गोटेगांव (नईदुनिया न्यूज)। सड़क, नाली निर्माण जैसी मूलभूत सुविधाएं ही तहसील में भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ रहीं हैं, बल्कि इसके दायरे में व्यक्ति की अंतिम यात्रा का पड़ाव स्थल मुक्तिधाम भी अछूता नहीं है। यहां पर दो साल पहले विकास के नाम पर करीब 60 लाख रुपये की धनराशि खर्च की गई। बावजूद इसके, आज भी यहां पर समस्याओं का अंबार है।

जानकारी के अनुसार शहर के मुक्तिधाम के विकास के लिए नगरपालिका द्वारा 9 दिसंबर 2019 तक करीब 60 लाख 40 हजार रुपये की राशि खर्च की थी। मुक्तिधाम के परिसर का तत्कालीन पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व वर्तमान में क्षेत्रीय विधायक एनपी प्रजापति द्वारा विधिवत उद्घाटन भी किया गया था। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी मुक्तिधाम में निर्माण के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई। जिस तरह के विकास की बात कही गई थी, वह मौजूदा स्थिति से कोसों दूर है। मुक्तिधाम में आज भी दो के दो शेड ही हैं, बाकी मुखाग्नि स्थल बिना शेड के हैं। यहां मात्र खंबे ही नजर आते हैं। इसमें आज तक शेड लगाने का काम नहीं कराया जा सका है। कुछ जगह से खंबे तक नदारद हो गए हैं। पूछे जाने पर नगरपालिका के अधिकारी काम जल्द कराने की बात कहते नजर आते हैं। अब तो वे ये तक कहते नजर आ रहे हैं कि बजट आने पर काम कराया जाएगा।

वीरान पड़ी जमीन, उगी झाड़ियां: विकास के नाम पर लाखों रुपये उड़ाने वाली नगरपालिका के कारनामे मुक्तिधाम परिसर की बदहाली बयां करती है। मुक्तिधाम में अधिकांश जगह वीरान पड़ी है। यहां पर कंटीली झाड़ियां उग आई हैं। चारों तरफ गंदगी का आलम है। कुछ जगह पौधे तो रोपे गए हैं लेकिन उसे सुरक्षित करवाने जालियां नहीं लगाई गईं हैं। जबकि नगरपालिका में ही ट्री गार्ड पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं। यदि ये ट्री गार्ड मुक्तिधाम में लगवा दिए जाएं तो पेड़ का शक्ल ले रहे पौधे और अधिक सुरक्षित हो जाएंगे। इसके साथ ही मुक्तिधाम का सुंदरीकरण भी हो जाएगा, लेकिन नगरपालिका अधिकारियों की मति में ये बात अब तक नहीं चढ़ी है। वे तो मनमर्जी से ख्याली पुलाव पकाकर विकास की दुहाई देने में लगे हैं।

चीरघर की हालत भी दयनीयः दुर्घटनाओं, हादसों व अन्य वारदातों में मृत लोगों के पोस्टमार्टम के लिए मुक्तिधाम परिसर में ही चीरघर भी बना हुआ है। वर्तमान में इसका संरक्षण न होने के कारण इसकी हालत दयनीय हो गई है। चीरघर की दीवारों पर दरारें आ गईं हैं। छत भी कब गिर जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।नागरिकों का कहना है कि इसके पहले कि ये जर्जर चीरघर धराशायी हो जाए, इसका पुनर्निमाण नगरपालिका को कराना चाहिए।नागरिकों की ये भी मांग है कि जल्द से जल्द मुक्तिधाम में शेष रह गए शेडों की स्थापना कर परिसर को झाड़ीमुक्त कराया जाए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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