- द्वारकापुरी कालोनीवासियों द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में मानवनंद महाराज ने कहा

नीमच (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जहां सत्य का वास होता है वहां नारायण का वास होता है। जीवन में सदैव सत्य के मार्ग पर चलता है वह हमेशा सफल होता है जो सत्य के मार्ग पर चलता है नारायण सारे उसके पास आ जाते हैं। नारायण से पहले सत्य लगा है यही उसकी पहचान है।

यह बात भागवताचार्य मानव आनंद महाराज ने कही। वे समस्त भक्तगण द्वारकापुरी कालोनीवासियों द्वारा क्षेत्र में सुख समृद्धि एवं अच्छी बरसात की कामना को लेकर आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह में मंगलवार को द्वितीय दिवस पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जिसके आचरण में मंगल हो वहां मंगलाचरण होता है। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में मंगलाचरण में ही सत्य का उल्लेख कि या गया है। धोपति ने अपने पांच पुत्रों के हत्यारे अश्वथामा को ब्राह्मण और गुरु पुत्र होने के कारण क्षमा कर दिया क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि गुरु मां अश्वथामा की मृत्यु पर दुखी हो। सूर्य पूजा करने से संतान सुख मान सम्मान यश लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। प्रतिदिन सुबह उठते ही सूर्य पूजा करनी चाहिए। सुख-दुख जीवन की गाड़ी के दो पहिए होते हैं। जिस प्रकार रात-दिन, मीठा-नमकीन साथ रहता है। सुखी होने का प्रयास सभी करते हैं लेकि न कु ंती ने दुख का वरदान मांगा क्योंकि दुख में भगवान साथ रहते हैं। पाप का घड़ा जब बढ़ता है तो उसकी गति बहुत बुरी होती है। सुख-दुख एक जन्म का लेखा-जोखा नहीं होता है। यहा पुण्य का संचय समाप्त होता है तो फिर दुख मिलना प्रारंभ हो जाता है। भगवान की भक्ति को सदैव साथ रखना चाहिए। पांडवों ने जीवन पर्यंत कृष्ण भक्ति को साथ में रखा। इसलिए वे कभी भी पराजित नहीं हुए। श्री कृष्ण के अवसान के बाद राजा परीक्षित को राजा बनाया और पांडव स्वर्गारोहण की तैयारी करने में लग गए थे। यह संसार स्वार्थ का है यहां कोई कि सी का नहीं है। जहां स्वार्थ है वहां प्रेम नहीं रह सकता। जहां स्वार्थ नहीं है वहां पर प्रेम होता है। भगवान और भक्त के बीच सच्चा निस्वार्थ प्रेम होता है। संसार में सिर्फ स्वार्थ का प्रेम रह गया है। संसार स्वार्थ से भरा है। महाराज ने भोले शंकर, शिव पार्वती संवाद, नारद मुनि, गोकर्ण, ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, शिव, अमर कथा, श्रीमद् भागवत प्रहलाद चरित्र, राजा परीक्षित संवाद, श्री राम द्वारा कु ंभकरण वध, कर्दम ऋषि, 24 अवतार, अखंड ब्रह्मचर्य सहित अन्य का वर्तमान में महत्व प्रतिपादित कि या।

Posted By: Nai Dunia News Network

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