- संस्कार शिविर में 85 बच्चों व 60 महिलाओं ने लिया प्रशिक्षण

नीमच (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शिक्षित, संस्कारित व्यक्तित्व निर्माण के लिए नैतिक शिक्षा एवं धर्म संस्कार का होना आवश्यक है। धर्म संस्कार बिना व्यक्तित्व का निर्माण नहीं होता है और नैतिक धर्म संस्कारित शिक्षा के बिना कि सी भी राष्ट्र का विकास नहीं हो सकता है।

यह बात धर्म संस्कार प्रशिक्षक रमेश छलानी धूलिया महाराष्ट्र ने कही। वे श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में वीर पार्क रोड स्थित जैन स्थानक सभागार में आयोजित आठ दिवसीय धर्म संस्कार प्रशिक्षण शिविर के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण शिविर में बच्चों को ध्यान, योग, नैतिक शिक्षा के संस्कार भी सिखाए गए हैं। प्रशिक्षण शिविर पुरस्कार वितरण समारोह में पीयूष दुग्गड उज्जैन ने काव्य रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिविर शब्द में बड़ा ही मर्म छुपा है। शिविर प्रशिक्षक चंदाबाई लोढ़ा नाणगांव महाराष्ट्र ने कहा कि आधुनिक मां बच्चों को डांसर बनाती है, डाक्टर बनाती है उसके हाथ में कंप्यूटर देती है। जिनशासन के सितारे बनाने के लिए विचार नहीं करते हैं। जबकि प्राचीन काल में प्रत्येक मां अपने बच्चों को धार्मिक संस्कार अवश्य सिखाती थी। श्री वर्धमान जैन स्थानक समाज के अध्यक्ष अजीत कु मार बम्ब ने कहा कि बच्चों में धार्मिक शिक्षा के संस्कार इनको भावी राष्ट्र के निर्माता बनने में सहयोग प्रदान करेंगे। निर्मल पितलिया ने कहा कि शिविर में सहभागिता के लिए बच्चों के माता-पिता साधुवाद के पात्र हैं। कल्पना मोगरा ने कहा कि विद्या का ज्ञान हमें विनय हमें योग्यता प्रदान करता है और योग्यता से धन मैं अभी वृध्दि होती है और धन से धार्मिक कार्यों में खर्च करने की प्रेरणा मिलती है। शिविर प्रशिक्षण पुरस्कार वितरण समारोह का संचालन मोनिका मेहता ने कि या। समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में शोभा तरसिंग, रतनलाल बड़ौला, शिविर की लाभार्थी विमलाबाई पारस कांठेड़, शिविर संयोजिका मंजू मेहता थे। मंगलाचरण दिशा पगारिया, सिमोना मेहता व वंशिता मेहता ने प्रस्तुत कि या। आभार पारस कांठेड़ ने व्यक्त कि या।

इनका कि या सम्मान : प्रशिक्षण शिविर में आरुल जैन, ऋषभ राठौड़, सृष्टि राठौड़, कु सुमांजलि जैन, लविका जैन, प्रियल मेहता, आगम जैन, आदिति राठौर, विवान जैन, नेहा मेहता, शानू नलवाया, प्रिया राठौड़, नेहा छिंगावत, रचनाए चंधकांता, मुथा रीना कच्छावा, गौरी चौधरी, चंदा घोटा आदि प्रतिभावान बच्चों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित कि या गया। धार्मिक प्रशिक्षण शिविर में समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवा कार्यों के लिए विमला बाई काठेड, पारस कांठेड़, मंजू मेहता, रमेश छैलानी, मनोज देवड़ा, नंदुरबार शांतिलाल कांठेड़, चंदाबाई लौढ़ा, सुभाष कांटेड़, कल्पना मोगरा आदि का शाल श्रीफल से सम्मान कि या गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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