प्रमुख मार्गों पर 15 फीट तक पानी, 50 करोड़ से ज्यादा के नुकसान की आशंका

-1960 में चंबल नदी पर बना था गांधीसागर बांध

-दिनभर बाढ़ की आशंका से चिंता में रहे लोग

-देर रात करीब 1 बजे नगर में दी पानी ने दस्तक

- सिविल अस्पताल में घुसा करीब 10 फीट तक पानी, स्वास्थ्य सेवाएं बाधित

रामपुरा/नीमच। नईदुनिया प्रतिनिधि

चंबल नदी पर गांधीसागर बांध 1960 के दशक में बना, लेकि न इसके बाद शनिवार को पहली बार रिंगवॉल लांघकर पानी रामपुरा में बाढ़ का पानी घुसा। गांधीसागर बांध के पानी ने पहली बार रामपुरा रिंगवॉल की सरहद लांघी तो हालात भयावह हो गए। नगर के प्रमुख मार्गों पर 10 से 15 फीट तक पानी भर गया। सैकड़ों दुकानों और मकान जलमग्न हो गए। सिविल अस्पताल में भी करीब 10 फीट तक पानी भरने से स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हो गईं। नागरिकों की मानें तो उन्होंने नगर में पहली बार ऐसी बाढ़ की स्थिति देखी है। बाढ़ से नगर के मकानों को काफी नुकसान पहुंचा है। करीब 50 करोड़ रुपए से अधिक के नुकसानी की बात भी अब तक सामने आई है। हालांकि जिला प्रशासन ने बाढ़ का पानी उतरने के बाद ही नुकसानी के संबंध में कु छ कहने का हवाला दिया है।

जिला मुख्यालय से करीब 55 किमी दूर रामपुरा कस्ब की आबादी करीब 18 हजार से अधिक है। खुशहाली और संपन्नाता के प्रतीक रहे रामपुरा नगर में पहली बार नागरिकों ने बाढ़ का तांडव देखा। बारिश के दिनों में सामान्यतः गांधीसागर बांध का पानी रामपुरा में रिंगवॉल तक भरता है, लेकि न शनिवार को मनासा के अलावा उज्जैन संभाग के कई जिलों और क्षेत्रों में हो रही बारिश का असर रामपुरा क्षेत्र में देखने को मिला। गांधीसागर बांध का पानी शनिवार रात करीब 8.30 बजे रामपुरा रिंगवॉल के बराबर आ गया। इसके बाद रात करीब 1 बजे नगर के नाका नंबर 2 से बांध का पानी घुसना शुरू हुआ। देखते ही देखते नगर के कई क्षेत्रों में करीब 10 से 15 फीट तक पानी भर गया। नगर के नए व पुराने बस स्टैंड जलमग्न हो गए। अन्य रहवासी क्षेत्रों में भी बाढ़ का पानी घुसा। इससे करीब 200 से अधिक मकानों और 250 से अधिक दुकानों में जलजमाव के हालात बने। जिला व पुलिस प्रशासन की कोशिश से बाढ़ के हालात के बीच नगर में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकि न लोगों को बड़े नुकसान से बचाया नहीं जा सका। रविवार शाम तक नगर के प्रमुख क्षेत्रों से बाढ़ का पानी बमुश्किल करीब 2 से 3 फीट तक ही उतर सका था।

सड़कों पर चलीं नावें

बाढ़ के हालात के बाद जिला और पुलिस प्रशासन ने रेस्क्यू कि या। नगर के नया बस स्टैंड परिसर, पुराना बस स्टैंड परिसर, नाका नंबर 2, बोहरा बाखल, राजपुरा मोहल्ला, लालबाग सहित अन्य क्षेत्रों में पानी भर गया। इन क्षेत्रों से लोगों को निकालने में जिला व पुलिस प्रशासन ने नावों की मदद ली। जिला प्रशासन की मानें तो बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। दुकानों और मकानों में नुकसानी के बाद नागरिक विलाप करते भी देखे गए।

बोहरा समाज का धार्मिक स्थल पानी से घिरा

नगर में बोहरा समाज का प्रमुख धार्मिक स्थल बाबा मुल्ला खान साहब की दरगाह है। यह स्थान ऊंचाई पर होने के कारण चारों ओर पानी से घिर गया। इसके आसपास के निचले क्षेत्रों और पहुंच मार्गों पर बाढ़ का पानी भर गया।

तिमंजिला इमारत गिरवाई

बाढ़ के दौरान रविवार को नगर में एक तिमंजिला इमारत को ढहाया गया। लालबाग क्षेत्र में जर्जर हालत में खड़ी इस मंजिल को जिला प्रशासन ने नगर परिषद के अमले की मदद से गिरवाया ताकि कोई गंभीर जनहानि नहीं हो सके ।

