नीमच(नईदुनिया प्रतिनिधि)। नवपद की आराधना तन के साथ मन शुद्धि का सशक्त माध्यम है। इसके बिना आत्मा कल्याण नहीं होता है। इससे मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। रूखा सूखा आहार करके अपनी रसना इंद्रियों पर नियंत्रण किया जाता है। तपस्या से मन इंद्रियां वश में होती हैं। अंतरमूर्खता प्रकट होती है। तब के प्रभाव से रोक, चौक, दुख-दरिद्र मिटता है। दुनिया में जितनी भी लब्धियां सिद्धियां हैं। वह तपस्या से हासिल हो सकती हैं। नवपद की आराधना में साधु पद की आराधना महत्वपूर्ण होती है। साधु हमें ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं। साधु की सेवा करने वाले का आत्म कल्याण होता है। साधु मोक्ष मार्ग का ज्ञान सिखाते हैं। साधु का जैन शासन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान होता है। यह बात साध्वी हित दर्शना श्रीजी मसा ने कही। वे श्री जैन श्वेतांबर महावीर जिनालय विकास नगर में आयोजित चातुर्मास धर्म सभा में बोल रही थी।

उन्होंने कहा कि आचार्य को तीर्थंकर के समान कहा गया है। साध्वी चारु दर्शना श्रीजी मसा ने कहा कि आचार्य पांच अचारों का विधिवत पालन करते हुए सत्य का मार्ग दिखाते हैं। अप्रमाद भाषा में धर्म का उपदेश देते हैं। आचार्य के हृदय में जिन आज्ञा का पालन करने वाले की अनुमोदना करना और करवाना यही उद्देश्य होता है। उनकी वाणी जीना आज्ञा को दर्शाती है। अंतिम चार पांच धर्म तत्व होते हैं। तीनों तत्व की आराधना उनके जैसा होने के लिए करनी चाहिए। देव की आराधना देव बनने के लिए होनी चाहिए। गुरु आराधना संयम ग्रहण करने के लिए करना चाहिए। धर्म आराधना आत्मा में रहे हुए आत्मा के मौलिक गुण प्रकट करने के लिए करनी चाहिए। धर्म विभागों के रोग को मिटाने में सक्षम होता है ।

नवपद की आराधना अंतर्मन करुणा जगाती है

नीमच। नवपद की आराधना मन को शुद्ध करती है। यह नवपद की आराधना अंतर जन्मों के खोए खजाने को वापस दिला देती है। अंतर्मन में दया करुणा जाग्रत करती है। इसमें नवकार निहित है। इस साधना से आत्म कल्याण हो सकता है। सब दुखों की जड़ अज्ञानता है। लाखों दुखों की एक दवा नवपद आराधना है।

यह बात साध्वी गुणरंजणा श्रीजी मसा ने कही। वे श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ पद्मावती धाम शक्ति नगर बघाना में आयोजित चातुर्मास धर्म सभा में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि श्रीपाल में करुणा थी जो ज्ञान द्वारा प्रकट हुई थी। हमें हृदय से धनवान बनना चाहिए। साधु को धनवान कहते हैं। साधु में ज्ञान, करुणा, त्याग, वैराग्य रहता है। वह कभी चोरी नहीं होता है। धर्म के प्रति हमारी निष्ठा होनी चाहिए। कषाय के कचरे से दूर रहना चाहिए। मन क्षमता में रहना चाहिए। अरिहंत आत्मा प्रेरक सिद्ध भगवंत सूचक आचार्य बुद्धत्व उपाध्याय भवन वाचक साधु भगवंत सहायक गुरु के परिचायक हैं। अरिहंत सुख आचार्य सदाचार उपाध्याय विनय साधु समता के भंडार है धन से बिस्तर खरीद सकते हैं। नींद नहीं। नवपद आराधना दया सिखाती है। संत हृदय से कोमल होते हैं संत की माता अष्ट प्रवचन माता होती है। यह शरीर किराए का मकान है। मनुष्य का निवास संसार में रहता है भीतर का राग द्वेष सुधारना आवश्यक है। साधु बने बिना साधना नहीं होती है। साध्वी मसा ने भजन प्रस्तुत किए। साध्वी मसा की प्रेरणा से आयम्बिल की तपस्या निरंतर जारी है इस अवसर पर पांच भाग्यशाली विजेताओं को ड्रा निकालकर पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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सिद्धचक्र महा पूजन आज शक्तिनगर मे

नीमच। साध्वी गुणरंजना की पावन निश्रा में शंखेश्वर पार्श्वनाथ पद्मावती धाम शक्तिनगर बघाना में 17 अक्टूबर को सुबह नौ बजे सिद्ध चक्र महा पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के धर्म लाभार्थी शांतिलाल उमा देवी डोशी की स्मृति में राकेश संजू देवी अरिहंत काजल पलक डोशी परिवार ब्यावर होंगे।

नवपद तपस्या मुस्कान की खुशियां देती है

नीमच। नवपद ओली तप मुस्कान की खुशियां देती है। इसका धैर्य परिवार में सामंजस्य का संदेश देता है। महापुरुष धीर गंभीर होते हैं। यह बात साध्वी देवेंद्र श्रीजी मसा ने कही। वे श्री जैन श्वेतांबर भीड़ भंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट चातुर्मास समिति द्वारा जैन भवन में आयोजित धर्मसभा में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी एक गाड़ी के दो पहिए होते हैं। यदि पत्नी पति के पैर दबाती है तो नक्षत्र तो ठीक होते हैं। पति को परमेश्वर और पत्नी को गृह लक्ष्‌मी कहा जाता है। नारी-नारी परिवार की रक्षा के लिए दुर्गा ज्ञान के लिए सरस्वती और धन के लिए लक्ष्‌मी बन कर रक्षा करती है। नारी के संस्कार पत्नी बहन दासी माता अलग-अलग रूप में सामने आते हैं। नारी में सबसे पहला और महत्वपूर्ण गुण सहनशीलता का होना चाहिए। वही उसको जीवन में सफलता दिलाता है। परिवार में हमेशा मीठी मुस्कान देना चाहिए। एक मुस्कुराहट घर में खुशहाली ला सकती है। पत्नी के लिए पति ही सुख दुख में सच्चा साथी होता है। घर की प्रतिष्ठा सोना चांदी धन मिट्टी से नहीं प्रतिष्ठा ज्ञान ध्यान स्वाध्याय से होती है। साध्वी मसा ने परमात्मा के दर्शन में तप आदि का प्रयोग विधि पूर्वक कैसे करें इसका विस्तार से समझाइश प्रदान की। साध्वी देवेंद्र श्रीजी मसा की प्रेरणा से शाश्वत ओली की आराधना सिद्धचक्र भगवान की आराधना उपासना चल रही है। वर्ण आयम्बिल एवं सादे आयंबिल तपस्या भक्त वर्ग द्वारा तपस्या की जा रही है। तपस्या से देवी-देवता देवलोक नंदीश्वर दीप जाकर अठाई महोत्सव मनाया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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