
नईदुनिया प्रतिनिधि, नीमच। मालवा के अफीम बेल्ट में अब नशे का चेहरा बदलने लगा है। अफीम और डोडाचूरा तस्करी के लिए कुख्यात नीमच-मंदसौर क्षेत्र में सिंथेटिक ड्रग एमडी की अवैध फैक्ट्रियां पकड़े जाने के बाद एजेंसियां अलर्ट पर हैं। केमिकल से तैयार होने वाले इस ‘हाई-रिस्क’ नशे ने तस्करों को खेतों से लैब पर शिफ्ट कर दिया है। गांधी सागर के डूब क्षेत्र में संचालित फैक्ट्री का भंडाफोड़ बताता है कि अब इस इलाके में पारंपरिक नशे की जगह सिंथेटिक ड्रग का नेटवर्क पनपने लगा है।
स्थिति यह है कि इसी साल भोपाल में मेफेड्रोन की सबसे बड़ी खेप पकड़ी गई, इंदौर में एमडी और इसे बनाने वाले रसायनों का जखीरा मिला और मंदसौर में तस्करों के संपर्क उजागर हुए। लगातार सामने आ रही इन कार्रवाई से साफ है कि सिंथेटिक ड्रग्स ने मालवा सहित पूरे प्रदेश को जकड़ लिया है।
नीमच जिले में एमडी ड्रग की फैक्ट्री के मामले में नारकोटिक्स विंग के वरिष्ठ अधिकारी गहनता से जांच कर रहे हैं। मौके पर पकड़े गए तीनों युवकों की आपराधिक पृष्ठभूमि तलाशने के बाद फैक्ट्री के संचालन और आपूर्ति नेटवर्क को ध्वस्त करने की कोशिश की जा रही है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, मप्र पुलिस की नारकोटिक्स विंग और पुलिस सहित अन्य एजेंसियां एमडी ड्रग की अवैध फैक्ट्री और आपूर्ति के मामले में जांच पड़ताल में जुट गई है।
गांव लसूड़िया ईस्तमुरार में जहां कार्रवाई हुई है, वहां स्थान गांधी सागर डूब क्षेत्र में लगभग निर्जन स्थान है। आबादी से दूर एमडी ड्रग की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। इसके पीछे कारण सामने आया कि केमिकल से एमडी बनाने के दौरान तीक्ष्ण बदबू उठती है। इसे छिपाने के लिए तस्करों ने आबादी से दूर गांधी सागर के डूब क्षेत्र में यह निर्जन स्थान चुना।
मप्र पुलिस की नारकोटिक्स विंग इंदौर-भोपाल की टीम ने नीमच-मंदसौर के विंग के अधिकारियों-कर्मचारियों और नीमच जिले के रामपुरा व कुकड़ेश्वर थाने के बल को लेकर 28 नवंबर को दबिश दी थी और खेत पर बने एक कमरे में संचालित एमडी ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। कार्रवाई के दौरान 2 किलो 850 ग्राम एमडी ड्रग के अलावा प्रोसेस के बाद सुखाने के लिए रखी गई लगभग 10 किलो से अधिक एमडी ड्रग को जब्त किया था।
मौके से उपकरण और केमिकल बरामद किए थे। एमडी ड्रग बनाने की फैक्ट्री संचालित करने के आरोप में ग्राम खेड़ी दायमा के निरंजन बंजारा, लसूड़िया ईस्तमुरार के अर्जुन बंजारा और भाई रमेश बंजारा को गिरफ्तार किया था।
सिंथेटिक ड्रग की धरपकड़ के लिए लगातार छापामार कार्रवाई की जा रही है। हमारा फोकस सिर्फ बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि फैक्ट्रियों, सप्लाई चैन और फाइनेंसरों तक पहुंचकर पूरे सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क को खत्म करने पर है। - महेश चंद्र जैन, डीआईजी, नारकोटिक्स
ड्रग्स तस्कर और नशे के कारोबार में लिप्त अपराधी इस इलाके से सटी राजस्थान सीमा का फायदा उठाते हैं। पहले चित्तौड़गढ़ इलाका तस्करों का गढ़ था। डोडा चूरा जैसे मादक पदार्थों पर सख्ती हुई, तो अपराधी सिंथेटिक ड्रग के धंधे में उतर गए। एमडी ड्रग की गंध तेजी से फैलती है, इसलिए ये मप्र-राजस्थान सीमा के जंगलों का इस्तेमाल करते हैं।
नशे के वे पदार्थ, जिन्हें प्राकृतिक रूप (अफीम, गांजा आदि) से नहीं, बल्कि रसायनों के मिश्रण से लैब में तैयार किया जाता है। एक्स्टेसी, मेफेड्रोन, एम्फेटामिन, एलएसडी और मेथाम्फेटामिन इसके उदाहरण हैं।
एमडी ड्रग का पूरा नाम एमडीएमए मतलब 3-4 मेथिलीन डाइ आक्सी मेथेम्फेटामाइन हैं। यह एक सिंथेटिक ड्रग है, जिसका उपयोग सिर्फ नशे में होता है। इसे बनाने में ड्रग माफिया सैफ्रोल, आइसोसैफ्रोल, पिपेरोनल, 3.3 मिथाइलीन डाइ आक्सीफेविन और 2 प्रोपेलोन सहित अन्य केमिकल का उपयोग करते हैं। एमडी ड्रग का नशा समूचे देश में पैर पसार चुका है।
सिंथेटिक ड्रग बनाना आसान है। बड़े स्थान की जरूरत नहीं। कमरे में भी बनाई जा सकती है। पुलिस की निगरानी कम होती है।