सांचेत। किसानों के पास धान की खेती से दोगुना लाभ पाने का मौका है। किसान अभी खरीफ फसलों की बुवाई-रोपाई के काम में लगे हैं। खरीफ सीजन की मुख्य फसलों में से एक धान है। जिले में धान की पैदावार बोवनी और रोपाई दोनों ही तरीके से होती है। धान की पारंपरिक तरीके से रोपाई के तहत किसान नर्सरी डालते हैं और पौध तैयार होने पर तैयार खेत में रोपाई होती है। यह अपने आप में काफी खर्चिला होता है और काफी पानी लगता है। किसान अगर धान की रोपाई के बजाय सीधी बुवाई करें तो उन्हें दोगुना लाभ हो सकता है। किसान प्रेम सिंह पटेल साचेत ने बताया कि कैसे आप धान की सीधी बुवाई से दोगुना लाभ प्राप्त कर सकते हैं। रोपाई विधि में करीब 15 लाख लीटर पानी प्रति हेक्टेयर खर्च होता है। वहीं रोपाई के काम में करीब 3 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च आता है। इसके अलावा रोपाई विधि से धान की खेती करने पर खेत की पहले कई बार जुताई करनी पड़ती है। इस काम के लिए ट्रैक्टर चलता है और धुआं निकलता हैए जिससे खर्च बढ़ने के साथ ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। वे बताते हैं कि रोपाई विधि से धान की खेती करने में श्रम भी ज्यादा लगता है और मजदूरी खर्च भी बढ़ जाता है। इससे किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। अगर किसान धान की सीधी बुवाई करें तो कम पानी और खर्च में उच्च लाभ प्राप्त कर सकते हैं। किसान प्रेम सिंह पटेल कहते हैं कि कोरोना काल में श्रमिकों की कमी के दौरान धान की सीधी बुवाई मददगार हो सकती है। धान की सीधी बुवाई करने से 35 से 40 प्रतिशत पानी का खर्च कम हो जाता है।

सीधी बुवाई के लिए 5 से 25 जून का समय सही

धान की सीधी बुवाई के लिए गेहूं की बुवाई वाली प्रक्रिया अपनाई जाती है। खेत की जुताई कराने के बाद समतल करा दिया जाता है। अगर किसान भाई धान की सीधी बुवाई करना चाहते हैं तो उनके लिए सबसे उपयुक्त समय 5 जून से लेकर 25 जून तक का है। प्रेम सिंह पटेल कहते हैं कि किसानों को सीधी बुवाई विधि से 20 जून तक काम निपटा लेना चाहिए क्योंकि बाद में बारिश होने के कारण खेत को तैयार करने में दिक्कत आ सकती है। सीधी बुवाई के लिए धान की कीट प्रतिरोधक किस्मों का चुनाव करना चाहिए। इसके लिए कुछ खास किस्में हैं पूसा बासमति 1509, पूसा बासमती1692, पूसा बासमती 1612, पूसा बासमती 1121, पूसा बासमती 1401 सीधी बुवाई के लिए किसान प्रति हेक्टेयर 20.25 किलोग्राम के हिसाब से बीज का प्रयोग करें। 60 किलो ग्राम फास्फोरस, 40 किलो ग्राम पोटाश, 5 किलो ग्राम जिंक प्रति हेक्टेयर प्रयोग करने से पैदावार अच्छी होगी। उपज प्रभावित न हो इसके लिए खरपतवार नियंत्रण जरूरी है। समय पर किसानों को खेत की निदाई करा लेनी चाहिए। किसान बलवंत सिंह भदोरिया बताते हैं कि सीधी बुवाई करने से कुछ इलाकों के खेत में लोहा तत्व की कमी हो जाती है। कमी के कारण पौधे पीले पड़ने लगते हैं। जिससे पैदावार प्रभावित हो सकती है। अगर आपके खेत में भी ऐसी समस्या दिखती है तो आपको फेरस सल्फेट का छिड़काव करना चाहिए। धान की सीधी बुवाई में सिंचाई की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

वर्षा से रातातलाई टोरिया में सीमेंट की चादरें व दीवार गिरी

दीवानगंज। बीती रात तेज वर्षा होने से कई स्थानों पर काफी नुकसान हुआ है। ग्राम रातातलाई टोरिया क्षेत्र में एक बुजुर्ग महिला शांति बाई के घर की दीवार गिरने के साथ ही ऊपर छत में लगी सीमेंट की दस चाद्दरें गिरकर टूट गईं। हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। क्योंकि घर में सो नही रहा थाए अन्यथा बड़ी जनहानी हो सकती थी। घटना की जानकारी मिलते ही सांची नायब तहसीलदार नियति साहू ने पटवारी नंदलाल पंवार को मौके पर भेजा और नुकसान का पंचनामा बनाया गया। बुजुर्ग महिला शांति बाई के पुत्र विजय मालवीय ने बताया कि देर रात्रि तेज वर्षा होने से घर की दस चाद्दर टूटकर नीचे गिरी और घर की दीवार भी टेड़ी होकर होकर गिर गई है। इससे काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रशासन से जल्द मुआवजा दिलाने की मांग की है ताकि वे अपना टूटा हुआ घर पुनरू बनवा सकें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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