नीमच से इंदौर के बीच दिसंबर में चलाना चाहते हैं इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन (फ्लैग)

- चित्तौड़ से निम्बाहेड़ा तक भी हो जाएगा काम पूरा

- नीमच-निम्बाहेड़ा में हो रही देरी 11 एमडीएस-65 - मंदसौर स्टेशन तक इलेक्ट्रिक लाइन को सीआरएस ओके रिपोर्ट दे गए है। अब जल्द ही डीजल इंजन की जगह दिखेंगे इलेक्ट्रिक इंजन। .नईदुनिया

मंदसौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

रतलाम से लेकर मंदसौर तक के रेलखंड पर इलेक्ट्रिक लाइन के निरीक्षण के बाद सीआरएस ने लगभग अपनी ओके रिपोर्ट दे ही दी है। अब यहां अगले कुछ दिनों में इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेने चलाने को हरी झंडी मिल जाएगी। अब डीआरएम नवंबर तक मंदसौर-नीमच के बीच बिजली का इंजन चलाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। उनका मानना है कि नवंबर में सीआरएस का निरीक्षण कराकर दिसंबर में नीमच से इंदौर तक इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेने चलने लगे। इसके लिए तेजी से काम चल रहा है। वहीं, चित्तौड़ से निम्बाहेड़ा के बीच भी जल्द ही काम पूरा होने के दावे किए जा रहे हैं। बस अब बीच में नीमच-निम्बाहेड़ा का लगभग 29 किमी का हिस्सा बच रहा है।

अंगे्रजों द्वारा बिछाई गई जयपुर-हैदराबाद मीटरगेज लाइन के प्रमुख स्टेशन रहे मंदसौर में ब्रॉडगेज लाइन भी आजादी के 60 साल बाद आई थी। अब ब्रॉडगेज होने के 12 साल बाद इसका इलेक्ट्रिफिकेशन हो गया है। रविवार को रेलवे के मुख्य सरंक्षा आयुक्त आरके शर्मा ने जावरा से मंदसौर के बीच इलेक्ट्रिक लाइन का निरीक्षण कर कार्य पर संतुष्टि जताई है। कुछ छोटी-छोटी कमियां पूरी होते ही इस ट्रैक पर इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन चलाने को हरी झंडी दे दी जाएगी।

रतलाम रेल मंडल ने रतलाम-नीमच के बीच तेजी से इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने का कार्य किया है। रतलाम से मंदसौर तक के 86 किमी हिस्से को पूरा भी कर लिया है। मंदसौर-नीमच के बीच 50 किमी हिस्से में पोल भी लग गए हैं और तार भी बिछ गए हैं। अब उनके छोटे कार्य किए जा रहे हैं। रतलाम डीआरएम ने नंवबर तक नीमच-मंदसौर के बीच सीआरएस का निरीक्षण कराने का लक्ष्य रखा है। वह दिसंबर में इस लाइन पर इलेक्ट्रिक इंजन चलाना चाहते हैं।

अभी मंदसौर-नीमच के बीच चल रहा है काम

अभी मंदसौर-नीमच रेलखंड में इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य चल रहा है। उसके पूरा होते ही नवंबर में फिर सीआरएस से निरीक्षण कराने की तारीख ली जाएगी। अगर सीआरएस की तारीख जल्द ही मिल गई तो रतलाम-नीमच रेलखंड का इलेक्ट्रिफिकेशन हो जाएगा।

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नीमच-चित्तौड़ के बीच अभी गति धीमी

अभी अजमेर व उदयपुर से चित्तौड़ तक इलेक्ट्रिक लाइन बिछ चुकी है और उसका सीआरएस निरीक्षण भी कर चुके हैं। पर नीमच से चित्तौड़ के 50 किमी के हिस्से में गति काफी धीमी चल रही है। अभी नीमच तरफ से इलेक्ट्रिफिकेशन की हलचल नहीं दिख रही है। वहीं चित्तौड़ से शंभूपुरा तक तो कार्य पूरा हो गया है। उससे आगे निम्बाहेड़ा तक अभी काम बाकी हैं। इसके चलते इस हिस्से में काम कब पूरा होगा लक्ष्य तय नहीं किया गया है। इस 50 किमी के मार्ग के पीछे लंबी दूरी की ट्रेनों को इलेक्ट्रिक इंजन से चलाने में समय लग सकता है।

कोटा-रतलाम, जयपुर-रतलाम का वैकल्पिक मार्ग मिलेगा

वर्षों से बिना इलेक्ट्रिफिकेशन वाली इंदौर-अजमेर व चित्तौड़-कोटा रेलमार्ग पर अब बीच-बीच में तेजी से कार्य चल रहा है। अजमेर से चित्तौड़ के बीच लाइन का इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है। नीमच-चित्तौड़ रेलखंड पर दोहरीकरण की गति भी काफी धीमी है और इसके साथ ही इलेक्ट्रिकफिकेशन का काम भी होना है। एक-दो सालों में यह सभी कार्य पूरे होने के बाद कोटा-रतलाम व जयपुर-रतलाम के बीच रेलवे को पूरा वैकल्पिक इलेक्ट्रिक रेल मार्ग मिलेगा। जो वर्तमान में दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर बढ़ रहे यातायात के भार को कम कर सकता है। साथ ही किसी किसी भी परिस्थिति में एक वैकल्पिक मार्ग भी मिलेगा।

बचा काम नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य जावरा से मंदसौर के बीच इलेक्ट्रिक लाइन का निरीक्षण सीआरएस कर चुके हैं। वह कार्य से संतुष्ट भी दिखे हैं। अब हमारा लक्ष्य मंदसौर-नीमच के बीच बचे हुए कार्य पूरे कर नवंबर तक सीआरएस से निरीक्षण कराने का है। और दिसंबर में नीमच से इंदौर-भोपाल तक इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेने चलाई भी जा सकती है।

-आरएन सुनकर, डीआरएम, रतलाम रेल मंडल।