओर रुख करना पड़ रहा है। वहीं पड़ताल में ये बात सामने आई है कि जिला अस्पताल का ब्लड बैंक ही बिना लाइसेंस का चल रहा है।

नईदुनिया की खबरों से सामने आई हकीकतः सरकारी स्तर पर लालफीताशाही का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि जिला अस्पताल में मौजूद ब्लड बैंक के लाइसेंस को ही जारी नहीं किया जा रहा है। तकनीकी नजरिए से देखें तो ये ब्लड बैंक वर्ष 2012 से अब तक अवैध रूप से ही संचालित है। हालांकि अप्रेल माह में जब प्लाज्मा मशीन को शुरू करने की मांग उठी थी तो तत्कालीन प्रभारी कलेक्टर भरत यादव ने स्वास्थ्य संचालनालय और शासन स्तर पर बात करके ब्लड बैंक का लाइसेंस और प्लाज्मा मशीन शुरू कराने की अनुमति जारी करने के लिए पत्राचार किया था। जिसके फलस्वरूप आनन-फानन में भोपाल स्तर से लाइसेंस भेज तो दिया लेकिन इस लाइसेंस की मियाद 2017 तक ही थी। कहने का आशय ये है कि वर्ष 2012 में जारी किए गए लाइसेंस को भोपाल से जिला अस्पताल तक पहुंचने में ही 9 साल लग गए। जैसे एक्सापयरी डेट के लाइसेंस की बात जिला प्रशासन के संज्ञान में आई तो तत्काल नए सिरे से इसे रिन्यू कराने की कोशिशें भी शुरू हो गईं। शासन स्तर पर पत्राचार भी किया जा चुका है, बावजूद इसके लाइसेंस कब तक आएगा, इसे लेकर स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी वर्तमान में कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। विदित हो कि नईदुनिया ने बीती 23 व 24 अप्रेल को प्लाज्मा मशीन के शुरू न होने के कारणों और एक्सपायरी डेट के लाइसेंस भेजने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस मामले में तत्कालीन प्रभारी कलेक्टर भरत यादव व औषधी निरीक्षण प्रदीप अहिरवार का कहना था कि मशीन को शुरू कराने और ब्लड बैंक का लाइसेंस रिन्यू कराने के लिए नए सिरे से प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही 2022 तक का लाइसेंस प्राप्त हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का लाइसेंस अभी भी शासन स्तर पर पेंडिंग है, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्रालय से इसे जारी ही नहीं किया गया है।

वर्ष 2017 में ही जमा किया चालान, लाइसेंस का इंतजार

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रोजाना सैकड़ों लोगों की पैथोलॉजी की जांचें होती हैं, जिसकी रिपोर्ट शासन द्वारा अधिकृत चिकित्सक द्वारा जारी की जाती है। हैरान करने वाली बात ये है कि अधिकृत चिकित्सक और स्टाफ द्वारा जिस ब्लड बैंक में जांचें की जाती हैं, उनकी अनुमति लिखित न होकर मौखिक है। जानकारी के अनुसार ब्लड बैंक के लाइसेंस रिन्यूबल के लिए वर्ष 2017 में ही जरूरी चालान की राशि शासन के खाते में जमा कराई जा चुकी है। जरूरी दस्तावेज भी जमा किए जा चुके हैं। फिर भी लाइसेंस की कॉपी चार साल बाद भी अप्राप्त है। इस बारे में पूछे जाने पर स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लाइसेंस के लिए चालान जमा करना महत्वपूर्ण होता है। भोपाल स्तर के वरिष्ठ अधिकारी उन्हें मौखिक रूप से निर्देशित कर चुके हैं कि चालान जमा होने की स्थिति में वे ब्लड बैंक का संचालन कर सकते हैं। हालांकि मुखाग्र आदेश-निर्देश पर जब ब्लड बैंक संचालित हो सकता है तो प्लाज्मा मशीन को शुरू क्यों नहीं किया जा रहा है, इस पर स्वास्थ्य विभाग लिखित अनुमति मिलने की बात पर अड़ा है।

