अच्छेलाल वर्मा. रायसेन! प्रदेश के रायसेन जिला के कहूला गांव से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 11 अप्रैल को राज्यस्तरीय जलाभिषेक अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न् क्षेत्रों में निर्मित होने वाले 5000 अमृत सरोवर, 10 हजार पुष्कर धरोहर जल संरचनाओं के पुन: प्रारंभ हो रहे कार्यों का शुभारंभ किया था। सीएम ने प्रदेश के सभी 52 जिलों में जल अभिषेक अभियान की शुरुआत यहां पर 52 कलशों का पूजन करके की थी। हैरत की बात है कि जिस जिले से सीएम ने इस अभियान की शुरुआत की उसी जिले में पांच माह में एक भी अमृत सरोवर का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ है।

केंद्र व राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रति अधिकारी कितने बेपरवाह हैं, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि अब तक कुछ सरोवरों को बनाने के लिए भूमि ही चिह्नित नहीं की गई है। केंद्र सरकार की योजना के मुताबिक जिलों में कम से कम 75 अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जाना है, लेकिन रायसेन जिले में अभी तक 58 सरोवर ही चिन्हित किए हैं, जिनका निर्माण कार्य प्रगति पर बताया जा रहा है। सरकार ने जिला पंचायत व ग्रामीण यांत्रिकी विभाग को सरोवरों के निर्माण की जिम्मेदारी दी है। यह दोनों ही विभाग एक-दूसरे पर निर्माण कार्य करने का दायित्व बता रहे हैं।

जल का महत्व नहीं समझा : जिले में इस वर्ष एक जून से अब तक सात सौ मिमी वर्षा हुई है। यदि सरोवर बन जाते तो जल भी भर जाता। वर्षा की अमृत बूंदों का संचयन करने के उद्देश्य से ही सरकार ने अमृत सरोवरों का

निर्माण कराने की योजना बनाई थी।

लागत को लेकर असमानता : अमृत सरोवरों की लागत को लेकर असमानता नजर आ रही है। सांची ब्लाक

के अंबाडी कस्बा में अमृत सरोवर की लागत पांच लाख 52 हजार और बेगमगंज ब्लाक के तिनसुआ में 67 लाख 87 हजार रुपये है। इसी तरह करीब सात लाख में तो कहीं 19 लाख में सरोवर बनाए जा रहे हैं। जबकि सरकार ने प्रत्येक सरोवर के लिए 20 से 25 लाख रुपये बजट दिया है। सभी तालाबों का निर्माण मनरेगा के तहत किया

जा रहा है। कुछ समाजसेवियों से भी तालाब निर्माण में सहयोग लिया जा रहा है जो कि लागत में शामिल नहीं है।

एक-दो तालाबों का ही कराते हैं निरीक्षण

जब कभी केंद्र व राज्य सरकार के कोई अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं तो उन्हें गैरतगंज ब्लाक के गढ़ी कस्बा में 18 लाख 77 हजार रुपये की लागत से बन रहे तालाब को दिखाया जाता है। हालांकि, यह तालाब भी पूर्ण नहीं हुआ है, लेकिन जल भराव अधिक होने के कारण इसे अधिकारी अच्छा काम मान रहे हैं। यहां 15 अगस्त पर तिरंगा भी फहराया गया था। इधर, कलेक्टर अरविंद दुबे का कहना है कि जिले में अमृत सरोवरों का 85 फीसद निर्माण कार्य हुआ है। वर्षा का मौसम शुरू होने के कारण सरोवरों के निर्माण कार्य में रुकावट आई है। वर्षा का जल तालाबों में एकत्र हो रहा है। जिसका लाभ किसानों व ग्राम के रहवासियों को प्राप्त होगा।

जिले में अमृत सरोवरों का 85 फीसदी निर्माण कार्य हुआ है। वर्षा का मौसम शुरू होने के कारण कार्य में रुकावट आई है। वर्षा का जल तालाबों में एकत्र हो रहा है। जिसका लाभ किसानों व ग्राम के रहवासियों को "ङाप्त होगा।

-अरविंद कुमार दुबे, कलेक्टर, रायसेन

Posted By: Ravindra Soni

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