- नीमच के वर्धमान जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा में उदयमुनि महाराज ने कहा

नीमच (नईदुनिया प्रतिनिधि)। आत्मा क्या है इसके सच्चे स्वरूप को पहचानने की आवश्यकता है। आज हम देखते हैं कि अधिकांश लोगों की सोच है कि धर्म पुण्य परमार्थ सहयोग देने दान भोजन देने को ही हम धर्म मानते हैं लेकि न यह तो हमारी मानवता दयालु भाव है। धर्म के सच्चे स्वरूप की पहचान नहीं होती है इसके लिए आत्म चिंतन की आवश्यकता है। क्योंकि आत्मा का स्वरूप ही सच्चा धर्म है।

यह बात प्रज्ञा महर्षि ज्ञाननिधि पं. उदय मुनि महाराज ने कही। वे वर्धमान जैन स्थानक भवन में गुरुवार सुबह आयोजित धर्म ज्ञान सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म दो प्रकार से होते हैं बाहरी और आंतरिक व्यवहार से कि या जाता है, लेकि न सच्चा धर्म आंतरिक होना चाहिए। धर्म गुड़ की तरह है। जिस प्रकार गुड को पानी में डालते हैं तो वह धीरे-धीरे घुलता है और मिठास देता है। उसी प्रकार धर्म को आचरण में लेने के बाद धीरे-धीरे कर्म की निर्जरा होती है और मानव के जीवन में निखार आता है कर्म के निर्जरा होने के होने से पुण्य बंद होता है। पुण्य बंद होने से मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है। भगवान व धर्म कभी कि सी का अच्छा बुरा नहीं करता है उनके यहां समानता रहती है। यह तो अपने स्वयं के ऊपर निर्भर है कि हम धर्म को कि स प्रकार से कर रहे हैं धर्म करने के लिए भाव में दृढ़ता होनी चाहिए। धर्म के स्वरूप को बदलने के लिए धर्म के साथ-साथ आगम का वाचन भी जरुरी है। जिससे अपनी आत्मा का अवलोकन होकर अपने भाव शुद्ध होते हैं। मानव को भावना ऊंची रखनी चाहिए। सरलता में सहजता से हम सब कुछ मिल जाए इसके लिए पुरुषार्थ कीआवश्यकता है। अधिक पुण्य से देव गति एकम पुण्य से मनुष्य जन्म, अधिक पाप से नरक गति, कम पुण्य से तेज गति मिलती है। कर्म भाव के अनुसार होता है। अनादि से अनंत प्रकार के जीव है। आत्मा का ज्ञान तीर्थंकर की वाणी से होता है। ब्रह्मचर्य के पालन का फल अलग होता है। सिद्ध पद शिव हो जाता है। वह फिर संसार में नहीं भटकता है। जाप का लक्ष्य क्या है इस पर चिंतन करना चाहिए।

उदय मुनि महाराज के प्रवचन आज

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ट्रस्ट जैन कालोनी के तत्वावधान में वीरपार्क रोड स्थित जैन स्थानक भवन में एक जुलाई सुबह 9ः15 से 10ः15 बजे तक प्रज्ञा महर्षि ज्ञान निधि पंडित उदय मुनि महाराज के विशेष प्रवचन आयोजित होंगे।सभी धर्म प्रेमी बंधु समय पर उपस्थित होकर धर्म ज्ञान का पुण्य लाभ अर्जित करें।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close