गोटेगांव (नईदुनिया न्यूज)। नगर से 21 किमी दूर आदिवासी गांव बड़ा कुंडा में जल संसाधन विभाग ने कुंडा जलाशय का निर्माण किया था। जिससे आदिवासी अपनी फसलों की सिंचाई का कार्य करके खेती में पैदावार बढ़ा सकें। यह जलाशय 4 करोड़ की लागत से करीब एक दशक पहले बनाया गया था। जिससे कुंडा, छोटा कुंडा, सूकरी, कोरेगांव, पिपरसरा आदि गांव के किसानों को लाभ मिलना था। लेकिन लंबे समय से जलाशय की देखरेख नहीं हो रही है।

जलाशय का पानी किसानों के खेतों तक जाने के लिए नहरें बनाई गई थी। लेकिन पहली बार ही नहरों से पानी छोड़े जाने पर नहर तीन से चार स्थानों से बह गई थी। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कार्य कितनी गुणवत्ता से किया गया था। आज जलाशय की पिचिंग निकल रही है। पिचिंग में बोल्डर लगाए गए है जबकि यहां पत्थर लगना था। आज इस जलाशय से सिंचाई की जगह सिर्फ मछली पालन का कार्य हो रहा है। ग्राम कुंडा के ग्रामीण इसका उपयोग केवल नहाने के लिए करते है। जलाशय के गेट तक पानी नहीं पहुंचता है। किसानों का कहना है कि गेट बनाने में तकनीकी खामी हुई है। क्षेत्र में जितने भी जलाशय है वह सब सूख गए है केवल कुंडा जलाशय में ही पानी है। जो मात्र मछली पालन के लिए उपयोग में आता है।

अतिक्रमण कर हो रही खेतीः ग्रामीणों के अनुसार जलाशय की ऊंची जगह पर किसान अतिक्रमण कर खेती कर रहे है। जलाशय का पानी भी सीपेज हो रहा है। ग्रामीणों ने जलाशय की जांच कर उसकी उचित देखरेख कराने की शासन से मांग की है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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