नरसिंहपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)।जिले में नौनिहालों की सेहत कुछ ठीक नहीं चल रही है वह कुपोषण सहित कई अन्य बीमारियों से अस्वस्थ चल रहे हैं।इसकी पुष्टि मिशन चिरजींवी के तहत लग रहे स्वास्थ्य शिविरों के जरिए हो रही है।जिले में स्कूल बंद होने के कारण इन दिनों आरबीएस के चिकित्सकों द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर शिविर लगाए जा रहे हैं। माह में अब तक 111 केंद्रो में लगे शिविरो के दौरान 4343 बच्चों की जांच में करीब 754 बच्चे अस्वस्थ मिल चुके हैं। जिनमें 542 को उपचार दिया गया है वहीं करीब 207 बच्चे नजदीकी केंद्रो में रेफर हो चुके हैं। जिले में महिला बाल विकास विभाग के आंकड़ो में भी अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 165 व सामान्य कुपोषितों की संख्या 1250 बताई जा रही है।

जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों व स्कूलों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर नवजात से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनकी सेहत परखने मिशन चिरंजीवी अभियान चल रहा है। जिसमें बच्चों की जांच के साथ ही गर्भवती महिलाओं की जांच भी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अमले ने इस मार्ग गर्भवती महिलाओं का सर्वे भी कराया है जिसकी रिपोर्ट तैयार हो रही है। वहीं स्कूल बंद रहने के कारण आरबीएस की टीम द्वारा हर दिन अलग-अलग क्षेत्रो की आंगनबाड़ी केंद्रो में कार्यकर्ता-सहायिकाओं की मदद से नवजात से छह वर्ष तक की आयु के बच्चों की जांच कर उन्हें उपचार दिया जा रहा है।बताया जाता है कि आरबीएस के चिकित्सकों की टीम द्वारा एक मई से 24 मई तक करीब 111 आंगनबाड़ी केंद्रो में बच्चों की जांच की जा चुकी है। जिसमें जो बच्चे अस्वस्थ पाए गए हैं उनका मौके पर इलाज करने के साथ ही उन्हें दवाइयां दी गईं हैं। साथ ही जिन बच्चों को गंभीर बीमारियों से प्रभावित पाया गया है उन्हें उचित इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रो में रेफर कराया गया है। शिविरों के दौरान बच्चों के पालकों को भी बीमारियों से बच्चों को बचाने के लिए परामर्श दिया जा रहा है। करेली ब्लाक के पलोहाछोटा व रहली केंद्र के 104 बच्चों में से 33 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जिसमें 1 का मौके पर इलाज हुआ जबकि 5 रेफर हुए।

जागरूकता की कमी से बढ़ रहा कुपोषणः जिले में बच्चों को स्वस्थ बनाए जाने के लिए शासन-प्रशासन के जरिए आंगनबाड़ी एवं स्वास्थ्य केंद्रो के जरिए तमाम योजनाएं चल रही हैं। लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रो में संसाधनों के अभाव से कुपोषण की समस्या से जिले को निजात नहीं मिल रही है। जिले में अभी भी करीब साढ़े 1200 बच्चे ऐसे चिह्नित है जो सामान्य कुपोषित है जबकि अति कुपोषित बच्चों की संख्या करीब 165 बताई जा रही है। यह तो सिर्फ सरकारी आंकड़े हैं लेकिन वस्तुस्थिति कुछ और है जो लोगों में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी को दर्शा रही है। बताया जाता है कि आंगनबाड़ी केंद्रो के जरिए जिले में खुले पोषण पुनर्वास केंद्रो तक भी कुपोषित बच्चे समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं जो बच्चे केंद्रो में आते हैं उनकी 14 दिन के उपचार व देखरेख के बाद सेहत तो सुधर जाती है लेकिन वापिस उनके अपने गांव-घर जाने के बाद उनकी उचित निगरानी नहीं हो पाती। जिससे अधिकांश बच्चे फिर कुपोषण व अन्य बीमारियों की जद में आ जाते हैं।

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मिशन के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच और सर्वे का कार्य भी चल रहा है। आरबीएस की टीम आंगनबाड़ी केंद्रो में बच्चों की जांच कर रही है। जो बच्चे अस्वस्थ मिल रहे हैं उन्हें दवाइयां दी जा रहीं हैं। मिशन से लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी आ रही है।

डा अजय कुमार जैन, सीएमएचओ नरसिंहपुर

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आंगनबाड़ी केंद्रो के जरिए लोगों को लगातार बच्चों के स्वास्थ्य उन्हें उचित पोषण आहार देने जागरूक किया जा रहा है। अभी करीब 165 बच्चे अतिकुपोषित और 1250 सामान्य कुपोषित की श्रेणी में है। इलाज व पोषण आहार से बच्चों को कुपोषण के ग्रेड से बाहर कर स्वस्थ किया जा रहा है।

मोहिनी जाटव, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास नरसिंहपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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