नरसिंहपुर (नईदुनिया प्रतिनधि)। पुलिस की संवेदनशीलता ने करीब 27 साल पहले पत्नि व बच्चों को अपने हाल पर छोड़कर आए शख्स को आखिरकार मौत के बाद घर की जमीन नसीब करा दी।

मृतक के पास मिले आधार कार्ड पर दर्ज पते को अस्पताल पुलिस के कर्मचारियों ने गूगल पर सर्च किया तो राजस्थान प्रांत के एक गांव का पता चला। जहां की पुलिस से मदद मांगी तो पुलिस ने भी संवेदनशीलता दिखाई और मृतक के स्वजनों का पता उपलब्ध कराया। जिसके बाद राजस्थान से करीब 1200 किमी का सफर कर मृतक के स्वजन नरसिंहपुर पहुंचे जो यहां से शव लेकर राजस्थान जाएंगे ताकि पिता का अंतिम संस्कार उसके घर कर सकें।

मामला यह है कि राजस्थान निवासी मृतक शंकरलाल (55) पुत्र कजोर मीना विगत कई वर्षों से बरमान के पास झोपड़ी बनाकर रहता था। जिसकी जानकारी उसके स्वजनों को नहीं थी। वह यहां ट्रक ड्रायवर के रूप में कार्य करता था। जिसे बीमार होने पर करेली अस्पताल से बीते 15 अक्टूबर को जिला अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन यहां आइसोलेशन वार्ड में भर्ती शंकरलाल की 28 नवंबर को मौत हो गई। जब उसका शव लेने के लिए कोई नही आया तो अस्पताल चौकी प्रभारी प्रधान आरक्षक सुधीर शर्मा व उनके स्टॉफ के आरक्षक चंद्रकांत प्रजापति, आशीष सेन, सैनिक लेखराम चौधरी, मोहित मेश्राम आदि ने विभिन्न माध्यमों से उसके परिजनों की तलाश शुरू की तो सफलता मिल गई।

पुलिस ने यह किया प्रयासः चौकी प्रभारी सुधीर शर्मा ने बताया कि मृतक के पास उसका आधार कार्ड व ड्रायविंग लायसेंस मिला था। जिसमें उसका नाम शंकरलाल मीना व पता देवली टोंक राजस्थान लिखा हुआ था। कार्ड में लिखे हुए पते को हमने गूगल में सर्च किया तो राजस्थान के देवली थाना का चित्र दिखाई दिया। इस थाने के बाहर लिखे बोर्ड में एक मोबाइल नंबर लिखा हुआ था, जिसमें कॉल किया तो वहां के पुलिस अधिकारी से बात हुई। फिर हमने उन्हें मृतक से संबंधित सभी दस्तावेजों को फोटो भेजकर पतासाजी का निवेदन किया तो उन्होंने भी सक्रियता दिखाते हुए आरटीओ ऑफिस व अन्य थानों से संपर्क करके मृतक के परिजनों को खोज निकाला और बताया कि वे भीलवाड़ा जिले में रहते हैं। राजस्थान पुलिस ने स्वजनों को हमारा मोबाइल नंबर दे दिया। फिर परिजनों ने हमसे संपर्क किया और 29 नवंबर को जिला अस्पताल पहुंच गए। वे अंतिम संस्कार के लिए शव को निजी वाहन से राजस्थान लेकर गए हैं। वे गरीब परिस्थिति के लोग हैं, इसलिए हमने उन्हे चाय-नाश्ते के लिए कुछ आर्थिक मदद भी की।

बेटों ने पहली बार देखा पिता का चेहराः राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के चितौड़ा गांव में रहने वालीं मृतक की 50 वर्षीय पत्नि गीता मीना ने फोन पर हुई चर्चा में बताया कि उनका पति करीब 30 साल पहले घर छोड़कर चला गया था। उस वक्त उनका बड़ा बेटा दिनेश 4 साल का था तो छोटे बेटे रविन्द्र की उम्र महज 1 वर्ष थी। इन्होंने बताया कि कुछ वर्षों तक वह राजस्थान में ही रहकर आसपास के जिलों में काम करता रहा तो परिचितों से उसकी जानकारी लगती रहती थी। लेकिन पिछले 15 वर्षों से उसके बारे में किसी को कुछ पता नही था। बच्चे पापा के बारे में पूछते तो उन्हे यही कहकर दिलासा देती थी कि वे जल्द लौट आएंगे। हमें क्या पता था कि उनकी लाश ही घर आएगी। श्रीमती मीना ने बताया कि पति के न रहने के कारण उन्होंने मजदूरी करके खासी मुश्किलों से अपने दोनों बेटों परवरिश कर उनकी शादी करवाई। मृतक शंकर के छोटे बेटे रविन्द्र मीना 27 वर्ष ने बताया कि उसने जीवन में पहली बार अपने पिता को देखा है। वह बचपन से उनके बारे में मां से पूछता रहता था, लेकिन मां ज्यादा कुछ नही बतातीं और चुप रहने कह देतीं। उन्होंने ही कई हमें पालापोसा, अब उसके भी दो बच्चे हैं। मां के कहने पर ही हम अंतिम संस्कार के लिए उनका शव लेने यहां आए हैं। यहां के पुलिस कर्मियों ने हमारी खासी मदद की जिसके लिए हम उनके सदैव एहसानमंद रहेंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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