नीमच (नईदुनिया न्यूज)। भागवत वाणी भारतीय संस्कृति की संवाहक है। जब-जब धरती पर असुरों का आतंक बढ़ा है, तब-तब महापुरुष और भगवान ने भारत की धरती पर अवतार लिया है। भारतीय संस्कृति जीवन जीने की कला सिखाती है। तपस्या का फल कभी निरर्थक नहीं जाता है। उसका पुण्य फल मिलता ही है।

यह बात पंडित घीसालाल नागदा महाराज ने कही। वे मंगलवार को मालखेड़ा ग्राम स्थित नागेश्वर मंदिर खाकल देवरा पर भागवत सेवा समिति एवं ग्रामवासियों द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बेटी है तो कल है। कन्या जन्म पर हमें उत्सव मनाना चाहिए। यदि बेटी जन्म नहीं लेगी तो बहू कहां से लाएंगे। बेटी भाग्य लक्ष्मी होती है। बेटे-बेटी के जन्म में अंतर नहीं करना चाहिए। बेटी अपना भाग्य लेकर आती है, वह किसी पर बोझ नहीं बनती है। बेटी पराया धन होती है, उसकी सेवा सुरक्षा करना हम सब परिवारजनों का कर्तव्य होता है। जिस घर में कन्याभोज होता है, उस घर में आनंद होता है और उस घर में धन की कभी कमी नहीं होती है। बेटी के बिना जीवन अधूरा होता है। संसार असार है संसार ही दुख का मूल कारण होता है। सदैव प्रभु भजन करना चाहिए तो आत्म शांति मिलती है। सधाा आनंद आत्मा में है। सुख-दुख का कारण हमारा मन है। मन को वश में करना बहुत मुश्किल है। यह मन बड़ा चंचल है। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा सत्य कर्म के साथ जीवन जीना सिखाती है, इसलिए हमें सदैव सत्य बोलना चाहिए। भागवत कथा का शुभारंभ कलश भागवत पोती एवं तुलसी पूजा आरती से हुआ। 21 नवंबर को खाकल देव मंदिर के शिखर पर नवीन अमृत कलश स्थापना की जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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