गोटेगांव (नईदुनिया न्यूज)। नगर की कृषि उपज मंडी का किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है। यहां बनी कैंटीन, विश्राम गृह लंबे समय से बंद है। किसानों की उपज का सौदा बोली से नहीं होता। व्यापारियों के लिए भी यहां गोदाम नहीं है जिससे वह अनाज की खरीदी मंडी में कम करते है।

पूर्व राज्यमंत्री व नरसिंहपुर विधायक जालम सिंह पटेल जब मंडी के अध्यक्ष थे तो मंडी का कार्यालय किराए के मकान में संचालित था। मंडी अध्यक्ष रहते श्री पटेल ने नगर से बाहर मंडी निर्माण के लिए करीब 10 एकड़ जमीन क्रय कराई थी। जहां पर मंडी का निर्माण किया गया और किसानों को रूकने विश्राम गृह, 5 रूपये में भोजन उपलब्ध कराने कैंटीन बनाई गई। लेकिन आज करोड़ों रूपये की राशि से यहां सुविधाए उपलब्ध होने के बाद भी मंडी मात्र समर्थन मूल्य की खरीदी और गुड़ खरीदी का केंद्र बनकर रह गई है। जबकि श्री पटेल ने सर्वसुविधा युक्त मंडी का निर्माण इसलिए कराया था कि किसानों को उनकी उपज का अच्छा दाम मिले और मंडी में किसान उपज का विक्रय कर सकें।

लंबे समय से बिगड़ी हैं व्यवस्थाएं: मंडी में लंबे समय से व्यवस्थाएं बिगड़ी है। यह मंडी कभी जिले में सर्वाधिक धान उपार्जन करने वाली मंडी कहलाती थी। जहां पर किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य मिलता था। लेकिन आज मंडी में न तो डाक लगाई जाती है और न ही नीलामी होती है। गुड़ की नीलामी से मंडी कर्मचारियों का 4 माह का वेतन निकलता है। शेष महिने के वेतन के लिए उन्हें इंतजार करना पड़ता है। वहीं मंडी में अनाज रखने के लिए 500-500 मीट्रिक टन अलावा एक बड़ी गोदाम है लेकिन व्यापारियों को प्रतिदिन खरीदी के लिए गोदाम नहीं है। जिससे व्यापारियों द्वारा यहां खरीदी करने की बजाए अपनी दुकानों पर खरीदी की जाती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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