लाइसेंस के लिए पूर्व विधायक सुनील जायसवाल ने रास सदस्य को भेजे दस्तावेज

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में वर्ष 2012 में राज्यसभा सदस्य व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा के प्रयासों से प्लाज्मा मशीन उपलब्ध कराई गई थी। इसी दौरान नए ब्लड बैंक की बिल्डिंग का शुभारंभ भी हुआ था। इसका उद्घाटन वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष वीके सिंह के आतिथ्य में हुआ था। हालांकि तब से लेकर अब तक इस प्लाज्मा मशीन को शुरू नहीं किया गया। इसकी वजह ब्लड बैंक के पास लाइसेंस न होना बताया गया था, जबकि अन्य पैथोलॉजी जांचें जारी रहीं। वर्तमान में प्लाज्मा मशीन की अत्याधिक जरूरत को देखते हुए पूर्व विधायक सुनील जायसवाल ने पहल की है। उन्होंने दो दिन पहले ही राज्यसभा सदस्य विवेक तंखा को मशीन से जुड़े दस्तावेज ईमेल के जरिए भेजकर उनसे लाइसेंस रिन्यूबल कराने और मशीन शुरू करने की अनुज्ञा जारी करने का आग्रह किया है। श्री जायसवाल के अनुसार उनके आग्रह को मानते हुए श्री तंखा ने प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव से इस बारे में बात की है। साथ ही दिल्ली स्थित विभाग से लाइसेंस को रिन्यू कराने की कोशिश की जा रही है। श्री जायसवाल के अनुसार विधायक रहते उन्होंने विधानसभा में भी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक और प्लाज्मा मशीन को शुरू कराने की अनुमति को लेकर कई बार सवाल भी पूछे। इस पर उन्हें जवाब मिला कि जल्द ही लाइसेंस जारी हो जाएगा, जो कि आज दिनांक तक नहीं हुआ है।

चूहों ने कुतरा तार, डेढ़ लाख का प्लाज्मा मशीन पर खर्चा

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में वर्ष 2012 में आई प्लाज्मा मशीन को नए सिरे से शुरू करने में करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्चा आने वाला है। इसकी वजह ये है कि जब ये मशीन ब्लड बैंक को उपलब्ध कराई गई थी, तब से लेकर आज तक इस मशीन को लाइसेंस न होने के नाम पर शुरू ही नहीं किया जा सका है। नतीजा ये रहा कि 10 साल तक बंद रहने के दौरान इस मशीन के तारों व कंपोनेंट को चूहों ने कुतर दिया है। अब यदि प्लाज्मा निकालने के लिए इस मशीन को शुरू किए जाने की कोशिश होती है तो करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्चा आना तय है। हालांकि मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू आदि रोगों के लिए कंपोनेंट बनाने के लिए इस मशीन को उपयुक्त बनाने करीब 15 लाख रुपये तक का खर्चा आएगा। ऐसा 24 अप्रेल को तत्कालीन प्रभारी कलेक्टर भरत यादव ने नईदुनिया से कहा था।

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23 अप्रेल 2021 में जब हमें एक्सपायरी डेट का लाइसेंस भेजा गया था, उसके दूसरे ही दिन हमने रिन्यूबल के लिए सभी तरह की जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर भोपाल कार्यालय को भेज दिया था। वहां से इसे दिल्ली स्थित संबंधित विभाग को प्रेषित किया जा चुका है। जहां तक प्लाज्मा मशीन शुरू करने की बात है तो जिला अस्पताल प्रबंधन को इस दिशा में पहल करनी होगी। जो भी कमियां होंगी, उसे हम पूरा कर देंगे।

प्रदीप अहिरवार, जिला औषधी निरीक्षक, नरसिंहपुर।

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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक के लाइसेंस का मामला औषधी विभाग के अंतर्गत आता है। हमने वर्ष 2017 में ही लाइसेंस के रिन्यूबल के लिए चालान जमा कर दिया है, इसकी सूचना भी उच्च विभाग को दे दी है। चूंकि चालान जमा हो चुका है, इसलिए वरिष्ठों के मुखाग्र आदेश पर ब्लड बैंक का संचालन हम कर रहे हैं। लाइसेंस की हार्डकॉपी कब तक आएगी ये औषधी विभाग ही बता सकता है।

डॉ. आरके सागरिया, पैथोलॉजिस्ट, जिला अस्पताल नरसिंहपुर।

Posted By: Nai Dunia News Network

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