फोर्स और नगर के युवा बने देवदूत

बचाव कार्य में एनडीआरएफ, सीआरपीएफ, होमगार्ड व पुलिस के जवान लगे थे। इसके अलावा भोई समाज और मुस्लिम समाज के युवा भी मदद के लिए आगे आए। भोई समाज के युवाओं ने नावों की मदद से बचाव कार्य में मदद की। 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सरस्वती शिशु मंदिर, अंजुमन स्कू ल, ओसवाल पंचायत, पोरवाल पंचायत, अग्रवाल समाज व नगर परिषद में आश्रय स्थल बनाए गए हैं।

चेतावनी की अनदेखी भारी पड़ी

गांधीसागर बांध के बढ़ते जल स्तर को देखते हुए जिला और पुलिस प्रशासन शनिवार शाम से ही लोगों को सामान और मकान खाली करने की चेतावनी दे रहा था, लेकि न नागरिकों ने इसकी अनदेखी की। उनका मानना था कि नगर में पानी नहीं घुसेगा, लेकि न देर रात अब तक के सारे मिथक टूट गए।

2006 में रिंगवॉल तक आया था पानी

रामपुरा क्षेत्र में इसके पूर्व 2006 में भी आंशिक बाढ़ जैसे हालात बने थे। नागरिकों की मानें तो 2006 में भी जोरदार बारिश से गांधीसागर में जल स्तर बढ़ा था। यह जलस्तर गांधीसागर बांध की रामपुरा रिंगवॉल के समकक्ष तक पहुंचा था। इसके बाद पानी की आवक थम गई थी। इस कारण रामपुरा नगर में पानी नहीं घुस सका था।

मनासा में 2018 की तुलना में दोगुना से ज्यादा बारिश

मनासा विकासखंड में इस मानसून में करीब 73.93 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य बारिश से लगभग दोगुना से ज्यादा है। 2018 में मनासा विकासखंड में 28.11 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई थी, जबकि इस बार बारिश का आंकड़ा 73.93 इंच तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा 2018 की तुलना में करीब 45.82 इंच अधिक है। वहीं जिले के नीमच विकासखंड में 60.07 और जावद में 51.37 इंच बारिश हो चुकी है। यह बारिश भी औसत बारिश के आंकड़े 32.5 इंच से कहीं ज्यादा है।

24 घंटे में मनासा में लगभग 10 इंच बारिश

पिछले 24 घंटे में जिले के मनासा विकासखंड में करीब 10 इंच बारिश हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में शनिवार सुबह 8 से रविवार सुबह 8 बजे तक 24 घंटे में 4.90 इंच बारिश हुई है। सबसे ज्यादा बारिश 9.56 इंच मनासा में हुई है, जबकि नीमच में 3.58 और जावद में 1.57 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।

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जिले में बारिश की स्थिति

अब तक बारिश : 61.79 इंच

गत वर्ष अब तक बारिश : 36.20 इंच

औसत बारिश : 32.5 इंच

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विकासखंड 2019 2018

नीमच 60.07 48.85

मनासा 73.93 28.11

जावद 51.37 31.65

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पिछले 24 घंटे में बारिश

जिले में : 4.90

नीमच : 3.58

मनासा : 9.56

जावद : 1.57

(जानकारी- मौसम विज्ञान कें द्र और ऑनलाइन साइट्स के अनुसार। बारिश का आंकड़ा इंच में दर्शाया गया है। बारिश के ये आंकड़े 15 सितंबर की सुबह 8 बजे तक के दर्शाए गए हैं।)

जिले के मनासा विकासखंड के रामपुरा और अन्य गांवों में बाढ़ के हालात बने हैं। इस दौरान हमने अभियान चलाकर लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पहुंचाया। मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया कराने का प्रयास कि या। इस कार्य में एनडीआरएफ की एक, सीआरपीएफ की दस टीमें लगाई गईं। करीब 150 से अधिक पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात कि या गया।

-राजीव कु मार मिश्रा, एएसपी नीमच

गांधीसागर बांध का जल स्तर देखते हुए जिला प्रशासन ने शनिवार दोपहर से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। निचली बस्तियों को खाली कराने के साथ डूब प्रभावित क्षेत्रों को भी खाली कराया गया। पुलिस और अन्य विभागों के साथ तालमेल बनाकर बचाव कार्य कि या है। बाढ़ से सर्वाधिक नुकसान रामपुरा में होने की आशंका है। गांवों में भी बाढ़ के हालात है। नुकसानी का सही और वास्तविक आंकड़ा बाढ़ का पानी उतरने के बाद स्पष्ट हो सके गा। फिलहाल कु छ नहीं कहा जा सकता।

-विनय कु मार धोका, एडीएम नीमच