नरसिंहपुर/सालीचौका (ब्यूरो)। कजली का पर्व एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहने का पर्व ही नहीं बल्कि संस्कृति और जोश का भी पर्व है। गाडरवारा से लगे सहावन गांव में कजली के दूसरे दिन ऐसा ही एक आयोजन गेड़ी स्पर्धा का रहा। जिसमें गांव के 45 से 50 युवाओं ने बड़े तालाब के पास लकड़ी की गेड़ी पर संतुलन का खेल दिखाकर वाह वाही लूटी। ग्रामीणों ने भी तालियां बजाते हुए स्पर्धा में भाग लेने वालों का हौसला बढ़ाया।

सहावन ग्राम में दशकों से कजली पर्व के दूसरे दिन गेड़ी स्पर्धा के आयोजन की कई सालों से परंपरा चली आ रही है। इस अनूठी परंपरा को लेकर गांव के बुर्जुग परषोत्तम पटेल कहते है कि उनके पूर्वजों ने करीब 100 साल पहले इसकी शुरूआत की थी जो आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। पूर्वजों का ध्येय था कि गांव के लोगों में मेलजोल बढ़े और वह बरसात के समय आवागमन के लिए गेड़ी का उपयोग करने प्रेरित हों। चूंकि पहले गांव में न तो पक्की सड़कें होतीं थी और न ही आवागमन के लिए कोई पर्याप्त साधन। ऐसे में लोग गेड़ी का उपयोग कर न केवल आवागमन करते थे बल्कि बारिश के कारण खराब हुए मार्ग से भी बचते थे।

स्पर्धा में एक बार में दो युवाओं का मुकाबला रहा जिसमें अपनी-अपनी गेड़ी लेकर युवकों ने एक-दूसरे को गेड़ी पर चलते-चलते हुए ही गिराने का प्रयास किया और जो युवक गिरे वह स्पर्धा से बाहर हुए और फिर दूसरे युवकों को मैदान में उतारा गया। स्पर्धा में ग्राम के मनोज बाथरे को उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर विजेता चुना गया। जिसे आयोजन समिति ने पुरस्कृत किया साथ ही सभी प्रतिभागियों को नारियल भेंट किए। गेड़ी स्पर्धा देखने सहावन सहित आसपास के गांवों से भी महिलाओं-पुरूषो की भीड़ रही।