नरसिंहपुर, नईदुनिया न्यूज। इंदौर से जबलपुर के बीच चलने वाली ओवरनाइट एक्सप्रेस के एसी-2 कोच में रेलवे के क्लास वन अधिकारी की पत्नी के साथ छेड़छाड़ के आरोप में सुर्खियों में आए रेल सुरक्षा बल के डीआईजी विजय खातरकर यहां नरसिंहपुर से प्रथम न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत से 10 हजार के जमानत मुचलके पर रिहा कर दिए गए।

जीआरपी गाडरवारा के थाना प्रभारी बीपी पांडे, जांच अधिकारी जबलपुर मीणा ठाकुर, एएसआईजी आरजी ढक्कर और कांस्टेवल मिहीलाल आरपीएफ की डीआईजी विजय खातरकर को लेकर नरसिंहपुर पहुंचे। पूरा मामला इतना अधिक गोपनीय रखा गया कि अधिवक्ताओं और दूसरे अधिकारियों को भी पता नहीं चला। हाई प्रोफाइल हो गए इस मामले में इस इतना सुनियोजित था कि पुलिस के आलाअफसर और जीआरपी के अधिकारी भी दोपहर में 1 से 4 बजे तक गुपचुप तरीके से न्यायालय पहुंचे। वहां एक कक्ष में डीआईजी बैठे। इसके बाद जीआरपी गाडरवारा ने जेएमएफसी रूचि सगर में चालान प्रस्तुत किया, उन्हें पेश किया गया। डीआईजी की तरफ से कहा गया कि वह निर्दोष हैं, उन्हें फसाया गया है। तमाम तथ्यों को सुनने के बाद जेएमएफसी की

अदालत ने उन्हें 10 हजार रुपए के जमानत मुचलके पर रिहा कर दिया। यद्यपि इसमें एक अधिवक्ता कृष्णकुमार सराठे आपत्ति पेश करना चाहते थे, लेकिन विलंब के कारण ऐसा नहीं कर सके।