गोटेगांव (नईदुनिया न्यूज)। क्षेत्र की आंखीबाड़ा पंचायत के ग्राम नेगुआं के ग्रामीण आजादी के बाद से ही सड़क-पुल को तरस रहे हैं। ग्रामीणों को लकड़ी का पुल बनाकर स्थानीय वैनगंगा नदी को पार करना पड़ता है। शासन-प्रशासन की धींगामस्ती यह है कि दशकों से हो रही मांग के बाद 3 वर्ष पूर्व सड़क-पुल के कार्य को कराने टेंडर लगा लेकिन कार्य आज तक नहीं हो सका है।

सड़क-पुल की मांग करते हुए मतदान के दिन ग्रामीणों द्वारा किए गए विरोध के बाद यह गांव फिर सुर्खियों में आ गया है। जहां के वाशिंदो ने शासन-प्रशासन की नाकामी और असंवेदनीशीलता को उजागर कर दिया है। बताया जाता है कि नेगुआं में गांव के पास ही वैनगंगा नदी निकली है। जिस पर पुल नहीं बना है, जिससे ग्रामीणों ने अपने स्तर पर ही नदी पार करने लकड़ी का पुल बनाया है जिससे वह वर्षा के साथ ही अन्य दिनों में आवागमन करते है। ग्रामीणों का यह पुल बिजली के दो खंभो और मोटी बल्लीनुमा लकड़ियों के सहारे बना है। जिसमें लगे पटिया कमजोर हो गए है, ग्रामीणों को हर समय जोखिम बना रहता है कि कोई घटना न हो जाए। ग्रामीण कहते हैं कि जबाबदार जनप्रतिनिधि चुनाव में सिर्फ वोट लेने आते हैं। चुनाव होते ही फिर वह गांव में दिखाई नहीं देते। सुदूर सड़क के नाम पर कार्य का टेंडर हो गया है लेकिन ठेकेदार स्वयं जनप्रतिनिधि हैं जिन्होंने कार्य को पेटी में देकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। जिससे कार्य नहीं हो पा रहा है और ग्रामीणों में असंतोष बना है।

वर्षाकाल में होती है नारकीय हालतः ग्रामीण कहते हैं कि वर्षाकाल में उनका जीवन नारकीय हो जाता है। बीते वर्ष अधिक वर्षा होने से ग्रामीणों ने ही श्रमदान करते हुए कच्ची सड़क पर मुरम डलवाई थी। यह सड़क खराब हो चुकी है। जिससे इस वर्षाकाल में भी आवागमन करने के लिए उन्हें श्रमदान कर मुरम डालना पड़ेगी।सड़क एवं पुल न होने से गांव में कोई बीमार होता है तो वर्षाकाल में मरीज को खाट पर लेकर जाना पड़ता है।ग्राम के हरप्रसाद का कहना है कि विकास के मामले में गांव दशकों से पिछड़ा है और उन्हें आश्वासन के नाम पर लगातार ठगा जा रहा है। यही कारण है कि गांव के लोगों ने मतदान के दिन आक्रोश जताया और मतदान से दूरी बनाई।

Posted By: Nai Dunia News Network

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