उमरिया।

विदेश में नौकरी करने गए बेटे की मौत की खबर आने के बाद से नौरोजाबाद निवासी एक पूरा परिवार बेचैन है। पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। मां की आंखें पथरा गई हैं और बीवी बेसुध हो गई है। इसके बाद भी तमन्ना यह है कि अपने जिगर के टुकड़े को एक बार देख लें और उसके शरीर को अपनी सरजमीं की आगोश मिल सके। इसके लिए पूरा परिवार लगातार जद्दो-जहद कर रहा है। जिले अंतर्गत नौरोजाबाद क्षेत्र में रहने वाले इस्तेखार अहमद की 14 नवंबर को बीमारी के बाद इलाज के दौरान सऊदी अरब खामिस अबहा में मौत हो गई। 14 नवंबर को जब उसकी मौत की खबर इस्तेखार के चचेरे भाई ने सऊदी अरब से भेजी,तो नौरोजाबाद में रहने वाले उसके परिवार में मातम छा गया।

नसीब हो जाए सरजमीं की आगोश

अब उसके परिजन इस्तेखार के शव को अपनी सरजमीं पर दफन करना चाहते हैं। जिसके लिए उन्होंने सबसे पहला प्रयास उमरिया जिले के कलेक्टर से मिलकर किया। स्वजनों ने कलेक्टर को पूरी स्थिति से अवगत कराते हुए इस संदर्भ में विदेश मंत्रालय सहित अन्य संबंधित वरिष्ठ कार्यालयों से संपर्क करने की गुजारिश की है। कलेक्टर ने भी स्वजनों की बात सुनने के बाद उनकी हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है।

प्रशासन की प्रक्रिया जारी

सीईओ जिला पंचायत अंकित आस्थाना ने बताया कि स्वजनों का आवेदन मिलने के बाद ही इस्तेखार के शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रदेश सरकार को इस बारे में जानकारी भेजी जा चुकी है। प्रदेश सरकार ने इस्तेखार के स्वजनों के आवेदन का अनुवाद करवाकर उसे इराकी दूतावास को भेजा जाएगा और इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।

पिछले दस साल से अरब में

इस्तेखार अहमद बीते 10 वषोर् से सऊदी अरब के किसी कारोबारी के यहां वाहन चलाने का काम करता था। वह 10 सालों से वहां कार्यरत था और बीच-बीच में भारत आता रहता था। सऊदी अरब के जिस स्थान पर मृतक काम करता था, उससे 400 किलोमीटर दूर उसके रिश्ते का चचेरा भाई भी रहता था। इसी चचेरे भाई ने 14 नवंबर को सऊदी स्वजनों को उसकी मौत की खबर दी।

लंबे समय से था बीमार

स्वजनों ने यह भी बताया कि इस्तेखार अहमद बीते कई दिनों से बीमार चल रहा था और परिवार जन लगातार उसके संपर्क में थे। सऊदी अरब स्थित मदनी अस्पताल में उसकी मौत के बाद उसके स्वजनों ने वहां से शव लाने के लिए सऊदी अरब में प्रयास तो किए लेकिन उनकी कहीं नहीं चली। तो उन्होंने देश के प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित क्षेत्रीय सांसद से भी मुलाकात और संपर्क करने के प्रयास किए पर बात नहीं बनी। इसी क्रम में वे कलेक्टर से मिले और उनके माध्यम से सरकार तक बात पहुंचाने का प्रयास किया।

परिवार को इंतजार

इस्तेखार उमरिया जिले के नौरोजाबाद कालरी अंतर्गत निकाय क्षेत्र के वार्ड नंबर 14 का मूल निवासी है। उसके पिता अनवर अहमद बीते कई दशकों से यही रहते थे। 45 वर्षीय इफ्तेखार अहमद रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गया था और काम मिल जाने के बाद से वहीं रहता था। साल डेढ़ साल में वह शासन से अनुमति लेकर घर आता था। इस्तेखार के पीछे यहां पर उसका एक बेटा और तीन बेटियां तथा पत्नी रहते थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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