नीमच (नईदुनिया प्रतिनिधि)। किसानों का रुझान ऊटी लहसुन की बोवनी की ओर बढ़ता जा रहा है। किसान अभी से इसका बीज खरीद रहे है। उन्हें एक क्विंटल ऊटी लहसुन करीब 23 हजार रुपये मिल रहा है। इस वर्ष किसानों को लहसुन के बेहतर उत्पादन की उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि जिले की कृषि भूमि को उन्नातशील खेती के लिए पहचाना जाता है। इसी कारण कई प्रकार की औषधीय फसलों की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। जिले की करीब 70 फीसद आबादी खेती पर आश्रित है। वहीं शहर के बाजारों की रौनक भी खेती से बनी रहती है। शहर की कृषि उपज मंडी को भी लहसुन की प्रदेश की बड़ी मंडियों में गिना जाता है। जिले में बड़े स्तर पर लहसुन की खेती की जाती है। कुछ वर्षों में किसानों का रुझान ऊटी लहसुन की ओर बढ़ा है। किसान बोवनी के लिए ऊटी लहसुन को गीला ही खरीदते हैं जिसे सुखाने के बाद ही बोया जाता है। किसान अभी बढ़िया गीली ऊटी लहसुन करीब 23 हजार रुपये प्रति क्विंटल में खरीद रहे हैं। व्यापारी व किसान इस लहसुन को ऊटी से खरीदकर लाते हैं और जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में बेचते हैं। सबसे ज्यादा ऊटी के लहसुन की दुकानें जावद व अठाना में लगी हुई हैं। हालांकि जिले के अन्य क्षेत्रों में भी ऊटी लहसुन मिल रही है। प्रत्येक दुकान पर इस लहसुन भावों में कुछ अंतर रहता है।

बेहतर उत्पादन

उद्यानिकी विभाग की मानें तो वर्ष 2020-21 में 22 हजार 500 हेक्टेयर में लहसुन की बोवनी की गई थी लेकिन मौसम की प्रतिकूलता के चलते पैदावर काफी प्रभावित रही। इसमें करीब चार हजार हेक्टेयर में ऊटी की लहसुन बोई गई थी लेकिन जिले में अल्पवर्षा के चलते इसकी भी पैदावार प्रभावित हुई। वहीं बीज भी 40 हजार रुपये क्विंटल से अधिक मिला था जिससे किसानों को नुकसान हुआ। जिले की खेती उन्नातशील है। इससे फसलों की बंपर पैदावार होती है। उद्यानिकी विभाग की मानें तो जिले की कृषि भूमि में लहसुन की पैदावार 90 से 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से होती है। इसलिए किसानों का लहसुन की खेती प्रति ज्यादा रुझान है।

पिछले वर्ष ऊटी लहसुन के भाव 40 से 42 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक थे। इस बार करीब 23 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक भाव हैं। इस बार ऊटी में लहसुन की बंपर पैदावार हुई है। इसलिए भाव कम हैं।-लोकेश धाकड़, केसरपुरा

मौसम की प्रतिकूलता के चलते पिछले वर्ष लहसुन की पैदावार प्रभावित रही। पूरे वर्ष बीमारियां आती रही। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि किसान इस बार भी ऊटी लहसुन बोवनी के लिए ले रहे हैं।-कुशल बोहरा, जावद

इस बार देशी लहसुन के भाव बेहद कम हैं। वहीं ऊटी लहसुन के भाव तेज हैं। इससे किसानों का रुझान ऊटी लहसुन की ओर बढ़ रहा है। लहसुन सूखने के बाद खेतों में बोवनी की जाएगी।-शिवलाल धाकड़, केलूखेड़ा

अक्टूबर में करें बोवनी

पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष ऊटी के लहसुन के भाव कम हैं। पिछले वर्ष जिले में अल्पवर्षा हुई थी। इससे लहसुन के रकबे में कमी आई थी। किसान अक्टूबर में बोवनी करें। इससे फसल पर बीमारियों का प्रकोप नहीं होता वहीं बेहतर पैदावार होती है।-सीपी पचौरी, प्रमुख विज्ञानी, कृषि विज्ञान केंद्र नीमच

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local